लखनऊ में राजनीतिक सरगर्मी लगातार बढ़ रही है और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए अभी से ही सुगबुगाहट साफ तौर पर देखी जा सकती है। हालांकि मतदान में अभी वक्त बाकी है, लेकिन राज्य के स्थापित राजनीतिक घरानों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए अपनी मजबूत पहचान बनाने वाली प्रभावशाली महिलाओं ने अभी से कमर कस ली है। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के बाद से ही देश भर की तरह उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी महिलाओं को चुनावी टिकट देने की होड़ सी मचती दिख रही है। आने वाला यह चुनाव सिर्फ पुराने सियासी दिग्गजों के बीच का मुकाबला नहीं होगा, बल्कि इसमें पारिवारिक विरासत की ताकत और सोशल मीडिया के जरिए जनता तक पहुंच का स्पष्ट असर देखने को मिलेगा। इस बार के चुनावी रण में कई ऐसे नए और बड़े महिला चेहरे उतर सकते हैं, जिनकी दावेदारी ने अभी से ही अपने-अपने क्षेत्रों में राजनीतिक पारे को काफी ऊपर चढ़ा दिया है। इन संभावित चेहरों में देश के पूर्व प्रधानमंत्रियों के परिवारों से जुड़ी बहुएं और अन्य प्रभावशाली राजनीतिक पृष्ठभूमियों की हस्तियां शामिल हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश से चारू चौधरी की संभावित दावेदारी
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से एक बड़ा नाम चुनावी मैदान में उतर सकता है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की पोत्रवधू और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी की पत्नी चारू चौधरी आगामी विधानसभा चुनाव लड़ सकती हैं। राष्ट्रीय लोक दल पार्टी चारू चौधरी को सहारनपुर, बागपत या फिर मथुरा की किसी सुरक्षित मानी जाने वाली सीट से अपना उम्मीदवार बना सकती है। चारू चौधरी काफी समय से पार्टी के महिला संगठन और विभिन्न सामाजिक आयोजनों में सक्रिय रूप से भाग लेती रही हैं। हाल ही में सहारनपुर जिले में आयोजित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की स्वाभिमान रैली के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में मंच से जनता को संबोधित किया था। उनके इस संबोधन को राजनीतिक विश्लेषकों ने उनकी प्रत्यक्ष चुनावी पारी की शुरुआत के संकेत के रूप में देखा था।
डॉ. सुषमा शेखर की राजनीतिक तैयारियां
इसी कड़ी में देश के एक अन्य पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के परिवार से भी एक नाम चर्चा में है। उनकी पुत्रवधू और भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद नीरज शेखर की पत्नी डॉ. सुषमा शेखर ने भी चुनावी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है। डॉ. सुषमा शेखर बलिया सदर या फिर फेफना विधानसभा सीट से अपनी उम्मीदवारी पेश कर सकती हैं। इस संभावना के पीछे एक अहम कारण यह भी माना जा रहा है कि बीते लोकसभा चुनाव में बलिया निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. नीरज शेखर को हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद से ही डॉ. सुषमा शेखर सक्रिय राजनीति में उतरने की पुरजोर तैयारी कर रही हैं। वह बलिया के स्थानीय कार्यक्रमों, धार्मिक आयोजनों और घर-घर जाकर जनसंपर्क अभियानों में लगातार जुटी हुई हैं और उन्होंने जनता के बीच अपने संकेत दे दिए हैं।
शालिनी सिंह का राजनीतिक सफर और सक्रियता
विवादों से घिरे रहने के बाद हाल ही में यौन शोषण के आरोपों से बरी हुए भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी सिंह भी चुनावी समर में कूदने की पूरी तैयारी कर चुकी हैं। पिछले एक-दो सालों से वह नोएडा क्षेत्र में खासी सक्रिय नजर आ रही हैं। पेशे से एक कवियत्री होने के साथ-साथ वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की महिला शाखा ‘राष्ट्र सेविका समिति’ से तृतीय वर्ष तक प्रशिक्षित हैं। शालिनी सिंह गौतम बुद्ध नगर जिले की किसी सीट या फिर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसी अन्य प्रमुख निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने की इच्छा रखती हैं। पिछले पंद्रह वर्षों से नोएडा के सामाजिक परिवेश में सक्रिय रहने वाली शालिनी सिंह ने मीडिया के सामने स्पष्ट किया है कि यदि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उन्हें निर्देश देता है, तो वे निश्चित तौर पर 2027 का चुनाव लड़ेंगी।
ऋचा सिंह की जमीनी पकड़ और संघर्ष
समाजवादी पार्टी की पूर्व और चर्चित छात्र नेता रहीं ऋचा सिंह भी प्रयागराज की किसी महत्वपूर्ण सीट से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही हैं। अपने समय में ऋचा सिंह ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ की पहली महिला अध्यक्ष का चुनाव जीतकर इतिहास रचा था। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि वह प्रयागराज शहर की पश्चिमी विधानसभा सीट से अपनी किस्मत आजमा सकती हैं। पिछले कुछ वर्षों से जमीनी आंदोलनों, संघर्षों और अपनी मुखर राजनीतिक शैली के लिए पहचानी जाने वाली ऋचा सिंह लगातार प्रयागराज के विभिन्न इलाकों में आम जनता की समस्याओं को लेकर पदयात्राएं कर रही हैं। इन अभियानों के जरिए वह 2027 के चुनावों के मद्देनजर मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत करने में जुटी हुई हैं।
तान्या त्रिपाठी और अमन पटेल की राजनीतिक एंट्री
इन तमाम चेहरों के अलावा, पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी की बेटी तान्या त्रिपाठी भी चुनावी मैदान में उतर सकती हैं। तान्या पूर्व विधायक अमनमणि त्रिपाठी की बहन हैं। अपने परिवार से जुड़े कानूनी और राजनीतिक मामलों को संभालने के बाद अब तान्या सीधे तौर पर जनता के बीच सक्रिय हो चुकी हैं। वे नौतनवा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित होने वाली चौपालों और विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से पहली बार अपनी चुनावी दावेदारी पेश कर रही हैं। इसके अलावा, अपना दल के संस्थापक डॉ. सोनेलाल पटेल के परिवार से जुड़ी अमन पटेल भी इस बार चुनावी रण में कूदने की तैयारी में हैं। वह केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल और पल्लवी पटेल की बहन हैं। प्रतापगढ़ या मिर्जापुर जिले की किसी प्रमुख ओबीसी बहुल सीट से उनके मैदान में उतरने की संभावना है। पटेल परिवार के भीतर राजनीतिक विरासत को लेकर चल रही खींचतान के बीच अमन पटेल सामाजिक कार्यक्रमों और कुर्मी मतदाता वर्ग के बीच अपनी पैथ बनाने में लगी हुई हैं। वर्ष 2023 में अमन पटेल का विवाह हुआ था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शिरकत की थी।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में महिला मतदाताओं की भूमिका
पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक फैली इन छह प्रभावशाली महिलाओं के आगामी चुनावी समर में उतरने की पूरी संभावना है। ये सभी ऐसी महिलाएं हैं जो इससे पहले कभी प्रत्यक्ष रूप से चुनावी मैदान में नहीं उतरी हैं, लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए उन्होंने अपनी तरफ से पूरी ताकत झोंक दी है। उत्तर प्रदेश की कुल 403 विधानसभा सीटों पर महिला मतदाता हमेशा से ही एक निर्णायक और बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती आई हैं। यही मुख्य वजह है कि एक तरफ जहां प्रमुख राजनीतिक दल लोकलुभावन वादों के जरिए राज्य की आधी आबादी को अपने पाले में खींचने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इन पढ़े-लिखे, प्रभावशाली और मजबूत पारिवारिक पृष्ठभूमि वाले नए महिला चेहरों की चुनावी मैदान में आमद के कयास लगाए जा रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इनमें से कितने चेहरे वास्तव में चुनावी मैदान में उतरकर पार्टियों की टिकट पाने में सफल होते हैं।



















