तेलंगाना की राजनीति इन दिनों भारी उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। राज्य की राजधानी हैदराबाद से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के ग्रामीण आवास तक राजनीतिक तापमान काफी ऊपर पहुंच चुका है। हाल ही में विधानसभा के प्रवेश द्वार पर शुरू हुआ गतिरोध अब कई बड़े नेताओं के खिलाफ पुलिस मामलों और गिरफ्तारियों तक जा पहुंचा है। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य के सियासी गलियारों में तनाव को चरम पर ला दिया है, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।
विधानसभा परिसर के बाहर सोमवार को उस समय तीखी झड़प देखने को मिली जब विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति के प्रमुख नेता विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इस प्रदर्शन में केटीआर और टी. हरीश राव समेत कई विधायक शामिल थे जो राज्य की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के एक खास पड़ाव पूरे होने का विरोध कर रहे थे। विरोध जताने के लिए इन सभी ने खास तौर पर तैयार की गई काली पोशाक पहन रखी थी, जिन पर सरकार विरोधी नारे दर्ज थे। सुरक्षाबलों और पुलिस अधिकारियों का कहना था कि सभापति के स्पष्ट निर्देशों के आधार पर ही वहां कड़े सुरक्षा घेरे और पाबंदियां लागू की गई थीं। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी नेताओं ने उन निषेधाज्ञाओं को पार करने का प्रयास किया, जिससे मुख्य गेट पर भारी भीड़, तीखी बहस और शारीरिक धक्का-मुक्की की स्थिति पैदा हो गई। इस शुरुआती टकराव के बाद ही पुलिस ने केटीआर और हरीश राव समेत कई प्रमुख विपक्षी नेताओं को अपनी हिरासत में ले लिया था।
अगले ही दिन यानी मंगलवार को इस पूरे प्रकरण ने कानूनी रूप ले लिया जब पुलिस ने केटीआर और हरीश राव सहित कई अन्य बीआरएस नेताओं के खिलाफ आधिकारिक तौर पर मामला दर्ज कर लिया। दर्ज की गई प्राथमिकी के अनुसार इन नेताओं पर कानूनी ड्यूटियों में बाधा डालने और सुरक्षा कर्मियों के साथ मारपीट करने जैसे संगीन आरोप लगाए गए हैं। पुलिस दस्तावेजों में दावा किया गया है कि नेताओं ने तमाम पाबंदियों को धता बताते हुए जबरन परिसर में घुसने की कोशिश की। इस दौरान महिला पुलिस कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार किए जाने, कर्मचारियों को डराने-धमकाने, बल के जवानों के कॉलर खींचने और विशेष त्वरित प्रतिक्रिया दल के जवानों को धक्का देने की बातें भी प्राथमिकी में शामिल की गई हैं।
दूसरी तरफ बीआरएस खेमे ने इन तमाम पुलिसिया आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पूरे घटनाक्रम को ही गलत बताया है। पार्टी का कहना है कि वास्तव में पुलिसकर्मियों ने ही महिला विधायकों के साथ बेहद अपमानजनक सलूक किया था। सदन के भीतर मंगलवार को वरिष्ठ नेता टी. हरीश राव ने इस मसले को अत्यंत आक्रामक तरीके से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक महिला विधायक की साड़ी तक खींची गई और पूर्व मंत्री पी. सबिता इंद्रा रेड्डी के साथ भी पुलिस ने बुरा बर्ताव किया। हरीश राव ने कहा कि इस बारे में पुलिस आयुक्त के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय الٹا विपक्षी महिला जनप्रतिनिधियों के खिलाफ ही मुकदमे लाद दिए गए। इस स्थिति को उन्होंने एक कहावत के जरिए स्पष्ट किया कि किस तरह गलती करने वाला ही उल्टे शिकायतकर्ता को डराने का प्रयास कर रहा है।
इस सियासी घमासान के बीच मंगलवार सुबह दो प्रमुख बीआरएस एमएलसी टाटा मधुसूदन उर्फ मधु और एन. नवीन कुमार रेड्डी की गिरफ्तारी ने आग में घी का काम किया। इन दोनों विधान पार्षदों पर विधानसभा अध्यक्ष गड्डम प्रसाद कुमार के संबंध में बेहद आपत्तिजनक और अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप है। सैफाबाद पुलिस थाने में यह मामला स्पीकर के विशेष कार्य अधिकारी पोलेपल्ली वेंकटेशम की लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था। शिकायत में स्पष्ट किया गया था कि मीडियाकर्मियों, पत्रकारों, सदन के कर्मचारियों और सुरक्षा बलों के नुमाइंदों के बीच खड़े होकर स्पीकर की शान के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि यह सब टिप्पणियां उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि से भली-भांति वाकिफ होने के बावजूद जानबूझकर की गईं।
जैसे ही मंगलवार को सदन की कार्यवाही शुरू हुई, यह पूरा विवाद तुरंत विधानसभा के पटल पर भी गूंज उठा। हरीश राव ने पुलिस पर महिला सदस्यों के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप दोहराते हुए तत्काल सख्त कदम उठाने की मांग की। इसके जवाब में विधायी कार्य मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने सदन को अवगत कराया कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और विधानसभा अध्यक्ष ने इस पूरे वाकये की विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उस रिपोर्ट के तथ्यों के आधार पर ही आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
सदन के अध्यक्ष गड्डम प्रसाद कुमार ने इस पूरे विषय पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सदन अपनी महिला सदस्यों की गरिमा और सम्मान का पूरा ख्याल रखता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन अपमानजनक बयानों में उनकी माता तक को निशाना बनाया गया था, इसलिए उनके पास इस बात से व्यक्तिगत रूप से आहत होने का पूरा अधिकार है। सत्ता पक्ष के कांग्रेस विधायकों ने विपक्षी दल से मांग की कि वह अध्यक्ष के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणियों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगे। सदन के भीतर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामे के माहौल के चलते कार्यवाही को कुछ समय के लिए रोकना भी पड़ा।
यह राजनीतिक तनाव सिर्फ विधानसभा भवन तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका दायरा ग्रामीण इलाकों तक फैल गया। सिद्दिपेट जिले के एर्रावल्ली क्षेत्र में स्थित केसीआर के निजी फार्महाउस के बाहर मंगलवार को भारी तनाव और गहमागहमी का माहौल बन गया। बीआरएस एमएलसी द्वारा स्पीकर के खिलाफ की गई कथित अभद्र टिप्पणियों के विरोध में गुस्साए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री के इस आवास की ओर मार्च निकालने का निर्णय लिया। आसपास के विभिन्न गांवों से जुटे इन प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा के लिए लगाई गई पुलिस की बैरिकेडिंग को तोड़ने का पुरजोर प्रयास किया। जब सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की, तो दोनों पक्षों के बीच जोरदार धक्का-मुक्की और झड़प शुरू हो गई। इस हिंसक टकराव के दौरान कुछ सुरक्षा कर्मियों के घायल होने की भी खबरें सामने आईं। किसी भी प्रकार की बड़ी अप्रिय घटना को टालने के उद्देश्य से उस फार्महाउस के चारों तरफ भारी तादाद में पुलिस बल तैनात कर दिया गया था।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा इस प्रकार के प्रदर्शन की खबर मिलते ही केटीआर, हरीश राव और बीआरएस के कई अन्य विधायक फौरन विधानसभा से एर्रावल्ली के लिए रवाना हो गए। हालांकि रास्ते में बोलारम के पास पुलिस ने उनके वाहनों के काफिले को आगे बढ़ने से रोक लिया। इस दौरान बीआरएस के इन नेताओं और मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस छिड़ गई। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने नेताओं को समझाने का प्रयास किया कि पूर्व मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए पर्याप्त और पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इसके बावजूद विपक्षी नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि उन्हें मौजूदा पुलिस तंत्र पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है।



















