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2029 के लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी और कांग्रेस का बड़ा दांव, जेन जी वोटरों को लुभाने में जुटे पीएम मोदी और राहुल गांधीराजनीति
22 अग॰ 2026, 2:24 pm (2 घंटे पहले)· 2

2029 के लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी और कांग्रेस का बड़ा दांव, जेन जी वोटरों को लुभाने में जुटे पीएम मोदी और राहुल गांधी

नीट पेपर लीक विरोध-प्रदर्शनों के बाद देश के युवा राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। 2029 के आम चुनावों को ध्यान में रखते हुए बीजेपी और कांग्रेस ने जेन जी वोटरों से जुड़ने के लिए अपनी रणनीतियों में बड़े बदलाव किए हैं।

नीट परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक के खिलाफ इस साल जुलाई में हुए देशव्यापी छात्र प्रदर्शनों ने भारत के युवा मतदाताओं को देश की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है। इस आंदोलन के बाद देश के प्रमुख राजनीतिक दलों को अपनी पुरानी चुनावी रणनीतियों पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। 'जेन जी' के नाम से जानी जाने वाली यह युवा पीढ़ी पारंपरिक राजनीतिक रैलियों, टीवी बहसों या समाचार पत्रों के विज्ञापनों से दूरी बनाए रखती है। इसके बजाय, ये युवा इंस्टाग्राम, यूट्यूब, डिजिटल मीम्स और कॉलेज कैंपस नेटवर्क के माध्यम से राजनीतिक जानकारी हासिल कर रहे हैं, उस पर संवाद कर रहे हैं और अभियानों का संचालन भी कर रहे हैं। वर्ष 2029 के लोकसभा चुनावों की तैयारियों के बीच यह नई पीढ़ी राजनीतिक दलों के लिए अपार चुनावी अवसर के साथ-साथ एक बड़ी चुनौती भी पेश कर रही है।

बीजेपी का डिजिटल बदलाव और कैंपस आउटरीच

भारतीय जनता पार्टी ने पिछले एक दशक में सोशल मीडिया पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है, हालांकि उसका प्राथमिक ध्यान मुख्य रूप से अधिक उम्र के मतदाताओं पर केंद्रित रहा था। लेकिन हालिया छात्र आंदोलनों के बाद पार्टी ने अपने डिजिटल इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव किया है ताकि युवाओं के राजनीतिक विमर्श से सीधे जुड़ा जा सके। बीजेपी ने जेन जी और उनके बाद की अल्फा पीढ़ी तक पहुंचने के लिए 'वन डे, वन यूनिवर्सिटी' नामक एक विशेष अभियान की शुरुआत की है। इस फ़िज़िकल आउटरीच प्रोग्राम के तहत केंद्रीय मंत्री सीधे विश्वविद्यालयों का दौरा कर रहे हैं और छात्रों के साथ संवाद स्थापित कर रहे हैं, जिससे सरकार का जुड़ाव केवल सोशल मीडिया तक सीमित न रहकर सीधे कैंपस तक पहुंच सके।

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डिजिटल मोर्चे पर भी बीजेपी ने युवाओं के अनुकूल शॉर्ट-फ़ॉर्म और इंटरैक्टिव कंटेंट पर ध्यान केंद्रित किया है। छात्र प्रदर्शनों के दौरान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पारंपरिक मंचों या 'मन की बात' के बजाय इंस्टाग्राम पर एक सेल्फी-स्टाइल वीडियो के जरिए युवाओं से सीधे बात की। इसके अतिरिक्त, 19 अगस्त को हुई कैबिनेट समीक्षा में केंद्रीय मंत्रियों की सोशल मीडिया पहुंच का आकलन किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी सबसे आगे रहे। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा साझा की गई रील्स, जिनमें एक 'गेट रेडी विद मी' (GRWM) फॉर्मेट वाली रील भी शामिल थी, को 10 करोड़ से भी ज्यादा बार देखा गया। दिल्ली में पार्टी ने अपनी युवा शाखा, विधायकों, मंत्रियों और एबीवीपी (ABVP) जैसे छात्र संगठनों को निर्देश दिया है कि वे पहली बार वोट देने वाले छात्रों के साथ सीधे संवाद बढ़ाएं।

कांग्रेस की नई रणनीति और राहुल गांधी का युवा संवाद

दूसरी तरफ, देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस भी अपनी रणनीति को नए सिरे से गढ़ रही है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस राष्ट्रीय रणनीति की अगुवाई कर रहे हैं। पारंपरिक रैलियों, लंबी 'भारत जोड़ो यात्रा' और किसानों के साथ बैठकों के बाद, अब राहुल गांधी जेन जी और अल्फा पीढ़ी को साधने के लिए 'आस्क मी एनीथिंग' (AMA) जैसे त्वरित सवाल-जवाब सत्रों का सहारा ले रहे हैं।

कांग्रेस युवाओं को पार्टी से जोड़ने के लिए 'छात्रों की गूंज' नाम से एक देशव्यापी अभियान चला रही है, जो छात्रों के महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। राहुल गांधी इस अभियान के तहत पारंपरिक जनसभाओं के बजाय सीधे छात्रों के बीच पहुंच रहे हैं। प्रयागराज में आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में उन्होंने 'दर्द, डेटा, दौलत' के विचार पर केंद्रित अपनी बात रखी। इसके साथ ही, उन्होंने पुणे के प्रसिद्ध इंजीनियरिंग कॉलेज (COEP) में भी छात्रों से संवाद का कार्यक्रम तय किया है।

2029 के चुनाव में जेन जी की जनसांख्यिकी का गणित

वर्ष 2029 तक भारत में जेन जी (18 से 32 वर्ष की आयु के लोग) की कुल आबादी लगभग 38 करोड़ (380 मिलियन) होने का अनुमान लगाया गया है। इस आबादी में लगभग 19.9 करोड़ पुरुष और 18.1 करोड़ महिलाएं शामिल होंगी। इसके साथ ही जेन जी भारत की सबसे बड़ी वयस्क पीढ़ी बन जाएगी और लगभग 35.7 करोड़ आबादी वाली मिलेनियल्स पीढ़ी को पीछे छोड़ देगी।

जनसांख्यिकी के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 1988 में भारत की कुल मतदान योग्य आबादी में 18 से 29 वर्ष के युवाओं का हिस्सा 38.3 प्रतिशत था। वर्ष 2024 तक यह घटकर 30.1 प्रतिशत पर आ गया, और संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के मुताबिक 2029 तक यह गिरकर 27.8 प्रतिशत रह सकता है। भले ही जेन जी देश का सबसे बड़ा वयस्क समूह बन जाएगा, लेकिन देश की औसत उम्र बढ़ने के कारण कुल मतदाताओं में युवा मतदाताओं का प्रतिशत धीरे-धीरे कम हो रहा है।

सवाल-जवाब

जेन जी (Gen Z) से जुड़ने के लिए बीजेपी ने कौन सा नया अभियान शुरू किया है?
बीजेपी ने 'वन डे, वन यूनिवर्सिटी' अभियान शुरू किया है, जिसके तहत केंद्रीय मंत्री सीधे विश्वविद्यालयों में जाकर छात्रों से संवाद करते हैं।
कांग्रेस का 'छात्रों की गूंज' अभियान क्या है?
यह राहुल गांधी के नेतृत्व में चलाया जा रहा एक देशव्यापी छात्र आंदोलन अभियान है, जो छात्रों की समस्याओं और बुनियादी मुद्दों को उठाने पर केंद्रित है।
2029 तक भारत में जेन जी मतदाताओं की संभावित संख्या कितनी होगी?
2029 तक भारत में 18 से 32 वर्ष की आयु वाले जेन जी युवाओं की संख्या लगभग 38 करोड़ (380 मिलियन) होने का अनुमान है।
कुल मतदाताओं में युवा मतदाताओं का प्रतिशत क्यों घट रहा है?
देश की कुल आबादी की औसत उम्र बढ़ने के कारण 1988 में 38.3 प्रतिशत रहने वाला युवा मतदाताओं का हिस्सा 2029 तक घटकर 27.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
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टिप्पणियाँ 2

Ravikash Gupta@ravikash·34 मिनट पहले

वर्ष 2029 के चुनावों में जेन जी मतदाताओं का रुख पारंपरिक आर्थिक मुद्दों के साथ डिजिटल एसेट्स और रोजगार के नए अवसरों पर भी निर्भर करेगा। जिस प्रकार दोनों प्रमुख दल कैंपस आउटरीच और शॉर्ट-फॉर्म वीडियो जैसे डिजिटल माध्यमों को अपना रहे हैं, उससे स्पष्ट है कि आने वाले समय में चुनावी फंडिंग और अभियानों का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। यह डिजिटल बदलाव अंततः वित्तीय साक्षरता और स्टार्टअप नीतियों पर भी गहरा प्रभाव डालेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·33 मिनट पहले

रविकेश जी के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, मेरा मानना है कि 2029 के चुनावों में जेन जी का यह डिजिटल जुड़ाव सिर्फ राजनीतिक दलों के प्रचार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा असर कानून-व्यवस्था, डिजिटल सुरक्षा और साइबर अपराध से जुड़े नीतिगत मामलों पर भी पड़ेगा। जिस तरह से युवा वर्ग सोशल मीडिया और कैंपस नेटवर्क के जरिए गोलबंद हो रहा है, उससे पुलिस और प्रशासनिक तंत्र को भी अपनी खुफिया और सार्वजनिक सुरक्षा रणनीतियों में बड़े बदलाव करने होंगे। आने वाले समय में राजनीतिक दलों के लिए यह आवश्यक होगा कि वे केवल वर्चुअल विज्ञापनों से आगे बढ़कर इन युवाओं के डिजिटल अधिकारों और सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर ठोस कानूनी और प्रशासनिक खाका पेश करें।

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