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सम्राट चौधरी के लिए पहला बड़ा विधायी इम्तिहान, बिहार विधानसभा में 50 हजार करोड़ के बजट और 13 अहम बिलों पर आज से संग्रामराजनीति
19 घंटे पहले· 0

सम्राट चौधरी के लिए पहला बड़ा विधायी इम्तिहान, बिहार विधानसभा में 50 हजार करोड़ के बजट और 13 अहम बिलों पर आज से संग्राम

बिहार विधानमंडल का पांच दिवसीय मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो गया है। इस दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली नई एनडीए सरकार 50 हजार करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश करेगी, जबकि विपक्ष कानून-व्यवस्था और महंगाई के मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाएगा।

बिहार की राजनीति में आज का दिन काफी गहमागहमी और सरगर्मियों से भरा रहने वाला है। राज्य विधानमंडल का बहुप्रतीक्षित और बहुचर्चित मानसून सत्र सोमवार से अपनी पूरी विधिवत प्रक्रिया के साथ आरंभ हो गया है। यह विशेष सत्र सिर्फ पांच दिनों की बेहद छोटी अवधि तक चलेगा और 24 जुलाई को इसका आधिकारिक समापन होगा। हालांकि इस सत्र की समय अवधि काफी छोटी रखी गई है, लेकिन राज्य के वर्तमान और तेजी से बदलते राजनीतिक हालात को देखते हुए इस आयोजन को विधायी और राजनीतिक दोनों पैमानों पर बेहद महत्वपूर्ण और अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है। हाल ही में राज्य की सत्ता के गलियारों में हुए बड़े फेरबदल के बाद, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई में गठित हुई नई एनडीए सरकार के लिए सदन के भीतर यह पहला और सबसे बड़ा विधायी इम्तिहान साबित होने जा रहा है। सत्ता पक्ष को इस पूरी अवधि के दौरान विपक्ष के बेहद तीखे और चुभने वाले सवालों का लगातार सामना करना पड़ेगा। इस पूरे परिदृश्य में एक खास बात यह भी है कि इसी मानसून सत्र के ठीक बीच में मुख्यमंत्री के तौर पर सम्राट चौधरी अपने कार्यकाल का सौ दिन का एक बेहद अहम और प्रतीकात्मक सफर भी पूरा करने जा रहे हैं। गौरतलब है कि उन्होंने राज्य के मुखिया के रूप में 15 अप्रैल 2026 को पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण की थी। सौ दिन का यह शुरुआती मील का पत्थर नई सरकार के लिए अपनी प्राथमिक उपलब्धियों और भविष्य की दिशा को गिनाने का एक शानदार अवसर भी है, लेकिन इससे पहले उसे विधानसभा की इस कठिन अग्निपरीक्षा से सफलतापूर्वक पार पाना होगा।

आर्थिक और वित्तीय मोर्चे पर इस पांच दिवसीय सत्र में कई बड़े और दूरगामी फैसले लिए जाने की प्रबल उम्मीद है। तय कार्यक्रम के अनुसार सत्र के पहले ही दिन राज्य का वित्त विभाग पूरी तैयारी के साथ सदन के पटल पर वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपना प्रथम अनुपूरक बजट पेश करने जा रहा है। आमतौर पर सरकारी कामकाज में अनुपूरक बजट तब लाया जाता है, जब वार्षिक बजट में तय की गई मूल राशि किसी विशेष योजना या बड़े कार्य के लिए साल के बीच में कम पड़ जाती है। मौजूदा सरकार को अपनी महत्वाकांक्षी विकास परियोजनाओं और जनता से जुड़ी बड़ी कल्याणकारी योजनाओं को बिना किसी आर्थिक रुकावट के जारी रखने के लिए अतिरिक्त धन की सख्त दरकार है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए सरकार सदन से लगभग 50 हजार करोड़ रुपये के भारी-भरकम अतिरिक्त फंड की औपचारिक और कानूनी स्वीकृति मांगेगी। इस विशाल धनराशि का एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा राज्य की खस्ताहाल शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से दुरुस्त करने और स्वास्थ्य सेवाओं के चरमराते बुनियादी ढांचे को जड़ से मजबूत बनाने पर विशेष रूप से खर्च किया जाना है। सदन के आधिकारिक कार्यक्रम के मुताबिक, 21 और 22 जुलाई का महत्वपूर्ण दिन प्रश्नोत्तर काल के लिए पूरी तरह से निर्धारित किया गया है, जहां सभी विधायक बेबाकी से जनहित के सीधे सवाल पूछेंगे। इसके तुरंत बाद विभिन्न महत्वपूर्ण सरकारी विधेयकों पर बहुत ही गहन और लंबी चर्चा की जाएगी। अनुपूरक बजट पर असल और निर्णायक वाद-विवाद 23 जुलाई के लिए तय किया गया है। इसी दिन सरकार विपक्ष द्वारा उठाए गए तमाम सवालों का तथ्यों के साथ विस्तार से जवाब देगी और इस बड़े बजट को अपने बहुमत के दम पर पारित कराने का पूरा प्रयास करेगी। सत्र के आखिरी दिन, यानी 24 जुलाई का समय पूरी तरह से गैर-सरकारी संकल्पों को सदन में विचारार्थ लिए जाने के लिए सुरक्षित रखा गया है।

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विपक्ष का कड़ा रुख और विरोध की आक्रामक रणनीति

सदन की चारदीवारी के भीतर सत्ता पक्ष की आगे की राह बिल्कुल भी आसान नहीं होने वाली है, क्योंकि एकजुट विपक्ष ने सरकार को हर कदम पर घेरने की एक बेहद आक्रामक और पुख्ता व्यूहरचना पहले से ही तैयार कर ली है। राजनीतिक हलकों में यह बात काफी चर्चा में है कि मुख्य विपक्षी नेता और राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव इन दिनों अपनी एक निजी विदेश यात्रा पर हैं और उनके जल्द स्वदेश लौटने को लेकर अभी तक कोई भी पुष्ट या आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। सदन में अपने सबसे बड़े और प्रभावशाली नेता की प्रत्यक्ष गैरमौजूदगी के बावजूद, विपक्षी खेमे के सभी दलों ने एकजुटता दिखाते हुए सरकार पर चौतरफा और जोरदार हमला बोलने का पूरा मन बना लिया है। विपक्ष के राजनीतिक तरकश में सरकार को असहज करने वाले और बैकफुट पर धकेलने वाले कई ज्वलंत मुद्दे पहले से मौजूद हैं। इनमें सबसे बड़ा, ताजा और संवेदनशील मुद्दा भोजपुर जिले से जुड़ा हुआ है, जहां बीते 17 जून को भरत तिवारी नामक व्यक्ति का एक बेहद कथित और विवादास्पद पुलिस एनकाउंटर हुआ था। विपक्ष इस पूरे मामले को राज्य में तेजी से बिगड़ती कानून-व्यवस्था और पुलिस की मनमानी कार्यशैली के एक ज्वलंत उदाहरण के तौर पर पूरी ताकत से उठाने की तैयारी में है। इसके अतिरिक्त, पूरे देश भर में बेतहाशा बढ़ती महंगाई का सीधा और विनाशकारी असर राज्य की गरीब जनता पर पड़ रहा है, जिसे विपक्ष सदन में जोर-शोर से उठाएगा। किसानी और किसानी से जुड़े मोर्चे पर, खरीफ की अहम फसल की बुआई के इस सबसे महत्वपूर्ण समय में राज्य भर के किसानों को यूरिया खाद की भारी और जानलेवा किल्लत का सामना करना पड़ रहा है, जो सदन की कार्यवाही में एक बहुत बड़ा हंगामा खड़ा करने वाला मुद्दा बनेगा। राज्य की लगातार बिगड़ती और खस्ताहाल वित्तीय स्थिति तथा सरकार पर लगातार बढ़ते जा रहे भारी कर्ज के मुद्दे पर भी सरकार से बेहद तीखे और सीधे सवाल पूछे जाने की प्रबल संभावना है। वहीं, इन तमाम संभावित हमलों को लेकर सत्ताधारी गठबंधन का भी स्पष्ट तौर पर कहना है कि वे विपक्ष के हर एक सवाल का पूरी दमदारी और तथ्यों के साथ जवाब देने के लिए तैयार हैं और अपने सभी जरूरी विधायी कार्यों को तय समय-सीमा के भीतर सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद हैं।

राज्य के विकास और सुधारों से जुड़े नए विधेयक

इस बेहद अल्पकालिक मगर विधायी रूप से महत्वपूर्ण कार्यवाही के दौरान, राज्य सरकार पूरे आत्मविश्वास के साथ सदन के पटल पर कुल 13 नए और कड़े संशोधन विधेयक प्रस्तुत करने वाली है। इन सभी प्रस्तावित विधेयकों का मुख्य और दूरगामी उद्देश्य राज्य के व्यापारिक माहौल को तेजी से सुधारना, उच्च शिक्षा प्रणाली में पूरी पारदर्शिता लाना और सरकारी तथा प्रशासनिक कामकाज को अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाना है। राज्य में बाहर से भारी निवेश को आकर्षित करने और स्थानीय उद्योग धंधों को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के लिए बिहार ईज ऑफ डुईंग बिजनेस विधेयक, 2026 और बिहार जीएसटी (संशोधन) विधेयक, 2026 जैसे बेहद अहम और बहुप्रतीक्षित कानून लाए जा रहे हैं। व्यापारिक कामकाज में सहूलियत देने के लिए ही बिहार दुकान एवं प्रतिष्ठान (रोजगार विनियमन और सेवा शर्त) (निरसन) विधेयक, 2026 के जरिए पुराने, जटिल और अड़चन डालने वाले रोजगार नियमों को पूरी तरह से खत्म करने का प्रस्ताव भी एजेंडे में शामिल है। वहीं, दूसरी तरफ समाज में तेजी से फैल रही सट्टेबाजी और अवैध गतिविधियों पर कड़ा और अंतिम प्रहार करने की साफ नीयत से सरकार बिहार जुआ (प्रतिषेध) विधेयक, 2026 को भी इसी सत्र में पेश करेगी।

शिक्षा और स्वास्थ्य के नाजुक क्षेत्र में गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भी सरकार कई सख्त और जरूरी कदम उठा रही है। इसके तहत शिक्षा के क्षेत्र में बिहार निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 लाया जाएगा, ताकि कुकुरमुत्ते की तरह खुल रहे प्राइवेट शिक्षण संस्थानों पर बेहतर सरकारी नियंत्रण और निगरानी रखी जा सके। आम जनता के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बिहार चिकित्सा (संशोधन) विधेयक, 2026 और बिहार नर्सेज पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 के माध्यम से डॉक्टरों और नर्सों के पंजीकरण की पूरी प्रक्रियाओं को पहले से कहीं अधिक पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जाएगा। राज्य भर में जमीन और राजस्व से जुड़े पुराने, उलझे हुए विवादों को जल्द से जल्द सुलझाने और पूरी व्यवस्था को आम आदमी के लिए सुगम बनाने के लिए बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) विधेयक, 2026 और निबंधन (बिहार संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किए जाएंगे। इसके अलावा, बिहार कृषि भूमि (गैर कृषि प्रयोजनों के लिए संपरिवर्तन) (निरसन) विधेयक, 2026 और भारतीय स्टाम्प (बिहार संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिए राज्य में भूमि उपयोग और राजस्व वसूली से जुड़े पुराने और आउटडेटेड प्रावधानों में बड़े बदलाव की तैयारी है। राज्य के अत्यंत पारंपरिक और फिलहाल संकट से जूझ रहे चीनी उद्योग को नई संजीवनी देने के लिए बिहार चीनी उपक्रम (अर्जन) (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी सरकार ने इसी मानसून सत्र में हर हाल में पारित कराने का कड़ा लक्ष्य रखा है।

विधानसभा परिसर के इर्द-गिर्द अभेद्य सुरक्षा घेरा

सत्र के दौरान विपक्ष के भारी विरोध प्रदर्शन, संभावित हंगामे या किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को गंभीरता से देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने पूरे इलाके की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से अभेद्य बना दिया है। पटना स्थित मुख्य राज्य विधानसभा भवन और उसके आसपास के पूरे संवेदनशील और वीवीआईपी इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल और रैपिड एक्शन टीमों की तैनाती कर दी गई है। शहर में कानून-व्यवस्था को हर हाल में बनाए रखने के सख्त और सीधे निर्देश के साथ, प्रशासन ने सोमवार की सुबह से ही पूरे इलाके में दंड प्रक्रिया संहिता की बेहद सख्त धारा 144 लागू कर दी है। पुलिस की यह सख्त निषेधाज्ञा मानसून सत्र के बिल्कुल अंतिम दिन, यानी 24 जुलाई की देर शाम तक पूरी तरह से और बिना किसी ढील के प्रभावी रहेगी। प्रशासन के इस कड़े आदेश के तहत विधानमंडल क्षेत्र के एक बड़े निर्धारित दायरे में किसी भी सार्वजनिक जगह पर बिना अनुमति पांच या उससे अधिक लोगों के एक साथ जमा होने पर सख्त पाबंदी लगा दी गई है। इसके अलावा, किसी भी राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन या छात्र समूह द्वारा धरना देने, सरकार के खिलाफ कोई भी प्रदर्शन करने, भीड़ जुटाकर रैली आयोजित करने या सड़कों पर जुलूस निकालने की भी सख्त रूप से मनाही है। पूरे इलाके में प्रवेश करने वाले किसी भी संदिग्ध व्यक्ति के पास चेकिंग के दौरान हथियार, धारदार वस्तु या कोई भी विस्फोटक सामग्री पाए जाने पर उसके खिलाफ तुरंत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सदन के भीतर चलने वाली यह अहम कार्यवाही बिना किसी बाहरी शोर-शराबे, व्यवधान और बाधा के सुचारू रूप से चल सके, इसके लिए प्रशासन की बिना पूर्व अनुमति के किसी भी प्रकार के लाउडस्पीकर का उपयोग करना पूरे इलाके में पूरी तरह से अवैध घोषित कर दिया गया है।

सवाल-जवाब

बिहार विधानमंडल का मानसून सत्र कब से कब तक चलेगा?
यह विशेष सत्र सोमवार से शुरू हुआ है और कुल पांच दिनों तक चलकर 24 जुलाई 2026 को आधिकारिक रूप से समाप्त होगा।
सरकार पहले दिन कौन सा बड़ा वित्तीय कदम उठाने जा रही है?
राज्य का वित्त विभाग पहले ही दिन 50 हजार करोड़ रुपये का भारी-भरकम अनुपूरक बजट पेश करेगा, जिसका मुख्य फोकस स्वास्थ्य और शिक्षा ढांचे पर है।
इस सत्र में कुल कितने विधेयक पेश किए जाने की योजना है?
सरकार व्यापार, शिक्षा, और भूमि सुधार से जुड़े कुल 13 महत्वपूर्ण विधेयकों को विचार और मंजूरी के लिए सदन के पटल पर रखने वाली है।
विपक्ष किन मुख्य मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है?
विपक्ष भोजपुर में हुए भरत तिवारी के कथित एनकाउंटर, बढ़ती महंगाई, यूरिया संकट और राज्य की खराब माली हालत को प्रमुख मुद्दा बनाएगा।
विधानसभा के आसपास सुरक्षा के क्या कड़े इंतजाम किए गए हैं?
विधानसभा और उसके आसपास के पूरे इलाके में 24 जुलाई की शाम तक धारा 144 सख्ती से लागू कर दी गई है, जिससे धरना-प्रदर्शन और पांच से अधिक लोगों के जुटने पर पूरी तरह रोक है।
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