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समुद्र की तेज लहरों वाले बयान से राहुल गांधी ने साधा निशाना, मुख्य चुनाव आयुक्त पर उठाए गंभीर सवालराजनीति
27 सित॰ 2026, 5:41 pm (29 दिन पहले)· 2

समुद्र की तेज लहरों वाले बयान से राहुल गांधी ने साधा निशाना, मुख्य चुनाव आयुक्त पर उठाए गंभीर सवाल

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। इस बीच विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है और चुनाव आयोग के फैसलों पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक बार फिर सरगर्मी तेज हो गई है जिसकी मुख्य वजह लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का एक ताजा सोशल मीडिया पोस्ट है। राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा कि उन्हें समंदर के भीतर तब तैरना पसंद है जब वहां लहरें काफी तेज होती हैं क्योंकि इससे यह सीख मिलती है कि उथल-पुथल भी दरअसल शांति का ही एक रूप होती है। उनका यह बयान ऐसे नाजुक दौर में सामने आया है जब चुनाव आयोग के भीतर वैचारिक मतभेदों की खबरें आने के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाने की अपनी मांग को काफी मुखर कर दिया है।

विपक्ष का प्रदर्शन और गंभीर आरोप

इस पूरे विवाद की जड़ में केरल कांग्रेस की तरफ से साझा की गई एक जानकारी है। इसके मुताबिक केरल के पूर्व मुख्य सचिव जीजी थॉमसन का यह दावा रहा है कि ज्ञानेश कुमार ने उनसे संपर्क साधा था और भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरने के साथ-साथ मंत्री पद हासिल करने का प्रस्ताव भी दिया था। इस मामले को तूल देते हुए कांग्रेस के साथ-साथ कई अन्य घटक दलों ने दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों में धरने प्रदर्शन आयोजित किए और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई। विपक्षी दलों का यह कहना रहा है कि आखिरकार इस तरह के राजनीतिक प्रस्ताव देने का अधिकार ज्ञानेश कुमार के पास कहां से आया और साल 2016 के दौरान इस कथित संलिप्तता के क्या मायने थे।

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मैच फिक्सिंग और एसआईआर पर घमासान

विपक्ष के इन तीखे हमलों के बीच राहुल गांधी ने आगे बढ़कर यह भी आरोप लगाया कि जब ज्ञानेश कुमार एक सेवारत आईएएस अधिकारी की भूमिका में थे तब उनका इस्तेमाल पार्टी विशेष के लिए राजनीतिक भर्ती कराने में किया गया था और बाद में उन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी गई। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें निष्पक्ष अंपायर की कुर्सी पर बैठाकर चुनावी प्रक्रिया में कथित तौर पर गड़बड़ी करने का जिम्मा सौंप दिया गया। विपक्षी दलों का लगातार यही आरोप रहा है कि निर्वाचन आयोग सत्ताधारी खेमे के इशारों पर काम कर रहा है और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर के जरिए मतदाता सूचियों से सुनियोजित तरीके से नाम हटाए जा रहे हैं।

निर्वाचन आयोग की तरफ से सफाई और प्रेस नोट

इन तमाम गंभीर आरोपों के जवाब में चुनाव आयोग ने एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद विस्तृत प्रेस नोट जारी करके अपनी स्थिति बिल्कुल साफ कर दी थी। आयोग की तरफ से यह स्पष्ट किया गया कि पिछले कुछ महीनों के दौरान देश भर में एसआईआर समेत जितने भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं वे सभी पूरी तरह से सर्वसम्मति का परिणाम रहे हैं। आयोग की विज्ञप्ति के अनुसार 24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों के लिए एसआईआर का निर्देश जारी कर दिया गया था जिसकी शुरुआत सबसे पहले बिहार राज्य से की गई थी और उसके बाद पश्चिम बंगाल समेत देश के अन्य राज्यों में इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया था। आयोग ने जोर देकर कहा कि यह पूरा निर्देश संस्था की आपसी सहमति और मंजूरी के बाद ही प्रभाव में आया था।

कार्यक्रम की तारीखों और चरणों का विवरण

अपने आधिकारिक स्पष्टीकरण में चुनाव आयोग ने आगे यह भी जानकारी साझा की कि देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एसआईआर का विस्तृत कार्यक्रम 27 अगस्त 2025 को जारी किया गया था। इसके अलावा बाकी बचे हुए 19 राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों के लिए इसी तरह का कार्यक्रम 14 मई 2026 को आयोग की सर्वसम्मत सहमति से तय किया गया था। आयोग ने यह भी बात साफ की कि तीसरे चरण के अंतर्गत आने वाले शेष 12 राज्यों में मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन होने के बाद ही कुल मतदाताओं की वास्तविक संख्या सामने आ पाएगी।

भारतीय जनता पार्टी का पलटवार

जैसे ही चुनाव आयोग की तरफ से यह प्रेस रिलीज सामने आई, भारतीय जनता पार्टी ने तुरंत आक्रामक रुख अपनाते हुए कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगियों पर जोरदार जवाबी हमला बोल दिया। सत्ताधारी दल का यह कहना रहा है कि जब आयोग की तरफ से लिए गए प्रत्येक फैसले पर सभी आयुक्तों की सहमति दर्ज है और हर निर्णय सर्वसम्मति से हुआ है, तब फिर किसी एक आयुक्त के बीच मतभेद होने की बात का कोई आधार ही नहीं बचता है। भाजपा ने विपक्ष के इन तमाम आरोपों को राजनीति से प्रेरित और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को ठेस पहुंचाने वाला करार दिया है।

सवाल-जवाब

राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में क्या लिखा?
राहुल गांधी ने लिखा कि उन्हें समुद्र में तब तैरना पसंद है जब लहरें तेज होती हैं क्योंकि उथल-पुथल भी शांति का ही एक रूप है।
विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ क्यों प्रदर्शन कर रहा है?
विपक्ष चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की खबरों और पूर्व अधिकारी द्वारा लगाए गए राजनीतिक भर्ती के दावों के बाद इस्तीफे और महाभियोग की मांग कर रहा है।
जीजी थॉमसन कौन हैं?
जीजी थॉमसन केरल के पूर्व मुख्य सचिव हैं, जिनके हवाले से दावा किया गया है कि उन्हें भाजपा के टिकट और मंत्री पद का प्रस्ताव मिला था।
चुनाव आयोग ने अपने प्रेस नोट में क्या स्पष्ट किया?
आयोग ने स्पष्ट किया कि एसआईआर से जुड़े सभी निर्देश और कार्यक्रम सभी राज्यों के लिए सर्वसम्मति से मंजूर किए गए थे।
एसआईआर की प्रक्रिया कब शुरू हुई थी?
एसआईआर का आदेश 24 जून 2025 को जारी किया गया था जिसकी शुरुआत बिहार से हुई थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·29 दिन पहले

लहरों वाली बात का राजनीतिक मतलब निकालना थोड़ा ज़्यादा ही खींचना लगता है।

Ravikash Gupta@ravikash·29 दिन पहले

लहरों वाली बात पर सियासत ठीक है, पर चुनाव आयोग पर ऐसे सीधे गंभीर आरोप लगाना बिना पक्के सबूत के थोड़ा अजीब लगता है।

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·29 दिन पहले

@Ravikash Gupta जी, 24 जून 2025 की तारीख याद रखना ज़रूरी है, तभी इस उथल-पुथल की गणित समझ आएगी।

Rohan Verma@rohan-verma·29 दिन पहले

चुनाव आयोग और विपक्ष की इस तनातनी में यूपी के चुनावों पर भी असर दिख सकता है, माहौल गरमा रहा है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·29 दिन पहले

रोहन भाई, माहौल बेशक गरम है, पर मुझे नहीं लगता कि चुनाव आयोग के इस विवाद का सीधा असर यूपी के चुनावों पर पड़ेगा। वोटर इन मामलों से ज़्यादा ज़मीनी मुद्दों पर ध्यान देते हैं।

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