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एससीओ शिखर सम्मेलन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मध्य एशिया दौरे से पाकिस्तान और चीन की बढ़ी चिंताराजनीति
29 अग॰ 2026, 11:53 pm (1 घंटे पहले)· 2

एससीओ शिखर सम्मेलन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मध्य एशिया दौरे से पाकिस्तान और चीन की बढ़ी चिंता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान के चार दिवसीय दौरे पर दुनिया की नजर है। शंघाई सहयोग संगठन की इस बैठक में रूस और चीन के शीर्ष नेताओं के साथ कूटनीतिक चर्चा होने जा रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मध्य एशिया का यह अहम दौरा वैश्विक कूटनीति के केंद्र में आ गया है। इस यात्रा के दौरान उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है, साथ ही शंघाई सहयोग संगठन के मंच पर वैश्विक नेताओं के बीच महत्वपूर्ण संवाद होगा। भारत की बढ़ती कूटनीतिक पहुंच से पड़ोसी देशों में रणनीतिक हलचल तेज हो गई है।

ऊर्जा सुरक्षा और रूस के साथ संबंध

किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति में ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सबसे बड़ा आधार होती है। मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और हॉर्मुज़ स्ट्रेट जैसे संवेदनशील तेल गलियारे के आसपास मंडराते खतरों के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए कूटनीतिक संतुलन साधा है। मॉस्को के साथ मजबूत होते व्यापारिक संबंधों के चलते रूस वर्तमान में भारतीय बाजार के लिए कच्चे तेल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया है। पिछले कुछ महीनों के दौरान कुल तेल आयात में रूसी हिस्सेदारी लगभग 50 फीसदी तक दर्ज की गई है। ऐसे हालात में शीर्ष स्तर पर होने वाली यह द्विपक्षीय चर्चा ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखने के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।

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खुफिया चेतावनियां और क्षेत्रीय कूटनीति

वैश्विक स्तर पर सुरक्षा के मोर्चे पर भी बड़े घटनाक्रम चल रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने मॉस्को के साथ संपर्क साधकर कुछ अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी है। पश्चिमी देशों और रूस के बीच चल रहे तनाव के बीच क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर विभिन्न मंचों पर चिंताएं जताई जा रही हैं। ऐसे में उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान के इस महत्वपूर्ण दौरे पर वैश्विक शक्तियों की पैनी नजर बनी हुई है।

मध्य एशिया के साथ मजबूत होते व्यापारिक और सामरिक रिश्ते

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह चार दिवसीय दौरा दो चरणों में बंटा हुआ है। वह 29 और 30 अगस्त को उज्बेकिस्तान में रहेंगे, जबकि 31 अगस्त और 1 सितंबर को किर्गिस्तान का दौरा करेंगे। दोनों देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों का दायरा लगातार विस्तृत हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों में आपसी व्यापार में 300 प्रतिशत और निवेश के आंकड़ों में 700 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच गहरे होते सहयोग को दर्शाती है।

रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी

विदेश मंत्रालय के सचिव सिबी जॉर्ज ने दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि रक्षा उद्योग के क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते तलाशने पर लगातार चर्चा हो रही है। भारत और उज्बेकिस्तान नियमित रूप से दस्तलिक नामक संयुक्त सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेते हैं, जिसका नवीनतम संस्करण इस साल अप्रैल में उज्बेकिस्तान में आयोजित किया गया था। रक्षा के मोर्चे पर यह संस्थागत ढांचा दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल को और पुख्ता करता है।

क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ साझा मोर्चा

क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से उज्बेकिस्तान के साथ सहयोग भारत के लिए विशेष महत्व रखता है। इस देश की सीमा अफगानिस्तान से मिलती है, जिसके कारण आतंकवाद, उग्रवाद और अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए खुफिया जानकारियों का आदान-प्रदान बेहद आवश्यक हो जाता है। दोनों राष्ट्र आतंकवाद के विरुद्ध साझा लड़ाई लड़ रहे हैं और सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।

ऊर्जा और दुर्लभ खनिजों की जरूरतें

परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के विकास के लिए यूरेनियम की निरंतर आपूर्ति आवश्यक है और उज्बेकिस्तान इस दिशा में भारत का एक प्रमुख साझेदार है। इस यात्रा के दौरान परमाणु ईंधन की आपूर्ति को और बढ़ाने पर भी विचार विमर्श होने की संभावना है। इसके अलावा आधुनिक तकनीक, इलेक्ट्रिक वाहनों और हरित ऊर्जा के संक्रमण के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों तथा दुर्लभ धातुओं के मामले में भी उज्बेकिस्तान समृद्ध संसाधन रखता है, जो भारत की औद्योगिक और तकनीकी योजनाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

सवाल-जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा किन देशों का है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान के चार दिवसीय दौरे पर हैं।
इस यात्रा के दौरान मुख्य बैठक कौन सी है?
इस दौरे का सबसे अहम हिस्सा शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ का शिखर सम्मेलन है।
रूस से भारत के तेल आयात की हिस्सेदारी कितनी रही है?
पिछले कुछ महीनों के दौरान भारत के कुल कच्चे तेल के आयात में रूसी हिस्सेदारी लगभग 50 फीसदी तक रही है।
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच कौन सा संयुक्त सैन्य अभ्यास होता है?
दोनों देश नियमित रूप से दस्तलिक नामक संयुक्त सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेते हैं।
भारत और मध्य एशियाई देशों के व्यापार में कितनी वृद्धि हुई है?
पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार में 300 प्रतिशत और निवेश में 700 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·29 मिनट पहले

प्रधानमंत्री के इस मध्य एशिया दौरे का असर राष्ट्रीय राजधानी की कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की आर्थिक प्राथमिकताओं से भी जुड़ता है। रूस से कच्चे तेल का बढ़ता आयात और ऊर्जा सुरक्षा की यह रणनीति सीधे तौर पर देश के औद्योगिक विकास को गति देती है। जिस तरह शंघाई सहयोग संगठन के मंच पर क्षेत्रीय स्थिरता और आतंकवाद के खिलाफ साझा मोर्चा मजबूत हो रहा है, उससे उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों और आंतरिक सुरक्षा पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·29 मिनट पहले

रोहन वर्मा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, इस कूटनीति का सीधा प्रभाव राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक व्यवस्था पर है। आतंकवाद और संगठित अपराध के खिलाफ मध्य एशिया के साथ खुफिया जानकारी साझा करने से देश की सीमाओं और राज्यों की कानून-व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उज्बेकिस्तान जैसे देशों के साथ सीमा सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग बढ़ने से अवैध ड्रग्स तस्करी और चरमपंथी गतिविधियों पर लगाम कसने में मदद मिलेगी, जो सीधे तौर पर आंतरिक सुरक्षा तंत्र को पुख्ता करता है।

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