बांकीपुर के युवाओं ने प्रशांत किशोर को बताया वोटकटवा, भाजपा के स्थानीय उम्मीदवार पर जताया भरोसादो साल में 25913 ब्लड कम्पोनेंट बना चुकी बाड़मेर की यूनिट, अब मरीजों को नहीं जाना पड़ता शहर से बाहरशिवहर की आमना खातून ने पेश की मिसाल, 40 हजार के कर्ज से खड़ा किया लहठी का 20 लाख का कारोबारसम्राट चौधरी का ऐलान, एक महीने में भरेंगे शिक्षकों के खाली पद, भूमिहीन स्कूलों को छह महीने में मिलेगी भूमिफिरोजाबाद के किसानों को फूल-सब्जी की खेती पर मिलेगा 24 हजार तक अनुदान, ऐसे करें आवेदनझारखंड के इस इंजीनियर ने ठुकराई विदेश की शानदार नौकरी, आज अपने गांव में कपड़े बनाकर यूरोप को कर रहे निर्यातEPFO पेंशनधारकों की 7,500 रुपये मासिक पेंशन की मांग पर संसद में क्या बोलीं श्रम राज्यमंत्री शोभा करंदलाजेबड़वानी में सीए युवती से शादी के नाम पर ठगी, उत्तराखंड से दो महिलाएं गिरफ्तारमथुरा में गिरी 11 केवी की हाईटेंशन लाइन, करंट की चपेट में आकर युवक की मौतजन्मदिन पर अखिलेश यादव ने मल्लिकार्जुन खड़गे को दी शुभकामनाएं, बताया सेकुलर मूल्यों का प्रतीक
शहीद दिवस पर मुआवजे और जवाबदेही को लेकर छिड़ी सियासी जंग, दिलीप घोष ने ममता बनर्जी को घेराराजनीति
4 घंटे पहले· 2

शहीद दिवस पर मुआवजे और जवाबदेही को लेकर छिड़ी सियासी जंग, दिलीप घोष ने ममता बनर्जी को घेरा

दिलीप घोष ने ममता बनर्जी पर शहीदों और उनके परिवारों को धोखा देने का आरोप लगाते हुए 1993 की पुलिस फायरिंग के पीड़ितों को मिले अधूरे मुआवजे का मुद्दा उठाया, वहीं टीएमसी और कांग्रेस दोनों 21 जुलाई शहीद दिवस पर अलग अलग कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में शहीद दिवस को लेकर एक बार फिर सियासी पारा चढ़ गया है। दिलीप घोष ने ममता बनर्जी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि यह मंच सिर्फ धरना प्रदर्शन की जगह नहीं, बल्कि शहीदों को समर्पित मंच है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर ममता बनर्जी वहां पूरी रात क्यों जमी रहीं। उनका कहना था कि चाहे वे रात में बैठें या दिन में, वहां असल में उनके साथ कोई खड़ा नहीं है, क्योंकि शहीदों, उनके परिवारों और आम जनता के भरोसे को उन्होंने तोड़ा है, यही वजह है कि आज वे अकेली नजर आ रही हैं।

दिलीप घोष यहीं नहीं रुके। उन्होंने 21 जुलाई 1993 की पुलिस फायरिंग में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें आज तक वह पूरा मुआवजा नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे।

ये भी पढ़ें

मुआवजे को लेकर गंभीर आरोप

दिलीप घोष के मुताबिक अदालत ने शहीद परिवारों के लिए 25 लाख रुपये मुआवजे का निर्देश दिया था, मगर प्रशासन ने असल में सिर्फ 2 लाख रुपये ही परिवारों तक पहुंचाए। उनका आरोप है कि बाकी बची रकम अधिकारियों ने खुद हड़प ली। उन्होंने इसे शहीदों के परिवारों के साथ खुला धोखा करार दिया और कहा कि यही डर ममता बनर्जी को अब भी सता रहा है।

दोषियों को मिली मंत्री पद जैसी जिम्मेदारियां

दिलीप घोष ने कहा कि साल 1993 की उस गोलीबारी में शामिल रहे लोगों पर कार्रवाई होने के बजाय उन्हें ही सत्ता में मंत्री पद, सांसदी और विधायकी जैसे ओहदे नवाजे गए। यानी जिन्हें कठघरे में खड़ा होना चाहिए था, वे सत्ता के गलियारों में पहुंच गए।

1993 की वह खूनी शाम, जिसने जन्म दिया शहीद दिवस को

पश्चिम बंगाल में हर साल 21 जुलाई को शहीद दिवस मनाया जाता है। यह दिन 1993 में लेफ्ट फ्रंट सरकार के कार्यकाल के दौरान एक विरोध मार्च पर हुई पुलिस फायरिंग की याद दिलाता है, जिसमें युवा कांग्रेस के 13 कार्यकर्ता मारे गए थे। तभी से यह तारीख बंगाल की राजनीति में एक भावनात्मक और संवेदनशील मौका बन गई है, जिस पर हर साल अलग अलग पार्टियां अपने अपने तरीके से श्रद्धांजलि देती हैं।

इस बार उसी सड़क पर होगा कार्यक्रम

टीएमसी विधायक संदीपन साहा ने सोमवार को जानकारी दी कि उनकी पार्टी बरसों से यह कार्यक्रम आयोजित करती आई है, लेकिन इस साल खास बात यह है कि समारोह उसी मुख्य सड़क पर हो रहा है, जहां 1993 में असल घटना घटी थी। इसे कई लोग प्रतीकात्मक रूप से अहम मान रहे हैं, क्योंकि घटनास्थल पर लौटकर कार्यक्रम करना उस दौर की यादों को सीधे ताजा कर देता है।

कांग्रेस ने भी मांगी अपनी अलग श्रद्धांजलि की इजाजत

इस पूरे विवाद से पहले पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने बताया था कि पार्टी को शहीद मीनार पर अपना अलग श्रद्धांजलि कार्यक्रम करने के लिए प्रशासन से औपचारिक इजाजत मिल चुकी है। उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस अपने स्तर पर मेमोरियल प्रोग्राम आयोजित करेगी, क्योंकि जिन कार्यकर्ताओं की जान गई थी, वे उस वक्त कांग्रेस का झंडा थामे हुए थे। शुभंकर सरकार ने यह सवाल भी उठाया कि आखिर ममता बनर्जी उसी झंडे के तले यह कार्यक्रम क्यों नहीं मनातीं, जिसके लिए उन कार्यकर्ताओं ने अपनी जान न्योछावर की थी। टीएमसी के भीतर बढ़ती इस राजनीतिक खींचतान के बीच यह पूरा प्रकरण सामने आया है, जो आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।

सवाल-जवाब

दिलीप घोष ने ममता बनर्जी पर क्या आरोप लगाया?
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने शहीदों, उनके परिवारों और जनता के भरोसे को तोड़ा है, इसलिए वे आज अकेली खड़ी हैं।
21 जुलाई 1993 को क्या हुआ था?
लेफ्ट फ्रंट सरकार के दौरान एक विरोध मार्च पर हुई पुलिस फायरिंग में युवा कांग्रेस के 13 कार्यकर्ता मारे गए थे, जिनकी याद में हर साल 21 जुलाई को शहीद दिवस मनाया जाता है।
कोर्ट ने शहीदों के परिवारों के लिए कितना मुआवजा तय किया था और कितना मिला?
दिलीप घोष के मुताबिक अदालत ने 25 लाख रुपये मुआवजे का निर्देश दिया था, लेकिन परिवारों को असल में सिर्फ 2 लाख रुपये ही दिए गए।
दिलीप घोष ने गोलीबारी के जिम्मेदार लोगों को लेकर क्या कहा?
उन्होंने आरोप लगाया कि 1993 की गोलीबारी में शामिल रहे लोगों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें मंत्री, सांसद और विधायक जैसे पद दे दिए गए।
इस साल शहीद दिवस का कार्यक्रम कहां आयोजित हो रहा है?
टीएमसी विधायक संदीपन साहा के मुताबिक, इस बार कार्यक्रम उसी मुख्य सड़क पर हो रहा है जहां 1993 में असल घटना घटी थी।
कांग्रेस पार्टी का इस मामले में क्या रुख है?
पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कहा कि पार्टी को शहीद मीनार पर अपना अलग श्रद्धांजलि कार्यक्रम करने की औपचारिक इजाजत मिल चुकी है और वह पीड़ित कार्यकर्ताओं की याद में अपना मेमोरियल प्रोग्राम करेगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR