मेघालय की प्रमुख क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) अपने संसदीय दल की त्वरित बैठक आयोजित करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। पार्टी के कई विधायकों द्वारा अंदरूनी कामकाज को लेकर जताई गई चिंताओं के बाद यह कदम उठाया जा रहा है। विधायकों की इन आपत्तियों के कारण दल के भीतर आपसी मतभेदों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं गर्म हो गई हैं।
विधायकों की शिकायतों पर जल्द चर्चा की मांग
यूडीपी के वरिष्ठ नेता और वेस्ट शिलोंग से विधायक पॉल लिंगदोह ने पार्टी नेतृत्व से इस दिशा में तुरंत कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया है। बुधवार को आयोजित एक विशेष पार्टी बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए लिंगदोह ने कहा कि संगठन के शीर्ष नेतृत्व को बिना किसी देरी के संसदीय दल की बैठक बुलानी चाहिए ताकि जनप्रतिनिधियों की शिकायतों को सुनकर उनका समाधान निकाला जा सके।
पॉल लिंगदोह ने संवाददाताओं से बात करते हुए पार्टी में किसी बड़े संकट की खबरों को खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी राजनीतिक संगठन के भीतर विचार-विमर्श और मतभेद होना एक सामान्य प्रक्रिया है और इन मुद्दों पर अंदरूनी स्तर पर बातचीत की जा रही है। उन्होंने कहा कि आगामी बैठक का मुख्य उद्देश्य नेताओं और विधायकों के बीच आपसी समन्वय को बेहतर बनाना तथा पार्टी की एकजुटता को मजबूत करना है।
बीजेपी से नजदीकी और विलय की अटकलों पर प्रतिक्रिया
पार्टी के भीतर जारी इन चर्चाओं के बीच मेघालय के राजनीतिक माहौल में यूडीपी के भविष्य को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ चर्चाओं में यह दावा किया गया है कि यूडीपी का एक वर्ग भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के करीब जाने पर विचार कर सकता है। इसके अलावा विधायकों के एक समूह के संभावित विलय से जुड़ी अफवाहें भी सामने आई हैं।
इन अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए पॉल लिंगदोह ने किसी भी दावे की पुष्टि करने से इनकार किया और इन्हें महज अफवाह करार दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने भी इन बातों को सुना है, लेकिन पर्याप्त जानकारी न होने के कारण वे इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हैं।
गठबंधन राजनीति में यूडीपी का महत्व
मेघालय की राजनीति में यूडीपी एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय ताकत के रूप में स्थापित रही है। पार्टी ने अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाए रखते हुए राज्य की विभिन्न गठबंधन सरकारों में अहम भूमिका निभाई है। ऐसे में पार्टी के भीतर उठने वाले असंतोष के सुर राज्य के सियासी समीकरणों के लिहाज से काफी मायने रखते हैं।
पार्टी परिषद द्वारा विधायकों की चिंताओं पर संज्ञान लेते हुए मामला संसदीय दल के सुपुर्द करने का फैसला आंतरिक लोकतंत्र को बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। नेतृत्व की कोशिश है कि बातचीत के जरिए मतभेदों को समय रहते सुलझाया जाए ताकि संगठन में किसी तरह की बड़ी टूट से बचा जा सके। फिलहाल पार्टी का पूरा ध्यान अंदरूनी संवाद पर केंद्रित है।



















