शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज़ में सियासी मुद्दों पर खुलकर राय रखी है। सोमवार को मुंबई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में पड़ी फूट से लेकर INDIA गठबंधन की रणनीति तक, कई मसलों पर अपनी बात रखी और बागी नेताओं को कड़े शब्दों में आगाह किया।
टीएमसी की फूट पर राउत का दो टूक रुख
राउत ने सबसे पहले यह साफ किया कि अब ममता बनर्जी की पार्टी में हुए बिखराव को बीते दिनों की बात मान लेना चाहिए। उनका तर्क था कि इस पूरे प्रकरण को एक महीने से ज़्यादा का वक्त बीत चुका है, ऐसे में अब इस पर चर्चा करना किसी भी लिहाज़ से प्रासंगिक नहीं रह गया है। उन्होंने ध्यान असली सवाल की ओर मोड़ते हुए कहा कि बात उन नेताओं की होनी चाहिए जिन्होंने अपनी ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ बगावत का झंडा उठाने की हिम्मत दिखाई।
'महज़ 800 वोट वाली पार्टी का दामन क्यों थामा'
राउत ने बागी नेताओं के फैसले पर तीखा सवाल उठाया। उनके मुताबिक टीएमसी छोड़ने वालों ने त्रिपुरा की एक ऐसी पार्टी से हाथ मिला लिया है, जिसका अपना कोई ठोस वजूद ही नहीं बचा है और जो राजनीतिक मैदान में खुद अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। इसी संदर्भ में उन्होंने आंकड़े का हवाला देते हुए बताया कि हाल के एक चुनाव में इस पार्टी को सिर्फ़ 800 वोट ही मिल पाए। राउत के शब्दों में, ऐसी डूबती पार्टी का दामन थामकर इन नेताओं ने आखिर किस तरह की समझदारी का परिचय दिया है, यह तो वही बता सकते हैं।
उन्होंने इसके पीछे एक सोची-समझी चाल का आरोप भी लगाया। राउत का कहना था कि अमित शाह ने साजिशन इन नेताओं को जानबूझकर ऐसी पार्टी में धकेल दिया, जो खुद अपना वजूद बचाने के लिए जूझ रही है। उन्होंने कहा कि यह सिलसिला आगे कब तक चलेगा, इसका जवाब आने वाला वक्त ही देगा।
'ममता बनर्जी की टीएमसी ही असली टीएमसी'
इन तमाम हालात के बीच राउत ने ममता बनर्जी को लेकर अपना रुख बिल्कुल स्पष्ट रखा। उन्होंने कहा कि यह कहने में उन्हें कोई हिचक नहीं है कि ममता बनर्जी वाली टीएमसी ही असली टीएमसी है और इस पर किसी को कोई शक नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आने वाले दिनों में यही स्थिति महाराष्ट्र में भी दोहराई जाएगी। बागी नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए राउत ने कहा कि जो भी लोग टीएमसी छोड़कर दूसरी पार्टी में गए हैं, उन्हें जल्द ही बीजेपी की असली सच्चाई का अंदाज़ा हो जाएगा — खासकर तब, जब उन्हें किनारे कर दिया जाएगा।
INDIA गठबंधन को पीएम चेहरा तय करने की सलाह
बातचीत के दौरान राउत ने INDIA गठबंधन की रणनीति पर भी खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि गठबंधन को प्रधानमंत्री पद के लिए एक चेहरा तय करना ही होगा। उनका तर्क था कि अगर बिना पीएम चेहरे के नेता जनता के बीच जाएंगे, तो लोग सीधे सवाल करेंगे कि आखिर उनका प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार कौन है। ऐसी स्थिति में जवाब देना मुश्किल हो जाएगा। इसीलिए राउत के मुताबिक यह बेहद ज़रूरी है कि गठबंधन पहले पीएम फेस को लेकर किसी एक चेहरे पर सहमति बनाए और उसके बाद ही आगे कदम बढ़ाए।













