संसद के मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव बेहद गहरा गया है। मंगलवार को विपक्षी सांसदों ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराते हुए संसद परिसर के भीतर एक पैदल मार्च निकाला। इस प्रदर्शन की अगुवाई कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा कर रहे थे। विपक्षी दल हाल ही में हुए छात्र प्रदर्शन पर कथित पुलिस कार्रवाई, अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोपों और जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग पर सरकार से तुरंत स्पष्टीकरण मांग रहे हैं।
संसद परिसर में विपक्षी सांसदों का विरोध मार्च
विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा यानी प्रेरणा स्थल से अपनी पैदल यात्रा शुरू की और मकर द्वार तक पहुंचे। प्रदर्शनकारी नेताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संसद के दोनों सदनों में उपस्थित होकर जवाब देने का आग्रह किया है। विपक्ष का मुख्य ध्यान जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा किए गए कथित बल प्रयोग पर केंद्रित है। विपक्षी सदस्यों ने जोर देकर कहा कि इस पुलिस कार्रवाई की पूरी जवाबदेही तय होनी चाहिए और गृह मंत्री को दोनों सदनों में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
लोकतंत्र और जवाबदेही पर प्रियंका गांधी का बयान
विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए शासन व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "यह लोकतंत्र है, तानाशाही नहीं है।" प्रियंका गांधी ने स्पष्ट किया कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों और विशेष रूप से छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शनकारी युवाओं पर आंसू गैस के गोले दागे गए, लाठीचार्ज हुआ, पैलेट गन चली या गोलियां चलाई गईं, तो निश्चित रूप से यह फैसला किसी उच्च स्तर से ही लिया गया होगा। उन्होंने मांग की कि जिसने भी इस कार्रवाई के आदेश दिए हैं, उसे इसकी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।
राहुल गांधी और महबूबा मुफ्ती पर गिरिराज सिंह का पलटवार
विपक्ष के इस मार्च और बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने तीखा हमला बोला। राहुल गांधी के रुख की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, "राहुल गांधी ज्ञान न बांटें और देश को ऐसा दुर्भाग्यपूर्ण नेता प्रतिपक्ष कभी न मिले।" गिरिराज सिंह ने तर्क दिया कि देश की संसद ने अतीत में कई जिम्मेदार और महान नेता प्रतिपक्ष देखे हैं, इसलिए राहुल गांधी को छात्र आंदोलन के विषय पर उपदेश देने से बचना चाहिए।
इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री ने जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती पर भी बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि महबूबा मुफ्ती ने हमेशा आतंकवाद का समर्थन किया है। गिरिराज सिंह ने कहा कि "महबूबा मुफ्ती ने हमेशा आतंकवादियों का साथ दिया है।" उन्होंने उल्लेख किया कि अतीत में जब वह भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन में थीं, तब उन्हें सुधारने का प्रयास किया गया था, लेकिन स्थिति में बदलाव न होने पर गठबंधन तोड़ दिया गया था।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद और जम्मू-कश्मीर का दर्जा
विपक्षी दलों के इस संयुक्त मार्च में अयोध्या के राम मंदिर से जुड़ा चढ़ावे का विवाद भी प्रमुखता से उठाया गया। विपक्ष का आरोप है कि राम मंदिर के दान और चढ़ावे की व्यवस्था में कथित तौर पर हेराफेरी हुई है, जिस पर सरकार को संसद में पारदर्शिता के साथ स्थिति साफ करनी चाहिए। इसके अलावा, विपक्षी सांसद जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल करने की मांग पर भी अड़े हुए हैं। इन दोनों विषयों को लेकर राज्यसभा और लोकसभा में जोरदार हंगामे की स्थिति बनी हुई है।
संसदीय कार्यसूची और भावी विधायी कामकाज
एक तरफ जहां विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी और मार्च के जरिए गृह मंत्री के बयान की मांग पर टिके हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार अपनी तय विधायी कार्यसूची को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। मंगलवार की कार्यवाही के दौरान केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, निर्मला सीतारमण और जितेंद्र सिंह समेत कई अन्य मंत्रियों द्वारा महत्वपूर्ण विधायी प्रस्ताव और विधेयक सदन के पटल पर रखे जाने प्रस्तावित हैं। दोनों पक्षों के कड़े रुख को देखते हुए मानसून सत्र के दौरान संसद के दोनों सदनों में भारी हंगामे और बहस की संभावना बनी हुई है।



















