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राहुल गांधी के बयान पर गरमाई सियासत, निशिकांत दुबे और योगी आदित्यनाथ ने बोला तीखा हमलाराजनीति
25 अग॰ 2026, 7:01 am (1 घंटे पहले)· 2

राहुल गांधी के बयान पर गरमाई सियासत, निशिकांत दुबे और योगी आदित्यनाथ ने बोला तीखा हमला

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के मनुस्मृति संबंधी बयान को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने उन पर करारा प्रहार किया है। सांसद निशिकांत दुबे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राहुल गांधी की टिप्पणियों को देश की परंपरा और विरासत का अपमान बताया है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के हालिया बयानों पर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने उनके खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तीखा हमला बोला है। खास तौर पर मनुस्मृति को लेकर दिए गए बयान के बाद से सत्ता पक्ष के नेताओं की तरफ से लगातार तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इस कड़ी में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राहुल गांधी के बयानों को लेकर उन पर जमकर निशाना साधा है और उन्हें देश की परंपराओं का अनादर करने का दोषी ठहराया है।

निशिकांत दुबे का राहुल गांधी की पहचान और धर्म पर सवाल

भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला। निशिकांत दुबे ने लिखा कि राहुल गांधी फिरोज गांधी के पोते यानी वंशज हैं और भारत के संविधान तथा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उनका संबंध पारसी धर्म से है, जिससे वह अल्पसंख्यक श्रेणी में आते हैं। दुबे ने आगे कहा कि पारसी धर्म ही आपका कर्म है और इसके तहत आपको सनातन धर्म यानी हिंदू धर्म, इस्लाम के ग्रंथ कुरान और ईसाई धर्म की बाइबल जैसे धार्मिक ग्रंथों पर टिप्पणी करने का कोई हक या हूकूक नहीं है।

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ऐतिहासिक संदर्भों का जिक्र करते हुए दुबे की दो टूक

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने इतिहास का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स ने 27 मार्च 1775 को 11 पंडितों और विद्वानों की एक समिति बनाई थी। इस समिति का मुख्य उद्देश्य भारत में उपलब्ध सभी संस्कृत और पाली ग्रंथों का अध्ययन और अनुवाद करना था। आज भारत में जिन भी ग्रंथों पर चर्चा होती है, उनमें से कई अंग्रेजों की उसी कमेटी द्वारा अनूदित हैं। उस समिति की रिपोर्ट 1777 में गवर्नर जनरल को सौंपी गई थी। उस रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि मनुस्मृति के कुछ श्लोक सही हैं और कुछ गलत हैं, तथा यह एक काल्पनिक कालखंड है जिसमें दूसरे विद्वानों ने अपने विचार या शब्द जोड़ने का प्रयास किया है। दुबे ने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी को सनातन धर्म के अलावा यही दृष्टिकोण अन्य धर्मों के ग्रंथों में भी देखना चाहिए, क्योंकि यह देश हिंदू, मुस्लिम और ईसाई सभी का है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कड़ा प्रहार

उधर, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मनुस्मृति संबंधी बयान को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर तीखा प्रहार किया। रायबरेली में वीर सेनानायक राणा बेनी माधव बख्श सिंह की जयंती पर आयोजित एक भाव समर्पण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देश को राहुल गांधी के व्यक्तिगत रूप से बहुत अधिक अपेक्षाएं नहीं हैं, लेकिन वह भारत की संसद में नेता प्रतिपक्ष के महत्वपूर्ण पद पर हैं, जिसके कारण लोकतंत्र और संविधान के प्रति उनकी स्पष्ट जवाबदेही बनती है। इसके बावजूद वह देश की परंपरा और विरासत को लगातार कोसना अपना जन्मसिद्ध अधिकार मान बैठे हैं।

महाराष्ट्र के बयान और संवैधानिक शपथ पर सवाल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों महाराष्ट्र में दिए गए राहुल गांधी के उस बयान का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने महिलाओं से मनुस्मृति के बंधन को तोड़कर बाहर आने की बात कही थी। योगी ने कहा कि राहुल गांधी ने देश के संविधान की शपथ ली है, लेकिन इसके बावजूद वह भारतीय संस्कृति और परंपरा का उपहास उड़ाते हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी जब उत्तर प्रदेश से बाहर जाते हैं तो इस राज्य को लांछित और अपमानित करते हैं, और जब वह देश की सीमा से बाहर जाते हैं तो पूरे राष्ट्र का अपमान करने से नहीं चूकते।

आतंकवाद और सेना के मामलों पर घेराबंदी

मुख्यमंत्री योगी ने राहुल गांधी की देशभक्ति और निष्ठा पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब देश की सेना सीमाओं पर दुश्मनों से लोहा लेती है, तब राहुल गांधी सेना के जवानों से सबूत और प्रमाण मांगते हैं। आतंकवाद के खिलाफ देश की निर्णायक लड़ाई में भी वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से देश विरोधी तत्वों को बढ़ावा देने का काम करते हैं। इसके अलावा उन्होंने अयोध्या में प्रभु श्रीराम के अस्तित्व पर कांग्रेस पार्टी द्वारा अतीत में उठाए गए सवालों का भी जिक्र किया।

आपातकाल के इतिहास और प्राचीन ग्रंथों का उल्लेख

लोकतंत्र के प्रति राहुल गांधी की निष्ठा पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री योगी ने देश के काले इतिहास की याद दिलाई और कहा कि यह देश साल 1975 में आपातकाल की भयानक और काली छाया को भली-भांति देख चुका है। मनु और भारतीय परंपरा के विषय पर बात करते हुए योगी ने सलाह दी कि यदि राहुल गांधी वास्तव में मनु के बारे में कुछ जानना चाहते हैं, तो उन्हें अथर्ववेद, शतपथ ब्राह्मण और मत्स्य पुराण का अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने अंत में जोर देकर कहा कि जो समाज अपनी प्राचीन परंपराओं और मूल्यों को भुला देता है, वह कभी भी अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण नहीं कर सकता है।

सवाल-जवाब

राहुल गांधी के किस बयान पर विवाद हुआ है?
विवाद राहुल गांधी द्वारा मनुस्मृति और उससे जुड़े सामाजिक बंधनों पर दिए गए बयानों के बाद शुरू हुआ है।
निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी की पहचान को लेकर क्या कहा?
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि राहुल गांधी पारसी धर्म से हैं और उन्हें अन्य धर्मों के ग्रंथों पर टिप्पणी करने का हक नहीं है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाया?
मुख्यमंत्री योगी ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष होने के बावजूद राहुल गांधी भारत की परंपरा, विरासत और सेना का अपमान करते हैं।
ऐतिहासिक ग्रंथों के अनुवाद को लेकर निशिकांत दुबे ने क्या संदर्भ दिया?
दुबे ने बताया कि 1775 में वारेन हेस्टिंग्स द्वारा बनाई गई एक समिति ने संस्कृत और पाली ग्रंथों का अध्ययन किया था जिनकी रिपोर्ट में मनुस्मृति पर विभिन्न बातें कही गई थीं।
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टिप्पणियाँ 2

Ravikash Gupta@ravikash·32 मिनट पहले

राहुल गांधी के इस बयान पर उपजी राजनीतिक रस्साकशी का असर अब केवल वैचारिक बहसों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में यह संसद के आगामी सत्रों, विधायी बहसों और राजनीतिक गठबंधनों की रणनीतियों को भी गहराई से प्रभावित कर सकता है। जब सत्ता पक्ष संवैधानिक पदों की गरिमा और ऐतिहासिक संदर्भों को आधार बनाकर हमलावर होता है, तो इससे वैचारिक ध्रुवीकरण तेज़ होता है और नीतिगत मुद्दों से ध्यान हटकर सांस्कृतिक पहचान की बहसें केंद्र में आ जाती हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·31 मिनट पहले

रविप्रकाश गुप्ता के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह स्पष्ट है कि इस तरह के वैचारिक टकराव आगामी उत्तर प्रदेश उपचुनावों और चुनावी रणनीतियों पर गहरा असर डालेंगे। जब नेता प्रतिपक्ष और मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे नेता सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक संदर्भों को लेकर आमने-सामने आते हैं, तो ज़मीनी स्तर पर जनता का ध्यान बुनियादी और विकास के मुद्दों से भटक जाता है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा क्षेत्रीय राजनीति में ध्रुवीकरण को और अधिक तीव्र करेगा, जिससे राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक और तीखी बयानबाज़ी का दौर और तेज़ होने की पूरी संभावना है।

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