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स्वतंत्रता दिवस पर तृषा और विजय के बीच सैल्यूट आदान-प्रदान को लेकर डीएमके ने उठाए गंभीर सवालराजनीति
18 अग॰ 2026, 4:36 pm (24 दिन पहले)· 2

स्वतंत्रता दिवस पर तृषा और विजय के बीच सैल्यूट आदान-प्रदान को लेकर डीएमके ने उठाए गंभीर सवाल

तमिलनाडु के स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और तृषा कृष्णन के बीच हुए अभिवादन को लेकर डीएमके के मुखपत्र ने तीखी आलोचना की है।

तमिलनाडु की राजनीति में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और अभिनेत्री तृषा कृष्णन की मौजूदगी को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। डीएमके के आधिकारिक मुखपत्र में इस कार्यक्रम के दौरान दोनों के बीच हुए अभिवादन और बैठने की व्यवस्था पर कड़े सवाल उठाए गए हैं। पार्टी ने इसे मुख्यमंत्री पद की गरिमा के खिलाफ बताया है, जिससे राज्य का राजनीतिक पारा चढ़ गया है।

डीएमके के मुखपत्र मुरासोली में निशाना

डीएमके के आधिकारिक मुखपत्र मुरासोली में प्रकाशित एक संपादकीय के जरिए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की कड़ी आलोचना की गई है। पार्टी ने फोर्ट सेंट जॉर्ज में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह का जिक्र करते हुए कहा कि तृषा कृष्णन को पहली पंक्ति में स्थान देना और मुख्यमंत्री के साथ उनका एक-दूसरे को सलामी देना पूरी तरह से मर्यादा के विरुद्ध है। संपादकीय में लिखा गया कि यह पूरा घटनाक्रम ऐसा था जिसे उन मतदाताओं के लिए भी स्वीकार करना कठिन था जिन्होंने उन्हें समर्थन दिया था।

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संपादकीय में आगे यह भी आरोप लगाया गया कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में एक ऐसा चेहरा सामने आया है जो खुले तौर पर ऐसी गतिविधियों को अंजाम देता है और उसे उचित ठहराने का प्रयास करता है। हालांकि इस तीखे हमले के बाद मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय या उनकी पार्टी टीवीके की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

कार्यक्रम में तृषा की विशेष मौजूदगी

फोर्ट सेंट जॉर्ज में आयोजित हुए स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान तृषा कृष्णन की उपस्थिति और उनकी सीटिंग अरेंजमेंट ने सबका ध्यान खींचा। कार्यक्रम के दौरान अभिनेत्री तृषा मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के माता-पिता एसए चंद्रशेखर और शोभा चंद्रशेखर के ठीक बगल में बैठी हुई नजर आईं। इस दौरान तृषा और मुख्यमंत्री विजय के बीच लगातार बधाइयों और अभिवादन का आदान-प्रदान हुआ, जो सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा का विषय बना रहा।

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ समय पहले ही कावेरी विवाद प्रदर्शन के दौरान उदयनिधि स्टालिन द्वारा अभिनेत्री को लेकर दिए गए एक बयान पर बड़ा विवाद हुआ था। उस कथित टिप्पणी के बाद उदयनिधि स्टालिन को हिरासत में भी लिया गया था, और अब डीएमके के इस नए हमले ने मामले को और गर्मा दिया है।

विजय की निजी जिंदगी और तलाक के मोर्चे पर राहत

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पिछले काफी समय से अपनी व्यक्तिगत जिंदगी को लेकर भी सुर्खियों में बने हुए हैं। कुछ महीने पहले उनकी पत्नी संगीता ने चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की थी। अपनी याचिका में उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें 2021 में एक अभिनेत्री के साथ उनके पति के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के बारे में पता चला था, जिसके बाद यह कदम उठाया गया था।

हालांकि इन शुरुआती विवादों और मीडिया में लगने वाले कयासों के बीच संगीता ने अपने फैसले में यू-टर्न लेते हुए तलाक की अर्जी वापस ले ली है। इस घटनाक्रम के बाद से विजय के समर्थकों में काफी खुशी का माहौल देखा गया है, हालांकि स्वतंत्रता दिवस समारोह के नए विवाद ने राजनैतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार फिर से गर्म कर दिया है।

सवाल-जवाब

डीएमके ने किस बात पर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की आलोचना की है?
डीएमके ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान तृषा कृष्णन को पहली पंक्ति में बैठाने और उनके साथ लगातार सैल्यूट का आदान-प्रदान करने को लेकर आलोचना की है।
यह विवाद किस पार्टी के मुखपत्र में प्रकाशित हुआ है?
यह संपादकीय डीएमके के आधिकारिक मुखपत्र मुरासोली में प्रकाशित हुआ है।
स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान तृषा कृष्णन किसके पास बैठी थीं?
तृषा कृष्णन मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के माता-पिता एसए चंद्रशेखर और शोभा चंद्रशेखर के साथ बैठी थीं।
क्या मुख्यमंत्री विजय या उनकी पार्टी ने इस पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अब तक मुख्यमंत्री विजय या उनकी पार्टी टीवीके की तरफ से इस आलोचना पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
संगीता ने अपने तलाक के मामले में क्या कदम उठाया है?
संगीता ने चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट से अपनी तलाक की अर्जी वापस ले ली है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·24 दिन पहले

तमिलनाडु में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान मुख्यमंत्री और एक अभिनेत्री के बीच अभिवादन को लेकर उपजा यह विवाद क्षेत्रीय राजनीति में व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन की सीमाओं को धुंधलाता है। डीएमके के मुखपत्र द्वारा गरिमा पर सवाल उठाए जाने और विपक्षी मोर्चे के आक्रामक होने से राज्य का राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकता है। यदि इस पर शासन पक्ष से कोई ठोस स्पष्टीकरण नहीं आता है, तो यह क्षेत्रीय कूटनीति और राजनीतिक नैरेटिव को नया मोड़ दे सकता है।

Tanvi Desai@tanvi-desai·24 दिन पहले

एक मनोरंजन और डिजिटल मीडिया पत्रकार के रूप में, मेरा मानना है कि यह राजनीतिक विवाद अब पारंपरिक गलियारों से निकलकर सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर एक वायरल ट्रेंड बन चुका है। जिस तरह से मुख्यमंत्री और अभिनेत्री के बीच के पलों को ऑनलाइन शेयर किया जा रहा है, वह डिजिटल युग में सेलिब्रिटी पॉलिटिक्स और जनसंपर्क के समीकरणों को पूरी तरह बदल रहा है। यदि इसे पेशेवर डिजिटल रणनीति के साथ नहीं संभाला गया, तो यह आभासी दुनिया का नैरेटिव शासन के कामकाज पर भारी पड़ सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·24 दिन पहले

तमिलनाडु के इस राजनीतिक घटनाक्रम का असर केवल राज्य की छवि तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कॉर्पोरेट प्रायोजन और क्षेत्रीय निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ सकती है। जब नेतृत्व व्यक्तिगत और सार्वजनिक विवादों में उलझता है, तो नीतिगत स्थिरता प्रभावित होती है और आने वाले समय में आर्थिक गतिविधियों पर इसका नकारात्मक मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·24 दिन पहले

रविकेश गुप्ता के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, इस राजनीतिक गतिरोध और सार्वजनिक मंचों पर इस तरह के विवादों का सीधा असर राज्य की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है। जब सत्ता पक्ष और विपक्ष इस तरह के मुद्दों पर आमने-सामने आ जाते हैं, तो विधानमंडल में महत्वपूर्ण विधायी कार्यों और सुरक्षा से जुड़ी नीतियों पर चर्चा प्रभावित होती है। ऐसे हालातों में अक्सर प्रशासनिक मशीनरी का ध्यान कानून-व्यवस्था और जनहित के जरूरी मामलों से भटककर इन राजनीतिक बहसों की ओर केंद्रित हो जाता है, जिससे दीर्घकालिक सुरक्षा और शासन व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है।

Rohan Verma@rohan-verma·24 दिन पहले

तमिलनाडु में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर वीआईपी सीटिंग और अभिवादन को लेकर उपजा यह विवाद महज शिष्टाचार का नहीं, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति में व्यक्तिगत और राजनीतिक समीकरणों के टकराव का परिणाम है। सत्ताधारी दल के मुखपत्र द्वारा गरिमा का हवाला देकर उठाए गए सवाल और अभिनेत्री की पिछली घटनाओं से जुड़ी पृष्ठभूमि यह संकेत देती है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और चुनावी मंचों पर बड़ा अस्त्र बनेगा।

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