देश के विभिन्न हिस्सों में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। जहां उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव संपन्न कराने का निर्देश दिया है, वहीं दक्षिण भारत के राज्य तमिलनाडु में एक अलग ही तस्वीर सामने आ रही है। तमिलनाडु सरकार ने ग्रामीण स्थानीय निकायों की कमान संभाल रहे विशेष अधिकारियों के कार्यकाल में छह महीने की बढ़ोतरी करने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। प्रशासनिक और भौगोलिक पुनर्गठन की प्रक्रियाएं पूरी न होने की वजह से ग्रामीण इलाकों के मतदाताओं को अपनी चुनी हुई सरकार के लिए अभी और लंबा इंतजार करना होगा।
सभी 37 जिलों में लागू हुआ आदेश
राज्य प्रशासन की तरफ से जारी किए गए आधिकारिक आदेश के अनुसार, यह नया बदलाव तमिलनाडु के सभी 37 जिलों में प्रभावी होगा। इनमें से 28 जिले ऐसे हैं जहां पहले से ही निर्वाचित स्थानीय निकायों का कार्यकाल समाप्त हो चुका था और वहां तैनात अधिकारियों को अब अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। इसके अलावा, बाकी बचे नौ जिलों में नए विशेष अधिकारियों की तैनाती की गई है, जिनके अंतर्गत आने वाले निर्वाचित निकायों का कार्यकाल 19 अक्टूबर 2026 को पूरा हुआ था। इस ताजा प्रशासनिक कदम के बाद इन सभी ग्रामीण क्षेत्रों की बागडोर पूरी तरह से सरकारी अधिकारियों के हाथों में ही बनी रहेगी।
विलय और परिसीमन के पेंच में फंसी चुनाव प्रक्रिया
ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावों के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा प्रशासनिक पुनर्गठन से जुड़े काम हैं। राज्य सरकार के मुताबिक, कुल 46 ग्रामीण स्थानीय निकायों को शहरी स्थानीय निकायों के दायरे में तब्दील करने की प्रक्रिया अभी तक अपने अंजाम तक नहीं पहुंच पाई है। इसके साथ ही विभिन्न वार्डों के परिसीमन का महत्वपूर्ण कार्य भी लंबित अवस्था में लटका हुआ है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी चुनाव के सफल आयोजन के लिए वार्डों की सटीक सीमाएं और स्पष्ट प्रशासनिक ढांचा होना अनिवार्य होता है। इन सभी प्रशासनिक उलझनों के चलते फिलहाल चुनाव कराना संभव नहीं हो पा रहा है।
अधिकारियों के कंधों पर रहेगी बुनियादी सुविधाओं की जिम्मेदारी
विशेष अधिकारियों का कार्यकाल बढ़ाए जाने के बाद ग्रामीण इलाकों में जनता से जुड़े बुनियादी कार्यों की देखरेख का जिम्मा सरकारी अमले के पास ही रहेगा। इस प्रशासनिक व्यवस्था में खंड विकास अधिकारियों और विभिन्न परियोजना निदेशकों जैसे वरिष्ठ अधिकारी अपनी सेवाएं जारी रखेंगे। गांवों के भीतर साफ-पेयजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना, सड़कों की रोशनी की व्यवस्था संभालना और अन्य आधारभूत संरचनाओं का रखरखाव करना इन्हीं अधिकारियों की प्रत्यक्ष निगरानी में संपन्न होगा। आदेश के मुताबिक अब ये सभी विशेष अधिकारी आगामी 19 अप्रैल 2027 तक अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते रहेंगे।
मार्च 2027 के बाद ही संभव हैं चुनाव
प्रशासनिक हलकों से मिल रहे संकेतों के अनुसार, तमिलनाडु में ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए मतदान की प्रक्रिया मार्च 2027 के बाद ही आयोजित किए जाने के आसार हैं। इस देरी के पीछे प्रशासनिक पुनर्गठन के अलावा आगामी शीतकालीन मानसून से जुड़े राहत एवं बचाव कार्य तथा देशव्यापी जनगणना जैसी बड़ी प्रशासनिक गतिविधियां भी शामिल हैं। हालांकि, राज्य सरकार ने अभी तक चुनाव के संबंध में किसी भी निश्चित और अंतिम तारीख की घोषणा नहीं की है। मौजूदा परिस्थितियों और प्रशासनिक रुकावटों को देखते हुए यही अनुमान लगाया जा रहा है कि चुनावों के लिए जनता को अगले साल के शुरुआती महीनों के बाद तक का इंतजार करना पड़ सकता है।



















