अक्टूबर का महीना शुरू होते ही मौसम में ठंडक घुलने लगती है और तापमान नीचे आने लगता है। बागवानी जानकारों के अनुसार मौसम का यह बदलाव गुलाब के पौधों के लिए बेहद अनुकूल होता है, जिससे इनकी ग्रोथ तेजी से होती है और कलियों की संख्या में इजाफा होता है। इस दौरान पौधों को सही देखभाल की जरूरत होती है ताकि वे सर्दियों में बेहतरीन तरीके से फूल दे सकें। अगर लंबे समय तक पौधों पर ध्यान न दिया जाए, तो इनकी शाखाएं सूखने लगती हैं और वे कमजोर होकर बीमारियों की चपेट में आ सकती हैं। इसलिए सूखी हुई, अस्वस्थ और फंगस से प्रभावित टहनियों को किसी साफ कटर या कैंची की मदद से छांटकर अलग कर देना बेहद जरूरी है।
प्रूनिंग करते समय रखें कुछ खास सावधानियां
पौधे की कटाई-छंटाई करते वक्त इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि कट हमेशा किसी हरी कली या पत्ती के जंक्शन से आधा से एक सेंटीमीटर ऊपर तिरछा लगाया जाए। इस तरीके से पौधे में नई शाखाओं का फूटना आसान हो जाता है और झाड़ी का आकार भी सुधरता है। इसके साथ ही, बहुत ज्यादा घनी हो चुकी टहनियों को भी कम करना चाहिए ताकि सूरज की रोशनी और ताजी हवा पौधे के अंदरूनी हिस्सों तक आसानी से पहुंच सके। प्रूनिंग के दौरान काटी गई बीमार टहनियों को हमेशा स्वस्थ पौधों से दूर फेंकना चाहिए। इसके अलावा, इस्तेमाल होने वाले औजारों को भी सैनिटाइज करना आवश्यक है ताकि एक पौधे का इन्फेक्शन दूसरे तक न पहुंचे। यदि पत्तियों पर किसी कीट या फंगस का हमला नजर आए, तो समय रहते सही फफूंदनाशक का छिड़काव करना बुद्धिमानी है।
खाद और पानी का सही प्रबंधन
छंटाई करने के तुरंत बाद पौधे को पानी देने से परहेज करना चाहिए क्योंकि इससे मिट्टी अत्यधिक गीली हो जाती है और जड़ों के सड़ने का खतरा पैदा हो सकता है। गुलाब की बेहतर बढ़वार और पोषण के लिए एक खास लिक्विड फर्टिलाइजर तैयार किया जा सकता है। इसके लिए एक किलोग्राम सरसों की खली और 250 ग्राम डीएपी को 10 लीटर पानी में मिलाकर दो दिनों के लिए छोड़ दें। इस तैयार मिश्रण का एक छोटा कप पौधे की मिट्टी में डालने से ग्रोथ बहुत तेजी से होती है। इसके अलावा, पत्तियों पर पीले धब्बे दिखने या फंगस के शुरुआती लक्षण नजर आने पर तुरंत उन पत्तियों को तोड़कर हटा देना चाहिए और जैविक कीटनाशक का प्रयोग करके पूरे पौधे को सुरक्षित रखना चाहिए।



















