छात्रों के बाद अब देश के युवा क्रिकेट खिलाड़ी भी अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतर आए हैं। हाल ही में लखनऊ स्थित अटल बिहारी बाजपेयी इकाना स्टेडियम के बाहर एक अनोखा नजारा देखने को मिला, जहां ढाई सौ से अधिक युवा खिलाड़ियों ने अपने परिजनों के साथ मिलकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इन खिलाड़ियों की मुख्य मांग उत्तर प्रदेश राज्य के लिए केवल एक के बजाय कुल तीन रणजी क्रिकेट टीमें गठित करने की है।
पूर्वांचल और मध्य यूपी के खिलाड़ियों की अनदेखी का आरोप
उत्तर प्रदेश क्रिकेट प्लेयर एसोसिएशन और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ पूर्वांचल के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवा और उनके माता-पिता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों से आने वाले क्रिकेटरों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उनकी मांग है कि राज्य के हर हिस्से के युवाओं को समान अवसर मिलने चाहिए, जिसके लिए प्रशासनिक स्तर पर राज्य में तीन रणजी टीमों का होना अनिवार्य है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पुराने बयानों का दिया हवाला
आंदोलन की अगुवाई कर रहे ‘क्रिकेट प्लेयर एसोसिएशन’ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद सिंह ने संवाददाताओं के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूर्व में भी इस बात की वकालत कर चुके हैं कि उत्तर प्रदेश जैसे घनी आबादी वाले बड़े राज्य में सभी उभरते खिलाड़ियों को उनका हक मिलना चाहिए और इसके लिए एक से अधिक रणजी टीमें बनाई जानी चाहिए।
पच्चीस करोड़ की आबादी और रणजी टीमों का गणित
एसोसिएशन का तर्क है कि राज्य की आबादी लगभग 25 करोड़ के आसपास है, ऐसे में प्रतिभाओं को सही मंच देने के लिए केवल एक टीम पर्याप्त नहीं है। इसी विशाल जनसख्या और प्रतिभाओं के पलायन को रोकने के लिए 250 से अधिक ‘जेन जी’ खिलाड़ियों और उनके परिवारों ने इकाना स्टेडियम के बाहर इकट्ठा होकर अपनी आवाज बुलंद की।
उत्तर प्रदेश T20 लीग में क्षेत्रीय पक्षपात का दावा
संगठन ने वर्तमान में खेली जा रही उत्तर प्रदेश T20 लीग के चयन पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। अरविंद सिंह ने आरोप लगाया कि इस टूर्नामेंट में पूर्वांचल और मध्य क्षेत्र के खिलाड़ियों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने आंकड़े रखते हुए बताया कि इस लीग के मौजूदा सत्र में कुल छह टीमों के भीतर करीब 150 खिलाड़ी खेल रहे हैं, जिनमें से इन दो बड़े क्षेत्रों के केवल 16 खिलाड़ी ही जगह बना पाए हैं। इसके विपरीत, अकेले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नौ जिलों से 89 खिलाड़ी और दिल्ली से आठ खिलाड़ियों को चुना गया है।
महाराष्ट्र और गुजरात का दिया उदाहरण
आंदोलनकारियों ने अपनी मांग के समर्थन में देश के अन्य बड़े राज्यों का उदाहरण भी सामने रखा है। मौजूदा रणजी ट्रॉफी के नियमों के मुताबिक, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों के पास तीन-तीन टीमें हैं। महाराष्ट्र से विदर्भ और मुंबई जैसी स्वतंत्र इकाइयां अलग से रणजी खेलती हैं, जबकि गुजरात प्रांत से गुजरात, बड़ौदा और सौराष्ट्र की अलग-अलग टीमें भाग लेती हैं। इसी तर्ज पर वे उत्तर प्रदेश में भी तीन टीमें चाहते हैं।



















