मिजो विरासत को सहेजने के लिए खुला मिजोरम स्टेट म्यूजियम, मंत्री सी. लालसाविवुंगा ने युवाओं से की खास अपीलAISA प्रमुख नेहा बोरा की बढ़ीं कानूनी मुश्किलें, SEM अदालत ने 20 नवंबर को दोबारा किया तलबमध्य प्रदेश के बालाघाट में प्रसव के बिल चुकाने के लिए बुजुर्ग महिला की हत्या, आरोपी गिरफ्तारदिल्ली में वोटर सूची पुनरीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग से पूछा- पुराने मतदाताओं से फॉर्म 6 क्यों भरवाया जा रहाऋषिकेश के बाजारों में करवा चौथ की रौनक, 3डी प्रिंट से लेकर ऐपण कला वाले करवे-छलनी की भारी मांगगाड़ी की कंडक्टरी छोड़ गांव में शुरू किया बकरी पालन, उत्तराखंड के प्रेम सिंह बने मिसालहिमंत बिस्वा सरमा ने डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया में जनजातीय भूमि अधिकारों की समीक्षा की, कई विकास योजनाओं की शुरुआतम्यांमार सीमा तक दौड़ेगी ट्रेन: मिजोरम में 230 किलोमीटर लंबे रेल कॉरिडोर पर सीएम लालदुहोमा ने की समीक्षा बैठकराजस्थान के खैरथल-तिजारा में साइबर ठगी की जांच के दौरान बड़ा हादसा, पुलिस की मौजूदगी में युवक ने लगाया फंदाहरिद्वार में गरजे बाबा रामदेव: देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणियों का दिया करारा जवाब, 104वें अधिवेशन में तथ्यात्मक पोल खोलने का ऐलान
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ईरान के रुख पर गरमाई सियासत, दावों और बयानों की क्या है सच्चाईदुनिया
25 अग॰ 2026, 8:51 am (65 दिन पहले)· 3

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ईरान के रुख पर गरमाई सियासत, दावों और बयानों की क्या है सच्चाई

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ईरान की भूमिका को लेकर पाकिस्तान और अन्य पक्षों के बीच अलग-अलग दावे सामने आए हैं, जिस पर रक्षा और कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ईरान की भूमिका और उसके रुख को लेकर कई तरह के दावे सामने आए हैं। एक तरफ जहां पाकिस्तान ने यह दावा किया था कि उस सैन्य कार्रवाई के दौरान तेहरान ने उसका समर्थन किया था, वहीं दूसरी तरफ ईरानी पक्ष ने आधिकारिक और सार्वजनिक रूप से दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की थी और तनाव को तुरंत कम करने पर जोर दिया था। इस पूरे घटनाक्रम ने कूटनीतिक गलियारों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।

ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान के दावे

भारत की ओर से की गई इस सैन्य कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की तरफ से लगातार अलग-अलग दावे किए जाते रहे हैं। पाकिस्तानी हलकों में यह प्रोपेगैंडा फैलाने की कोशिश की गई कि इस्लामिक देशों, विशेष रूप से ईरान का समर्थन उन्हें हासिल था। हालांकि, कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के दावे अक्सर घरेलू जनता का ध्यान भटकाने और जमीनी हकीकत को छिपाने के लिए किए जाते हैं।

ये भी पढ़ें

ईरान का वास्तविक आधिकारिक रुख

तनाव के उस दौर में ईरान के आधिकारिक बयानों ने स्पष्ट कर दिया था कि वह किसी भी पक्ष का आंख मूंदकर समर्थन करने से बच रहा था। ईरानी विदेश मंत्रालय और शीर्ष नेतृत्व ने सार्वजनिक मंचों पर साफ कहा था कि क्षेत्र में शांति बनाए रखना सबसे जरूरी है। भारत और पाकिस्तान दोनों को ही संयम का परिचय देना चाहिए ताकि बात और ज्यादा न बिगड़े। तेहरान का यह संतुलित बयान इस बात का सबूत था कि वह भारत के साथ अपने कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को भी तवज्जो देता है।

सैन्य और कूटनीतिक मोर्चे पर भारत की स्थिति

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने अपनी रणनीतिक और तकनीकी ताकत का लोहा मनवाया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रह्मोस जैसी अत्याधुनिक मिसाइलों और सटीक हमलों ने दुश्मन के ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया था। इस पूरे संघर्ष के दौरान भारत ने अपनी रक्षा तैयारियों और त्वरित कार्रवाई की क्षमता से यह साबित कर दिया था कि देश की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। वहीं, विपक्षी दलों और सरकार के बीच संसद से लेकर बयानों के स्तर पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं, जहां रक्षा मंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी कर स्थिति साफ की थी।

सवाल-जवाब

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ईरान ने क्या रुख अपनाया था?
ईरान ने सार्वजनिक रूप से दोनों पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की थी।
पाकिस्तान ने इस मामले में क्या दावा किया था?
पाकिस्तान ने दावा किया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ईरान ने उसका साथ दिया था।
इस सैन्य कार्रवाई के दौरान कौन सी प्रमुख सामरिक प्रणालियों का जिक्र हुआ?
रिपोर्ट्स के अनुसार इस दौरान ब्रह्मोस जैसी अत्याधुनिक मिसाइलों और रणनीतिक क्षमताओं का उपयोग किया गया था।
इस विवाद को लेकर भारत में क्या प्रतिक्रिया रही?
संसद और राजनीतिक स्तर पर बयानों के बाद रक्षा मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट करने के लिए आधिकारिक बयान जारी किए थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·64 दिन पहले

ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े इस घटनाक्रम में पाकिस्तान के दावों और तेहरान के आधिकारिक बयानों के बीच का अंतर्विरोध क्षेत्रीय कूटनीति की एक नई परत को उजागर करता है। सीमा पार से फैलाए जा रहे ऐसे प्रोपेगैंडा का मुख्य उद्देश्य आंतरिक मोर्चे पर नाकामी छिपाना होता है, जबकि भारत की सामरिक तैयारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में कूटनीतिक और सैन्य दोनों स्तरों पर निर्णायक बढ़त कैसे हासिल की जाती है।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·64 दिन पहले

करण मल्होत्रा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह स्पष्ट है कि तेहरान की संतुलित प्रतिक्रिया उसके रणनीतिक और आर्थिक हितों का परिणाम थी। भारत के साथ बढ़ते व्यापारिक संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता की अनिवार्यता ने ईरान को किसी भी प्रकार के पक्षपातपूर्ण समर्थन से दूर रखा। भविष्य में, इस प्रकार के भू-राजनीतिक घटनाक्रम यह तय करेंगे कि नई दिल्ली और तेहरान ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के मोर्चे पर अपने द्विपक्षीय संबंधों को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp