तेलंगाना विधानसभा के भीतर बुधवार को उस समय सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया जब मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता के. चंद्रशेखर राव पर बेहद तीखे सियासी हमले किए। सदन के पटल पर जमीन के पुराने रिकॉर्ड और धारा 22-ए के दायरे में आने वाली संपत्तियों को लेकर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान मुख्यमंत्री ने भारत राष्ट्र समिति के पूरे दस साल के शासनकाल में हुए तथाकथित भूमि घोटालों के तार सीधे तौर पर केसीआर से जोड़ दिए और उन पर गंभीर सवाल खड़े किए।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि केसीआर और उनके परिवार की नजरें हमेशा से आजादी के दौर से पहले की निजामकालीन संपत्तियों और बेशकीमती जमीनों पर टिकी रही हैं। उन्होंने बीआरएस सरकार की नीतियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों, सरकारी संपत्तियों और जमीनों पर पहला हक यहां के गरीब तबके, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यक समुदाय का बनता है। मुख्यमंत्री का दावा था कि पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान शासन की पूरी ताकत का इस्तेमाल केवल एक खास परिवार की तिजोरी भरने और हजारों एकड़ जमीन पर कब्जा जमाने के लिए किया गया।
इस जोरदार हमले के बाद विधानसभा के भीतर बैठे बीआरएस के विधायकों ने कड़ी आपत्ति जताई और जोरदार हंगामा किया, जिससे सदन का माहौल पूरी तरह गरमा गया। बहस के दौरान मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि वे किस मूल गांव से आते हैं और वे यहां के संसाधनों पर हाथ साफ करने के लिए बिहार से आए थे। उन्होंने निजाम शासन का जिक्र करते हुए कहा कि उस हुकूमत ने लंबे समय तक राज किया और तमाम व्यवस्थाएं यहीं छोड़ दीं, लेकिन गरीबों का हक उन तक नहीं पहुंचने दिया गया। उन्होंने यह भी साफ किया कि वे अपने निजी फायदे के लिए राजनीति में नहीं आए हैं और उन्हें अपनी दौलत बढ़ाने की कोई लालसा नहीं है, बल्कि उनका मकसद केवल वंचित तबके की भलाई के लिए काम करना है।
इन तीखे बयानों के बीच ही सरकार ने केसीआर परिवार के ठिकानों और संपत्तियों की जांच का दायरा काफी बढ़ा दिया है। कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार ने सिद्दिपेट जिले के एर्रावेली इलाके में स्थित केसीआर के फॉर्महाउस के आसपास की जमीनों की नए सिरे से जांच कराने के स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं। सरकार का यह भी आरोप है कि जिस जमीन को आधिकारिक तौर पर आवंटित किया गया था, वह भी उसी बड़े भूभाग का एक हिस्सा है। प्रशासनिक अमले को जमीन के असली मालिकाना हक और उसकी मौजूदा कानूनी स्थिति का बारीकी से पता लगाने का आदेश दे दिया गया है।
सरकार की ओर से यह दावा भी सामने आया कि केसीआर और उनके परिजनों के पास कुल मिलाकर लगभग 439 एकड़ जमीन है। दूसरी तरफ, बीआरएस ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कांग्रेस सरकार पर पलटवार किया है। सदन में बीआरएस के फ्लोर लीडर टी. हरीश राव ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के परिवार के पास मौजूद जमीनों की वैधता पर सवाल खड़े कर दिए, जिससे विधानसभा के अंदर और बाहर दोनों जगह जमीन के मालिकाना हक को लेकर घमासान छिड़ गया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच रेवंत रेड्डी की ओर से निजाम काल के प्रशासन की तारीफ किए जाने वाले बयानों ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है, जिससे भारतीय जनता पार्टी काफी आक्रामक हो गई है। तेलंगाना के भू-राजस्व इतिहास पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने निजाम को एक बेहतर प्रशासक करार दिया था और कहा था कि उन्होंने लंबे समय तक इस क्षेत्र पर राज करते हुए कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक काम किए। इन बयानों के आने का समय बेहद संवेदनशील है क्योंकि ठीक उसी दौरान 17 सितंबर को हैदराबाद मुक्ति दिवस मनाया जा रहा है, जो 1948 में इस पुराने रियासती राज्य के भारतीय संघ में विलय की ऐतिहासिक याद दिलाता है।
इस अवसर पर केंद्र सरकार की ओर से सिकंदराबाद परेड ग्राउंड में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हो रहे हैं। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी समेत भाजपा के कई बड़े नेताओं ने 17 सितंबर के ऐतिहासिक दिन पर पिछली बीआरएस सरकार और मौजूदा कांग्रेस सरकार के रुख की तीखी आलोचना की है। किशन रेड्डी ने मुख्यमंत्री के बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि यह दिन निजाम और रजाकारों के अत्याचारों के खिलाफ अपनी जान की बाजी लगाने वाले शहीदों को याद करने का है, न कि किसी एक वर्ग को खुश करने का। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक नफे-नुकसान के लिए इतिहास के पन्नों को जानबूझकर बदला जा रहा है और क्रूरता को भुलाकर केवल इमारतों का महिमामंडन किया जा रहा है।


















