प्रवर्तन निदेशालय की ओर से तृणमूल कांग्रेस के बैंक खातों पर लगाई गई रोक के मामले में शीर्ष अदालत ने अहम टिप्पणी की है। सोमवार को सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने जांच एजेंसी से इस बात की संभावना तलाशने को कहा कि क्या राजनीतिक दल के रोजमर्रा के कामकाज और दैनिक खर्चों के संचालन के लिए सीमित धनराशि जारी की जा सकती है।
विशेष अधिकारी के जरिए राहत देने का विकल्प
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की दो सदस्यीय पीठ ने इस मामले पर सुनवाई की। पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय से पूछा कि क्या कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी के माध्यम से पार्टी को फंड उपलब्ध कराने का कोई रास्ता निकाला जा सकता है। इस काम के लिए हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुब्रत तालुकदार को विशेष अधिकारी नियुक्त किया है, जिनके जरिए पार्टी के आवश्यक खर्चों के लिए सीमित धनराशि जारी की जा सकती है या नहीं, इस पर एजेंसी को रुख साफ करने को कहा गया है।
कार्रवाई को गैर-अनुपातिक बताने वाली दलीलें
अदालत में तृणमूल कांग्रेस का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और मेनका गुरुस्वामी ने तर्क दिया कि धन शोधन निवारण अधिनियम यानी PMLA के तहत पार्टी के तमाम खातों को फ्रीज करने का कदम पूरी तरह गैर-अनुपातिक है। वरिष्ठ वकीलों ने जोर देकर कहा कि जांच के दौरान जुटाए गए तथ्यों और दस्तावेजों से इस कठोर कदम का कोई ठोस आधार नहीं बनता।
कपिल सिब्बल ने शिकायत का ब्योरा देते हुए अदालत को बताया कि जांच एजेंसी का मुख्य आरोप लगभग 160 करोड़ रुपये के लेनदेन से संबंधित है, जो विभिन्न खातों के रास्ते भेजे गए बताए गए हैं। हालांकि, केंद्रीय एजेंसी ने इस राशि के मुकाबले कहीं ज्यादा फंड वाले बैंक खातों पर पूर्ण रोक लगा दी है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि शिकायत में लगाए गए आरोप पूरी तरह से शुरुआती और अनुमानित प्रकृति के हैं। उनके अनुसार, शिकायत में लिखा गया है कि केवल विश्वसनीय परिस्थितियों और घटनाक्रमों के अनुमान के आधार पर यह संदेह जताया गया है कि पद के दुरुपयोग और अनुचित वित्तीय लेन-देन से जुटाया गया धन इन खातों के माध्यम से गया हो सकता है। ऐसे में केवल आशंका के आधार पर इतना बड़ा कदम उठाना उचित नहीं है।
अदालती कार्यवाही की अगली तारीखें
मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने ध्यान दिलाया कि इस प्रकरण से संबंधित रिट याचिका कलकत्ता हाईकोर्ट में 20 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने सभी संबंधित पक्षों को निर्देश दिया कि वे हाईकोर्ट के समक्ष चल रही कार्यवाही में पूरा सहयोग करें ताकि मामले का शीघ्रता से निपटारा किया जा सके। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई की तिथि 11 अगस्त तय की है।



















