दक्षिण भारतीय सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री तृषा कृष्णन एक बार फिर तमिलनाडु के राजनीतिक घटनाक्रमों के केंद्र में आ गई हैं। पिछले लंबे समय से बड़े पर्दे पर अपनी अदाकारी का जादू बिखेरने वाली तृषा अब सिनेमा के विज्ञापनों और फिल्म प्रमोशन के बजाय सियासी भाषणों, चुनावी रैलियों, विरोध प्रदर्शनों और पुलिस शिकायतों की वजह से खबरों में बनी हुई हैं। ताज़ा विवाद तंजावुर में कावेरी नदी जल विवाद को लेकर आयोजित एक रैली से शुरू हुआ, जहां डीएमके के वरिष्ठ नेता उदयनिधि स्टालिन द्वारा की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद चेन्नई पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इस कानूनी कार्रवाई के बाद राज्य का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है और सिनेमा तथा राजनीति के पुराने संबंधों पर एक नई बहस छिड़ गई है।
फिल्म इंडस्ट्री से निकलकर सत्ता की सीढ़ियों तक की छाया
तृषा कृष्णन का नाम राजनीति में घसीटे जाने की मुख्य वजह थलापति विजय के साथ उनका लंबा और सफल व्यावसायिक रिश्ता माना जाता है। पिछले दो दशकों में दोनों कलाकारों ने एक साथ कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम किया है, जिससे वे तमिल सिनेमा की सबसे लोकप्रिय जोड़ियों में शुमार हो गए। सालों से उनके व्यक्तिगत संबंधों को लेकर तमाम तरह की अफवाहें उड़ती रही हैं, हालांकि कभी भी किसी पक्ष की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई। जब सी. जोसेफ विजय ने राजनीति में कदम रखा और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने, तब यह चर्चा फिल्मी गलियारों से निकलकर सीधे राजनीतिक रैलियों का हिस्सा बन गई। विपक्षी दलों के नेता मुख्यमंत्री विजय पर व्यक्तिगत हमले करने के उद्देश्य से तृषा का नाम बार-बार घसीटने लगे।
चुनावी रैलियों में निजी टिप्पणियों का इतिहास
यह पहला मौका नहीं है जब राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चक्कर में तृषा को निशाना बनाया गया हो। इससे पहले चुनावी प्रचार के दौरान तमिलनाडु बीजेपी के वरिष्ठ नेता नैनार नागेंद्रन ने भी विजय पर तंज कसते हुए एक व्यक्तिगत टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि राजनीति के मैदान में पूरी तरह उतरने से पहले विजय को तृषा के घर से बाहर निकलना चाहिए। इस बयान की राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी आलोचना हुई थी। विश्लेषकों का कहना था कि एक ऐसी अभिनेत्री को जबरन राजनीतिक खींचतान में घसीटा जा रहा है जिसका किसी भी राजनीतिक दल से कोई सीधा संबंध नहीं है। हालांकि तृषा ने इस पर खुद कोई सीधा बयान नहीं दिया, लेकिन उनकी legal team ने एक आधिकारिक बयान जारी कर राजनीतिक लाभ के लिए उनके नाम का गलत इस्तेमाल करने वालों को कड़ा कानूनी सबक सिखाने की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद विरोधी नेताओं द्वारा मुख्यमंत्री विजय की घेराबंदी के लिए तृषा का नाम इस्तेमाल करने का सिलसिला थमा नहीं।
कावेरी जल विवाद की रैली और विवादित बयान
विवाद की ताज़ा कड़ी तंजावुर में उस समय जुड़ी जब DMK कार्यकर्ताओं द्वारा कावेरी नदी जल बंटवारे के मुद्दे पर एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। मंच से भाषण देते हुए विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने कावेरी मुद्दे को संभालने की विफलता को लेकर विजय सरकार और TVK पर तीखे हमले किए। उसी दौरान सभा में मौजूद कुछ लोगों ने तृषा का नाम लेकर नारे लगाने शुरू कर दिए। भीड़ के इस शोर पर प्रतिक्रिया देते हुए उदयनिधि स्टालिन ने कहा, “पानी यहां पहुंचे या न पहुंचे, लेकिन वहां पहुंचना चाहिए।” उन्होंने कथित तौर पर ऐसे शब्दों का प्रयोग किया जिन्हें सत्ताधारी TVK ने एक महिला और अभिनेत्री के सम्मान पर आघात माना। इस टिप्पणी के सामने आते ही कावेरी जल बंटवारे का मूल मुद्दा पृष्ठभूमि में चला गया और पूरी बहस महिला सम्मान और गरिमा पर केंद्रित हो गई।
कानूनी मोड़ और पुलिस की मुस्तैदी
उदयनिधि स्टालिन के इस भाषण के तुरंत बाद सत्ताधारी TVK ने आक्रामक रुख अपना लिया। पार्टी ने उदयनिधि पर महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने और सार्वजनिक मंच से अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। TVK कार्यकर्ताओं ने राज्य के विभिन्न थानों में पुलिस शिकायतें दर्ज कराईं और पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रीय महिला आयोग तक पहुंच गया। इसके साथ ही पूरे तमिलनाडु में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। पुलिस ने महिला की गरिमा को नुकसान पहुंचाने सहित विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की। उदयनिधि स्टालिन ने अग्रिम जमानत पाने की कोशिश की, लेकिन कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ते ही चेन्नई पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इस तरह एक राजनीतिक जनसभा का भाषण कुछ ही घंटों में एक गंभीर आपराधिक मामले में बदल गया।
राजनीतिक दलों का रुख और आरोप-प्रत्यारोप
इस पूरी कार्रवाई पर DMK ने कड़ा ऐतराज जताते हुए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि उदयनिधि स्टालिन का पूरा भाषण किसानों की समस्याओं, कावेरी मुद्दे और विजय सरकार के प्रशासनिक कामकाज पर आधारित था। DMK का आरोप है कि सत्ताधारी TVK अपनी प्रशासनिक नाकामियों को छिपाने के लिए भाषण के अंशों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है और पुलिस तंत्र का दुरुपयोग कर विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। दूसरी तरफ, BJP ने पुलिस की इस कार्रवाई का समर्थन किया है। BJP IT cell के प्रमुख अमित मालवीय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कानून अपना काम कर रहा है और उन्होंने इस वाकये को उदयनिधि के पुराने सनातन धर्म वाले विवादित बयान से भी जोड़ा। तमिलनाडु BJP का कहना है कि यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का नहीं बल्कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के सम्मान की रक्षा का है।



















