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उज्जैन भूमि विवाद में वीर भारत न्यास ने जीतू पटवारी से मांगे पांच करोड़ रुपये हर्जानाराजनीति
5 जुल॰ 2026, 12:24 am (114 दिन पहले)· 6

उज्जैन भूमि विवाद में वीर भारत न्यास ने जीतू पटवारी से मांगे पांच करोड़ रुपये हर्जाना

उज्जैन में जमीन आवंटन को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव पर निशाना साधना जीतू पटवारी को महंगा पड़ सकता है, वीर भारत न्यास ने उन्हें 5 करोड़ रुपये मानहानि का कानूनी नोटिस थमाया है.

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी इन दिनों राज्य सरकार पर लगातार हमलावर हैं, लेकिन उनका एक ताजा आरोप अब उनके लिए ही कानूनी सिरदर्द बन गया है. दरअसल उज्जैन में जमीन आवंटन के मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव को घेरने की कोशिश में जीतू पटवारी ने दावा किया था कि 500 करोड़ रुपये कीमत की जमीन महज 1 रुपये में वीर भारत न्यास को सौंप दी गई. इसी बयान के जवाब में न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी ने पटवारी को 5 करोड़ रुपये के मानहानि का कानूनी नोटिस भिजवा दिया है.

गौरतलब है कि कांग्रेस लंबे अरसे से मध्य प्रदेश की सत्ता से बाहर है. बीच में करीब डेढ़ साल के लिए कमलनाथ के नेतृत्व में पार्टी की सरकार बनी थी, मगर साल 2023 में कांग्रेस को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी. तभी से पार्टी सत्ता में वापसी के लिए हर मौके पर सरकार को घेरने में जुटी है, और उज्जैन जमीन मामला भी उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

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न्यास ने आरोपों को बताया निराधार

वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश मेहता और अधिवक्ता गुंजन चौकसे ने भोपाल में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरा मामला साफ किया. दोनों अधिवक्ताओं ने कहा कि वीर भारत न्यास पूरी तरह से एक सरकारी न्यास है और जीतू पटवारी ने दिल्ली में हुई अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में जो आरोप लगाए, वे तथ्यों से मेल नहीं खाते. उन्होंने स्पष्ट किया कि उज्जैन में वीर भारत संग्रहालय बनाने के मकसद से यह जमीन राज्य सरकार ने संस्कृति विभाग को आवंटित की है. यानी यह जमीन किसी निजी व्यक्ति या संस्था के नाम पर नहीं, बल्कि पूरी तरह संस्कृति विभाग के अधीन है, और इसे कैबिनेट से बाकायदा मंजूरी मिली हुई है.

मुख्यमंत्री ही होते हैं पदेन अध्यक्ष

अधिवक्ता गुंजन चौकसे ने इस दौरान कांग्रेस नेतृत्व पर सीधा हमला बोला. उन्होंने कहा कि जीतू पटवारी जनता के बीच जानबूझकर एक झूठा नरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं. बिना किसी ठोस जानकारी के और बिना तथ्यों की पड़ताल किए इतने बड़े स्तर पर आरोप मढ़ना पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना रवैया है. चौकसे ने बताया कि वीर भारत न्यास का गठन साल 2013 में हुआ था, और नियमों के मुताबिक मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री ही पदेन रूप से इसका अध्यक्ष होता है, चाहे वह किसी भी पार्टी का हो.

कांग्रेस राज में चुप्पी पर उठे सवाल

अधिवक्ताओं ने कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करते हुए एक तीखा सवाल भी उठाया. उन्होंने पूछा कि जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, तब भी नियम के अनुसार इसी न्यास के अध्यक्ष उस समय के कांग्रेसी मुख्यमंत्री ही थे. उस दौर में कांग्रेस को न्यास के कामकाज में कोई घोटाला या गड़बड़ी नजर नहीं आई, लेकिन अब सत्ता से बाहर रहते हुए राजनीतिक फायदे के लिए बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं.

माफी नहीं मांगी तो होगी सख्त कार्रवाई

अधिवक्ताओं ने साफ कर दिया कि जीतू पटवारी को 5 करोड़ रुपये का मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा जा चुका है. अगर वे अपने आरोपों को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे. इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस अध्यक्ष इस नोटिस पर क्या रुख अपनाते हैं.

सवाल-जवाब

जीतू पटवारी को नोटिस किसने भेजा है?
वीर भारत न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी ने जीतू पटवारी को 5 करोड़ रुपये मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा है.
जीतू पटवारी ने क्या आरोप लगाया था?
उन्होंने दावा किया था कि उज्जैन में 500 करोड़ रुपये कीमत की जमीन वीर भारत न्यास को महज 1 रुपये में दे दी गई.
यह जमीन असल में किसे और किसलिए आवंटित हुई है?
अधिवक्ताओं के मुताबिक यह जमीन उज्जैन में वीर भारत संग्रहालय बनाने के लिए राज्य सरकार ने संस्कृति विभाग को आवंटित की है, और इसे कैबिनेट की मंजूरी मिली हुई है.
वीर भारत न्यास का अध्यक्ष कौन होता है?
न्यास के नियमों के मुताबिक मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री ही पदेन रूप से इसका अध्यक्ष होता है, चाहे किसी भी पार्टी की सरकार हो.
अगर जीतू पटवारी माफी नहीं मांगते तो क्या होगा?
अधिवक्ताओं ने कहा है कि अगर वे सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
वीर भारत न्यास का गठन कब हुआ था?
इस न्यास का गठन साल 2013 में हुआ था.
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