ठंड के दिनों में भोजन की थाली में अगर गरमा-गरम बाजरे की रोटी के साथ सिलबट्टे पर तैयार की गई काछर की चटनी शामिल हो जाए, तो देसी खान-पान का आनंद दोगुना हो जाता है। राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र के घरों में यह पारंपरिक व्यंजन सर्दियों के दौरान बेहद पसंद किया जाता है। देसी घी या मक्खन से चुपड़ी हुई बाजरे की रोटी और लहसुन तथा मिर्च के तीखेपन से भरपूर काछर की चटनी का मेल ऐसा है कि खाने वाला तृप्त हो जाता है।
काछर की चटनी की खासियत
इस लजीज चटनी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे बनाने के लिए किसी आधुनिक उपकरण की आवश्यकता नहीं होती है और न ही इसमें बहुत ज्यादा सामान लगता है। पारंपरिक रूप से सिलबट्टे पर पिसे मसालों की सौंधी खुशबू और काछर का प्राकृतिक खट्टा-चटपटा स्वाद ही इस व्यंजन की असली पहचान है। इसे बनाना बेहद आसान है और यह मारवाड़ी संस्कृति के अनूठे स्वाद को परिलक्षित करता है।
जरूरी सामग्री
काछर की इस पारंपरिक चटनी को तैयार करने के लिए चार से पांच काछर, पांच से छह भीगी हुई साबुत लाल मिर्च, दस से बारह लहसुन की कलियां, एक छोटा चम्मच साबुत जीरा और जरूरत के हिसाब से नमक की जरूरत होती है। इसके अलावा, यदि आप चटनी में छौंक लगाना चाहते हैं, तो एक बड़ा चम्मच देसी घी या सरसों के तेल का उपयोग किया जा सकता है।
चटनी तैयार करने की पारंपरिक विधि
चटनी बनाने की शुरुआत काछर को अच्छी तरह धोने और छीलने के बाद छोटे टुकड़ों में काटने से होती है। उपयोग करने से पहले काछर के टुकड़े को थोड़ा चख लेना जरूरी है ताकि कड़वा फल होने पर पूरी चटनी का स्वाद खराब न हो। इसके बाद सिलबट्टे पर भीगी हुई लाल मिर्च, लहसुन, जीरा और नमक को रखकर दरदरा पीस लिया जाता है।
जब सभी मसाले अच्छी तरह पिस जाएं, तब इसमें कटे हुए काछर के टुकड़े मिलाए जाते हैं और हल्के हाथों से पीसा जाता है। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि चटनी को बिल्कुल बारीक पेस्ट न बनाया जाए, क्योंकि इसका असली स्वाद इसके दरदरेपन और ताजे मसालों के मेल में ही छिपा होता है। जो लोग छौंक पसंद करते हैं, वे कढ़ाई में थोड़ा घी या तेल गर्म करके जीरा और हींग का तड़का लगा सकते हैं और चटनी को धीमी आंच पर करीब दो मिनट तक पका सकते हैं। हालांकि, मारवाड़ के कई घरों में इस चटनी को बिना तड़के के कच्चा ही परोसा जाता है।
नरम और स्वादिष्ट बाजरे की रोटी बनाने का तरीका
बाजरे की रोटी तैयार करने के लिए एक बर्तन में बाजरे का आटा लिया जाता है, जिसमें थोड़ा सा नमक और गुनगुना पानी मिलाकर आटे को अच्छी तरह गूंथा जाता है। इसके बाद आटे की छोटी लोई बनाकर हथेलियों की मदद से थपकी देते हुए गोल आकार की रोटी तैयार की जाती है। इस रोटी को गर्म तवे पर दोनों तरफ से मध्यम आंच पर अच्छी तरह सेंका जाता है ताकि यह अंदर तक पक जाए।
तैयार हो चुकी बाजरे की रोटी पर ऊपर से शुद्ध देसी घी या मक्खन लगाया जाता है और इसे सिलबट्टे पर बनी काछर की चटनी के साथ गरमा-गरम परोसा जाता है। सर्दियों के दिनों में यह पारंपरिक मारवाड़ी भोजन न केवल स्वाद से भरपूर होता है बल्कि हमारी पुरानी रसोई संस्कृति की भी याद दिलाता है। पारंपरिक देसी खान-पान के प्रेमियों के लिए बाजरे की रोटी और काछर की चटनी का यह संयोजन एक बेहतरीन विकल्प है।



















