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सहारनपुर मस्जिद विध्वंस पर भड़के असदुद्दीन ओवैसी, बोले- 1911 के सबूत हैं हमारे पासराजनीति
5 सित॰ 2026, 2:36 pm (8 घंटे पहले)· 2

सहारनपुर मस्जिद विध्वंस पर भड़के असदुद्दीन ओवैसी, बोले- 1911 के सबूत हैं हमारे पास

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद गिराए जाने के बाद एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार को घेरा और मस्जिद के 1911 के दस्तावेजी सबूतों का हवाला दिया, जबकि प्रशासन ने इसे कोर्ट के आदेश पर की गई वैध कार्रवाई बताया है।

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में जिला कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर बरसों से खड़ी एक मस्जिद को बुलडोजर से गिरा दिया गया, जिसके बाद पूरे मामले ने सियासी रंग ले लिया। एआईएमआईएम सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी ने इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सीधे सरकार से सवाल पूछे, जबकि जिला प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई अदालत के आदेश और तय कानूनी प्रक्रिया के दायरे में ही की गई है।

1911 के दस्तावेजों का दावा

ओवैसी का कहना है कि मस्जिद कमेटी के पास 1911 तक के ऐसे रिकॉर्ड मौजूद हैं जो साबित करते हैं कि यह मस्जिद कितनी पुरानी है और यहां एक सदी से भी लंबे समय से बिना किसी रुकावट के नमाज पढ़ी जाती रही है। शनिवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखी अपनी पोस्ट में उन्होंने बताया कि मस्जिद कमेटी ने अदालत के सामने 1911 के दस्तावेज पेश करके यह साबित करने की कोशिश की थी कि यह मस्जिद कलेक्ट्रेट बनने से भी पहले वहां मौजूद थी। उन्होंने लिखा कि मस्जिद को शनिवार सुबह करीब 5 बजे ढहा दिया गया और सवाल किया कि क्या मुसलमानों के लिए मजहबी आजादी का संवैधानिक हक अब बचा ही नहीं है। उनका कहना था कि मुस्लिम इबादतगाहों पर बार-बार कमजोर और मनगढ़ंत वजहें बताकर बुलडोजर चलाया जाता है, और यह एक ऐसा चलन बनता जा रहा है जो लगातार सवालों के घेरे में है।

जमीन पर सरकारी दावे को घेरा

ओवैसी ने संपत्ति पर सरकार के अधिकार को लेकर भी कानूनी आधार पर सवाल खड़े किए। उनकी दलील थी कि लिमिटेशन एक्ट सरकार को यह खुली छूट नहीं देता कि वह किसी अचल संपत्ति पर दशकों पुरानी, खुली और लगातार चली आ रही काबिज़ियत को अचानक नजरअंदाज करके एकतरफा अपना मालिकाना हक जता दे। उनके मुताबिक जब किसी जमीन पर एक सदी से ज्यादा समय से खुला और निर्बाध कब्जा चला आ रहा हो, तो सरकार यह तर्क नहीं दे सकती कि यह कब्जा हाल ही में शुरू हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार की दलील मान भी ली जाए, तब भी इतने लंबे अरसे की कब्ज़ेदारी के बाद कानूनी तौर पर 'एडवर्स पजेशन' यानी प्रतिकूल कब्जे का सवाल जरूर उठेगा, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

'पहले मस्जिद बनी, बाद में आया कलेक्ट्रेट'

ओवैसी ने दोहराया कि इतिहास के हिसाब से मस्जिद कलेक्ट्रेट भवन से पहले की है, यानी पहले मस्जिद खड़ी हुई और उसके बाद वहां कलेक्ट्रेट परिसर बना। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शायद कुछ लोगों को मस्जिद का वहां दिखना ही नागवार गुजरता है, लेकिन यह उनकी अपनी समस्या है, मुसलमानों की नहीं। इसी क्रम में उन्होंने अपनी सबसे तीखी टिप्पणी करते हुए लिखा, "अपनी खुन्नस मिटाने के लिए हमारी मस्जिद पर बुलडोजर नहीं चला सकते।" उन्होंने आगे जोड़ा कि उनकी मजहबी आजादी किसी की मेहरबानी या रहम-ओ-करम पर टिकी हुई चीज नहीं है, बल्कि यह एक संवैधानिक अधिकार है जो किसी की इजाजत का मोहताज नहीं।

अदालत के आदेश के बाद हुई कार्रवाई

सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने की यह कार्रवाई सीधे अदालत के आदेश के बाद अंजाम दी गई। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने मस्जिद कमेटी की उस अपील को खारिज कर दिया जिसमें सिटी मजिस्ट्रेट के पुराने आदेश को चुनौती दी गई थी, और निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। इससे पहले 17 जुलाई को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ढांचे को गिराने का आदेश दे चुकी थी। अदालत ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और उसके गलत इस्तेमाल के आरोप में करीब 6.41 करोड़ रुपये के मुआवजे का आदेश भी दिया था, जिससे साफ है कि यह मामला महीनों से अदालत में चल रहा था और मस्जिद कमेटी की तरफ से हर स्तर पर कानूनी लड़ाई लड़ी गई।

सुरक्षा कड़ी, सोशल मीडिया पर भी नजर

सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह ने बताया कि सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने अपनी सुनवाई में यह पाया था कि मस्जिद सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाई गई थी, और इस आदेश के खिलाफ दाखिल की गई अपील भी अदालत में खारिज हो चुकी है। उन्होंने बताया कि मस्जिद गिराए जाने के बाद इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के मकसद से संवेदनशील और रणनीतिक रूप से अहम जगहों पर अतिरिक्त PAC और RAF बल तैनात किए गए हैं। डीआईजी के मुताबिक अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर भी करीबी नजर रखी जा रही है। वहीं प्रशासन का बार-बार यही कहना है कि पूरी कार्रवाई अदालत के आदेश और तय कानूनी प्रक्रिया के मुताबिक ही की गई है, इसमें किसी तरह की मनमानी नहीं बरती गई।

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सवाल-जवाब

सहारनपुर में किस जगह की मस्जिद गिराई गई?
यह मस्जिद सहारनपुर के जिला कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर बनी हुई थी।
मस्जिद को कब गिराया गया?
ओवैसी के मुताबिक मस्जिद को शनिवार सुबह करीब 5 बजे ढहाया गया।
असदुद्दीन ओवैसी ने क्या दावा किया है?
उन्होंने कहा कि मस्जिद के 1911 तक के रिकॉर्ड मौजूद हैं और यहां एक सदी से ज्यादा समय से लगातार नमाज पढ़ी जा रही थी।
प्रशासन ने मस्जिद गिराने की वजह क्या बताई?
प्रशासन का कहना है कि अदालत के आदेश के बाद सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बने ढांचे को कानूनी प्रक्रिया के तहत हटाया गया।
कोर्ट में यह मामला कब-कब सुना गया?
17 जुलाई को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने ढांचा गिराने का आदेश दिया था, और 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने मस्जिद कमेटी की अपील खारिज कर दी।
अदालत ने कितने मुआवजे का आदेश दिया?
अदालत ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और गलत इस्तेमाल के आरोप में करीब 6.41 करोड़ रुपये के मुआवजे का आदेश दिया।
मस्जिद गिराए जाने के बाद सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए?
सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह के मुताबिक संवेदनशील और रणनीतिक जगहों पर अतिरिक्त PAC और RAF बल तैनात किए गए हैं और सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है।
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