पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव के बहुप्रतीक्षित नतीजे घोषित कर दिए गए हैं, जिसमें एबीवीपी के उम्मीदवार अंकित बिढान ने अध्यक्ष पद पर शानदार जीत हासिल की है। चुनाव मैदान में उतरे अंकित बिढान ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 2,879 मतों के भारी अंतर से शिकस्त दी और इस अहम पद पर कब्जा जमाया। इस जीत के साथ ही विश्वविद्यालय परिसर में राजनीतिक सरगर्मी और चर्चाओं का दौर तेज हो गया है, क्योंकि जेन जी आंदोलन के बाद इसे संगठन के लिए एक ऐतिहासिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
एबीवीपी कार्यकर्ताओं में जश्न और उत्साह का माहौल
चुनाव परिणामों की घोषणा होते ही एबीवीपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच जश्न का माहौल बन गया। विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों ने ढोल-नगाड़ों के साथ जीत का जश्न मनाया और जोरदार नारेबाजी की। इस सफलता से उत्साहित कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को बधाई दी, जिसके बाद कैंपस की चुनावी फिजा पूरी तरह बदल गई और राजनीतिक गतिविधियां अचानक से काफी तेज हो गई हैं।
पंजाब यूनिवर्सिटी में संगठन के लिए बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि
छात्रसंघ के अध्यक्ष पद पर मिली यह जीत एबीवीपी के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी के इतिहास में एक बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। संगठन के नेताओं ने इसे आम छात्रों के बीच अपनी मजबूत पकड़, नीतियों और निरंतर मिल रहे समर्थन की बड़ी जीत करार दिया है। चुनाव से पहले तमाम राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला था, जिसमें दीपेंद्र हुड्डा सहित कई बड़े नेताओं के दौरों से सियासत काफी गरमा गई थी।
छात्र राजनीति के गलियारों में तेज हुई सियासी चर्चाएं
मतगणना पूरी होने और परिणाम सामने आने के बाद विभिन्न छात्र संगठनों और उम्मीदवारों के खेमों में सियासी चर्चाएं और रणनीतिक मंथन शुरू हो गया है। अध्यक्ष पद पर अंकित बिढान की इस धमाकेदार जीत से एक बार फिर साफ हो गया है कि पंजाब यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति में एबीवीपी का प्रभाव और दबदबा कितना मजबूत है। चुनाव परिणामों के बाद अब आगे की प्रशासनिक और सांगठनिक रणनीतियों पर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।





















