पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि आम आदमी पार्टी शनिवार को अपने प्रत्याशियों की पहली आधिकारिक सूची जारी करने जा रही है। यह घोषणा दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के आवास पर आयोजित पार्टी की उच्चस्तरीय संसदीय समिति की बैठक समाप्त होने के बाद की गई। इस रणनीतिक बैठक में पंजाब के चुनावी दंगल में उतरने वाले दावेदारों के नामों पर गहन चर्चा की गई और आगामी अभियान की पूरी रूपरेखा तैयार की गई।
केजरीवाल के आवास पर संसदीय समिति का मंथन
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित इस बैठक में पंजाब राज्य इकाई द्वारा भेजे गए संभावित प्रत्याशियों के पैनलों की बारीकी से समीक्षा की गई। पार्टी नेतृत्व ने फैसला किया है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान भगवंत मान सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों, जनकल्याणकारी फैसलों और उपलब्धियों को घर-घर पहुंचाया जाएगा। चुनावी घोषणापत्र के अधिकांश वादों को जमीन पर उतारने का दावा करते हुए पार्टी ने यह रणनीति बनाई है कि जिन नागरिकों को इन सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिला है, उन्हें सीधे तौर पर संगठन और अभियान से जोड़ा जाए।
सर्वे में खरे उतरे चेहरों पर दांव
उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया कि पार्टी ने जमीनी स्तर पर व्यापक सर्वे कराए हैं। इन सर्वेक्षणों में जिन निष्ठावान और ईमानदार लोगों के नाम जनता के बीच से उभरकर सामने आए हैं, पार्टी उन्हीं को चुनावी मैदान में उतारने जा रही है। उन्होंने जानकारी दी कि अधिकांश विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों के नाम लगभग अंतिम रूप से तय किए जा चुके हैं। शनिवार को औपचारिक तौर पर पहली सूची सार्वजनिक कर दी जाएगी, जिससे उम्मीदवारों को अपने क्षेत्रों में प्रचार के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
अकाली दल और बीजेपी के संभावित तालमेल पर तीखा हमला
राज्य के राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा करते हुए भगवंत मान ने शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के बीच दोबारा गठबंधन होने की संभावनाओं पर तंज कसा। हालिया दिनों में अमित शाह द्वारा दिए गए संकेतों और सुखबीर बादल के उस बयान का हवाला देते हुए, जिसमें उन्होंने समान विचारधारा वाले दलों से हाथ मिलाने की बात कही थी, मान ने कहा कि दोनों दलों का साथ आना उनके लिए कतई अप्रत्याशित नहीं है। मान ने सवाल उठाया कि जब अमित शाह मंच पर बिक्रम मजीठिया के साथ बैठेंगे, तो वे जनता के सामने नशामुक्त पंजाब और ड्रग्स के खिलाफ बड़े दावों की वकालत किस तरह करेंगे।
कानून व्यवस्था और नशे की समस्या बनी प्रमुख चुनौती
चुनावी सरगर्मियों के बीच राज्य सरकार के सामने कानून व्यवस्था और ड्रग्स का प्रसार एक बेहद संवेदनशील विषय बना हुआ है। सत्ता में आने से पूर्व पांच वर्षों में राज्य को पूर्णतः नशामुक्त करने का संकल्प लिया गया था, किंतु वर्तमान में भी चिट्टे की बिक्री और कथित ओवरडोज से युवाओं के जान गंवाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। इसके साथ ही पुलिसकर्मियों पर सरेआम होने वाले हमले, फायरिंग की वारदातें और निरंतर सामने आ रहे हत्या के मामलों को लेकर नागरिकों में चिंता व्याप्त है। भारतीय जनता पार्टी, शिरोमणि अकाली दल तथा कांग्रेस जैसे प्रमुख विपक्षी दल इन मुद्दों को लेकर लगातार सरकार की घेराबंदी कर रहे हैं, जिससे आगामी चुनाव में मुकाबला बेहद कड़ा होने के आसार हैं।



















