दीपावली और धनतेरस के बड़े कारोबारी दौर से ठीक पहले देश की राजधानी में सियासी सरगर्मी ने दुकानदारों की नींद उड़ा दी है। मध्य दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आगामी 1 नवंबर को आयोजित होने वाली 10 लाख लोगों की विशाल राजनीतिक सभा को लेकर व्यापारिक वर्ग में जबरदस्त बेचैनी फैल गई है। कारोबारियों का कहना है कि धनतेरस और दिवाली के ऐन वक्त पर अगर शहर के दिल में इस कदर जनसैलाब उमड़ेगा, तो खरीद-फरोख्त पूरी तरह चरमरा जाएगी। इसी संकट को भांपते हुए व्यापारियों के प्रमुख संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री, जिसे संक्षेप में सीटीआई कहा जाता है, ने विपक्षी गठबंधन के शीर्ष दिग्गजों का दरवाजा खटखटाया है। संगठन ने सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को औपचारिक खत भेजकर इस मामले में तुरंत दखल देने का आग्रह किया है।
व्यापारिक प्रतिनिधियों ने साफ किया है कि उनका किसी भी राजनीतिक दल या उनके लोकतांत्रिक कार्यक्रमों से कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है। चैंबर के चेयरमैन बृजेश गोयल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि व्यापारी केवल अपने परिवारों की आजीविका बचाने के लिए गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि 6 नवंबर को धनतेरस का महापर्व है और उसके दो दिन बाद 8 नवंबर को दीपावली मनाई जानी है। ऐसे में 1 नवंबर की तारीख वह नाजुक वक्त है जब सालभर की सबसे बड़ी खरीदारी होती है, खुदरा दुकानों में स्टॉक पहुंचाया जाता है और देशभर से थोक खरीदार यहां आते हैं। यदि उस दिन 15 से 20 हजार गाड़ियों का काफिला और दस लाख की भीड़ मध्य दिल्ली की संकरी सड़कों पर पहुंचेगी, तो ग्राहकों और माल दोनों की आवाजाही पर ताला लग जाएगा।
वाहनों के लिए पार्किंग का घोर अभाव और चक्काजाम का डर
व्यापारी संगठन द्वारा भेजे गए पत्र में चार सबसे बड़े खतरों को प्रमुखता से दर्ज किया गया है। इनमें सबसे पहली और विकट चुनौती पार्किंग व्यवस्था की है। ऐतिहासिक मैदान के मौजूदा बुनियादी ढांचे के अनुसार, वहां दो सौ बड़ी बसों को खड़ा करने की भी पर्याप्त जगह मौजूद नहीं है। ऐसे हालात में जब दस लाख समर्थकों को लाने के लिए 15 से 20 हजार चार पहिया वाहनों, बसों और मिनी ट्रकों के आने का अनुमान है, तो उन्हें कहां खड़ा किया जाएगा, यह एक अनुत्तरित सवाल बना हुआ है। यदि इन अनगिनत वाहनों को आसपास के सार्वजनिक रास्तों पर भी खड़ा करने का प्रयास किया गया, तो पूरी जगह कम पड़ जाएगी।
नतीजतन, इलाके की मुख्य धमनी माने जाने वाले जवाहरलाल नेहरू मार्ग, बहादुर शाह जफर मार्ग, नेताजी सुभाष मार्ग, अजमेरी गेट चौराहे और चांदनी चौक मुख्य मार्ग पर वाहनों का अभूतपूर्व दबाव बनना तय है। इस भारी जमावड़े से मध्य दिल्ली के साथ-साथ पुरानी दिल्ली का संपूर्ण ट्रैफिक तंत्र ध्वस्त हो सकता है। संगठन ने अंदेशा जताया है कि अगर स्थिति बिगड़ी तो दिल्ली के प्रमुख बाजार क्षेत्रों में लॉकडाउन जैसी भयानक बंदी के हालात बन सकते हैं, जिससे आम खरीदारों का दुकानों तक पहुंचना असंभव हो जाएगा।
बीस ऐतिहासिक व्यापारिक केंद्र और रोजाना 12 हजार करोड़ का दांव
रामलीला मैदान के पांच किलोमीटर के दायरे में राजधानी का सबसे सघन व्यापारिक गलियारा स्थित है, जहां करीब 20 प्रमुख थोक और खुदरा मंडियां मौजूद हैं। इस विशाल सूची में चांदनी चौक, एशिया का सबसे बड़ा थोक बाजार सदर बाजार, ऐतिहासिक कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, जनपथ, भागीरथ पैलेस की बिजली मंडी, खारी बावली का किराना बाजार, कश्मीरी गेट ऑटोमोबाइल मार्केट, नया बाजार का अनाज व्यापार, लाजपत राय मार्केट, चावड़ी बाजार का पेपर मार्केट, किनारी बाजार, दरीबा कलां का सर्राफा, बल्लीमारान, फतेहपुरी, तिलक बाजार, करोल बाग, जामा मस्जिद, नबी करीम, गफ्फार मार्केट का इलेक्ट्रॉनिक्स केंद्र और अजमेरी गेट व पहाड़गंज का इलाका शामिल हैं।
इन बाजारों की हैसियत केवल स्थानीय दुकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि ये समूचे हिंदुस्तान के सप्लाई नेटवर्क की रीढ़ हैं। यहां हर रोज दिल्ली के 56 औद्योगिक क्षेत्रों, जिनमें नरेला, बवाना, ओखला, मायापुरी, मुंडका, उद्योग नगर और मंगोलपुरी शामिल हैं, से करीब पांच हजार कमर्शियल वाहन माल की डिलीवरी करने पहुंचते हैं। इसके अलावा लगभग तीन हजार भारी ट्रक रोजाना इन मंडियों से तैयार माल लादकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के 25 शहरों, जैसे गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, सोनीपत और पानीपत के साथ-साथ देश के दूरदराज राज्यों में ले जाते हैं। संगठन का आकलन है कि इन बाजारों में प्रतिदिन 10 हजार से 12 हजार करोड़ रुपये का लेन-देन होता है। यदि पाबंदियों के चलते यह आपूर्ति चक्र रुका, तो दिल्ली ही नहीं बल्कि अन्य सूबों के व्यापारियों को भी भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
एक दिन पहले से ही दिल्ली की सीमाओं पर आपूर्ति थमने की आशंका
व्यापारियों की चिंता सिर्फ रैली वाले दिन तक सीमित नहीं है। सीटीआई ने आगाह किया है कि इस भारी जमावड़े के दुष्परिणाम 31 अक्टूबर की दोपहर से ही धरातल पर दिखने लगेंगे। देश के विभिन्न कोनों से आने वाले कार्यकर्ताओं के वाहन 31 अक्टूबर से ही दिल्ली के सिंघु, टिकरी, गाजीपुर और बदरपुर जैसे प्रमुख सीमा चौकियों पर जमा होने शुरू हो जाएंगे। जैसे ही सीमाओं पर वाहनों की कतारें लंबी होंगी, पुलिस शाम होते-होते मध्य दिल्ली के मुख्य चौराहों पर बैरिकेडिंग और रूट डायवर्जन लागू कर देगी।
व्यापारियों के अनुसार, माल ढुलाई करने वाले ट्रांसपोर्टर्स ने भी 31 अक्टूबर से दिल्ली के अंदर मालवाहक ट्रक भेजने को लेकर हाथ खड़े करने शुरू कर दिए हैं। अगर त्योहार के ठीक पहले सामान से लदी गाड़ियां बाजारों तक नहीं पहुंच पाईं, तो दुकानों के रैक खाली रह जाएंगे और खुदरा व्यापारी ग्राहकों की भारी मांग पूरी करने से चूक जाएंगे। इसका सीधा फायदा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स या दिल्ली से बाहर के बाजारों को मिल सकता है, जो स्थानीय दुकानदारों की कमर तोड़ देगा।
दस अक्टूबर के प्रदर्शन की नजीर और सीटीआई के दो ठोस सुझाव
अपनी चिंताओं को तर्कसंगत साबित करने के लिए व्यापारी संगठन ने हाल ही में जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शन का ब्योरा दिया है। संगठन ने याद दिलाया कि उस दिन महज पांच से सात हजार लोग जुटे थे, इसके बावजूद मध्य दिल्ली का ट्रैफिक लगभग आठ घंटे तक पूरी तरह रेंगता रहा और लोग जाम में फंसे रहे। जब चंद हजार लोगों में यह हाल हुआ, तो दस लाख की भीड़ के समय दिल्ली की सड़कों का क्या हश्र होगा, इसकी सहज कल्पना की जा सकती है। त्योहारों में ग्राहकों का समय पर दुकानों तक पहुंचना सबसे अहम होता है, और जाम के डर से यदि खरीदार दूसरी जगहों पर चले गए तो नुकसान की भरपाई नामुमकिन होगी।
इन सभी गंभीर वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए सीटीआई ने विपक्षी नेताओं के सामने समाधान के दो स्पष्ट विकल्प रखे हैं। पहला विकल्प यह दिया गया है कि 1 नवंबर को होने वाली इस महारैली को स्थगित करके दिवाली के बाद, यानी 10 या 11 नवंबर अथवा उसके बाद आयोजित किया जाए। इससे धनतेरस और दीपावली का पीक बिजनेस बिना किसी बाधा के संपन्न हो सकेगा। दूसरा विकल्प यह सुझाया गया है कि यदि तारीख बदलना कतई मुमकिन नहीं है, तो आयोजन स्थल को रामलीला मैदान से बदलकर बाहरी दिल्ली के बुराड़ी मैदान में स्थानांतरित कर दिया जाए। संगठन के अनुसार, बुराड़ी मैदान में करीब 15 हजार वाहनों को व्यवस्थित तरीके से पार्क करने की पर्याप्त जगह उपलब्ध है, जिससे मध्य दिल्ली के घने बाजारों और आम नागरिकों को भारी ट्रैफिक जाम से बचाया जा सकता है।























