उत्तर भारत के सबसे सुरक्षित कारागारों में गिने जाने वाले राजस्थान के अजमेर स्थित हाई सिक्योरिटी प्रिजन में माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है। इस जेल में बंद कुख्यात अपराधियों लॉरेंस बिश्नोई और रोहित गोदारा सिंडिकेट से जुड़े गुर्गों की ओर से आए दिन पैदा किए जा रहे गतिरोध के कारण बड़े टकराव की आशंका बढ़ती जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों और जेल प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन कैदियों की आपसी खींचतान को रोकना है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। हालात की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी पूरी तरह मुस्तैद हैं तथा हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है।
इसी जेल परिसर में पिछले करीब अठारह दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हार्डकोर कैदी सचिन थापन की सेहत में सुधार दर्ज होने के बाद उसे गुरुवार को वापस जेल के भीतर दाखिल करा दिया गया। लंबी हड़ताल के चलते उसकी शारीरिक स्थिति काफी कमजोर हो गई थी, जिसके बाद प्रबंधन ने उसे चिकित्सीय सहायता के लिए जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया था। डॉक्टरों की निगरानी में चले इलाज और तमाम जांच के बाद जब उसकी हालत स्थिर हुई, तब उसे भारी सुरक्षा के पहरे के बीच वापस इसी हाई सिक्योरिटी जेल में लाया गया।
अजमेर की इस कड़ी सुरक्षा वाली जेल में आरोपी सचिन थापन पिछले लगभग ढाई साल से लगातार बंद है। उस पर चर्चित पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला मर्डर केस की साजिश रचने का गंभीर आरोप है। इसके अलावा, राजस्थान के हनुमानगढ़ इलाके में हुई फिरौती से जुड़ी हत्या के मामलों समेत पंजाब और राजस्थान के कई अन्य थानों में उसके विरुद्ध कई संगीन मुकदमे दर्ज बताए जाते हैं। इन्हीं तमाम आपराधिक मामलों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए उसे इस विशेष जेल में रखा गया है। रिकॉर्ड के अनुसार, वह लॉरेंस बिश्नोई का कथित रूप से भांजा बताया जाता है।
इससे पहले बीते सितंबर के महीने में इसी जेल की एक बैरक के भीतर बंद कुछ कैदियों के बीच मामूली कहासुनी ने बड़े विवाद का रूप ले लिया था। जेल सूत्रों के अनुसार, उस दौरान सचिन थापन और उसके साथियों पर जेल प्रहरियों के साथ हाथापाई करने तथा बैरक की टाइलें तोड़कर उनके नुकीले टुकड़े अन्य बंदियों की तरफ फेंकने के आरोप लगे थे। इस हंगामे के दौरान परिसर में अफरा-तफरी मच गई थी, जिसे नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों को बुलाना पड़ा था और उपद्रवी कैदियों को अलग-अलग बैरकों में शिफ्ट करना पड़ा था।
उस शुरुआती हंगामे के तुरंत बाद सचिन थापन के कुछ सहयोगियों ने भी अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल शुरू कर दी थी, हालांकि जेल अधिकारियों की समझाइश के बाद उन्होंने अपना विरोध समाप्त कर दिया था। इसके विपरीत, सचिन ने अपनी शर्तों को मनवाने के लिए अनशन जारी रखा। उसने लंबे समय तक अन्न ग्रहण नहीं किया और इसके पीछे धार्मिक मान्यताओं का हवाला दिया। हालांकि, जेल प्रबंधन की तरफ से उसे फल और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के पूरे इंतजाम किए गए थे, लेकिन उसने कुछ भी खाने से इनकार कर दिया।
लंबे समय तक कुछ न खाने के कारण उसके शरीर में भारी कमजोरी आ गई थी और स्वास्थ्य संबंधी कई दिक्कतें उभर आई थीं। जेल के डॉक्टर की सलाह पर उसे पहले भी अस्पताल ले जाया जा चुका था। इस बार उसका विस्तृत मेडिकल चेकअप कराया गया और जरूरी उपचार दिया गया। डॉक्टरों से हरी झंडी मिलने और सुरक्षा के सभी पहलुओं का आंकलन करने के बाद उसे वापस बैरक में भेज दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, सचिन थापन की मुख्य मांग यह है कि उसके साथियों को भी उसी के वार्ड में स्थानांतरित कर दिया जाए। जेल प्रबंधन ने सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने के मकसद से इन दोनों गुटों के लोगों को अलग-अलग परिसरों में रखा हुआ है। माना जा रहा है कि वह इसी बात को लेकर प्रशासन पर दबाव बनाने के हथकंडे अपना रहा है।
दूसरी ओर, सुरक्षा एजेंसियों की चिंता इस बात को लेकर भी है कि लॉरेंस बिश्नोई और रोहित गोदारा के यह गिरोह पहले एक साथ काम करते थे, लेकिन समय के साथ इनके आपसी संबंधों में खटास आ गई और दोनों के बीच गहरी दुश्मनी पैदा हो गई। चूंकि इस जेल में दोनों विरोधी गुटों के लोग बंद हैं, इसलिए किसी भी वक्त बड़ी हिंसा भड़कने का अंदेशा बना हुआ है। इसी एहतियात के तौर पर जेल की हर एक बैरक की निगरानी बेहद सख्त कर दी गई है। इतिहास गवाह है कि राज्य की अन्य जेलों में भी अतीत में खूनी संघर्ष हो चुके हैं, जैसे कि करीब बारह साल पहले बीकानेर जेल में हुई गोलीबारी की घटना, जिसमें एक कैदी की मौत हो गई थी और दो अन्य कैदियों को पीट-पीटकर मार डाला गया था। ऐसी किसी भी पुनरावृत्ति को रोकने के लिए अजमेर में प्रशासन कोई ढिलाई नहीं बरत रहा है।



















