राजस्थान के अलवर नगर निगम चुनाव का बिगुल बज चुका है और शहर की सरकार चुनने के लिए सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। वार्ड स्तर से लेकर महापौर पद तक के लिए राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों ने अपनी रणनीतियां बनानी शुरू कर दी हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस बार अलवर की जनता आखिर किस तरह का महापौर चाहती है। इसी सिलसिले में लोगों की नब्ज टटोलने के लिए वार्ड नंबर एक के गांव बल्ला बोड़ा के ग्रामीणों से बात की गई और जाना गया कि वे आगामी महापौर से क्या उम्मीदें रखते हैं। अलवर नगर परिषद को 65 वार्डों के साथ नगर निगम का दर्जा मिलने के बाद यह पहला मौका है जब शहर की कमान किसी महिला मेयर के हाथ में होगी क्योंकि इस बार महापौर पद महिलाओं के लिए अनारक्षित किया गया है। इस बदलाव के बाद शहर में इस बात पर लंबी चर्चा हो रही है कि नई महापौर किस तरह के विकास कार्यों को प्राथमिकता देंगी।
बुनियादी सुविधाओं का इंतजार कर रहे ग्रामीण
गांव बल्ला बोड़ा के रहने वाले याकूब खान ने अपनी राय रखते हुए कहा कि नगर निगम का नेतृत्व करने वाला महापौर और पार्षद ऐसा होना चाहिए जो वार्ड और पूरे शहर के विकास को गति दे। उन्होंने जोर देकर कहा कि शहर को एक ऐसा नेता चाहिए जो वार्ड के भीतर पक्की नालियों का निर्माण, नियमित साफ-सफाई और पीने के शुद्ध पानी की व्यवस्था जैसी तमाम मूलभूत समस्याओं का समय पर समाधान कर सके। वार्ड नंबर एक के अंतर्गत आने वाले गांव बल्ला बोड़ा को अलवर शहर का हिस्सा बने हुए 50 साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद आज भी यह क्षेत्र अपेक्षित विकास की बाट देख रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कागजों और सीमाओं के लिहाज से नगर परिषद क्षेत्र में शामिल होने के बावजूद उनके इलाके में जरूरी बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों की भारी कमी बनी हुई है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजमर्रा की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
जनता की समस्याएं और उम्मीदें
स्थानीय निवासी धर्म सिंह यादव का कहना है कि अलवर नगर निगम का अगला महापौर ऐसा होना चाहिए जो आम नागरिकों की समस्याओं को गंभीरता से सुने और उनका जल्द से जल्द निवारण करे। वहीं जफर खान ने बताया कि वार्ड एक में पानी की किल्लत, खराब रोड लाइट, टूटी सड़कें और गंदगी का अंबार सबसे बड़ी समस्याएं हैं। पचास साल से अधिक समय से शहर की सीमा में आने के बावजूद ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। शहरवासियों का साफ कहना है कि इस बार ऐसा नेतृत्व चुनकर आना चाहिए जो बेहतर साफ-सफाई, मजबूत सड़कें, सुचारू बिजली और पेयजल की मुकम्मल व्यवस्था सुनिश्चित कर सके। अलवर के नागरिकों का यह भी कहना है कि मानसून के दौरान शहर की सड़कों पर भारी जलभराव की स्थिति बन जाती है, इसलिए आने वाले महापौर को ड्रेनेज सिस्टम में सुधार करना होगा और पूरे शहर को स्वच्छ बनाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
साफ-सफाई और पानी की गंभीर समस्या
नसीब खान ने अपनी बात रखते हुए बताया कि अलवर शहर के आसपास कई ऐसे वार्ड हैं जहां सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं, नालियों का नामोनिशान नहीं है और जगह-जगह पानी भरा रहता है, जिसके कारण आम जनता को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। अलवर में इस समय सबसे विकट समस्या साफ-सफाई और पेयजल की है। एक अन्य स्थानीय निवासी यशवंत कुमार गुप्ता ने बताया कि वार्ड नंबर एक की सड़कों पर अक्सर कीचड़ का जमावड़ा रहता है। उन्होंने साझा किया कि वह 55 वर्ष के हैं और जब से इस इलाके में रह रहे हैं, तब से अलवर शहर में बिजली, पानी और साफ-सफाई जैसी बुनियादी परेशानियों को लगातार झेलते आ रहे हैं। उनका मानना है कि इतने साल बीत जाने के बाद भी इन समस्याओं का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
मतदाताओं की संख्या और चुनाव का पूरा कार्यक्रम
यशवंत कुमार गुप्ता ने आगे कहा कि चूंकि अलवर नगर निगम में इतिहास में पहली बार महापौर पद के लिए चुनाव हो रहे हैं, इसलिए किसी भी पार्टी का प्रत्याशी जीते, उसे शहर का वास्तविक विकास सुनिश्चित करना चाहिए ताकि आम जनता को उसका सीधा लाभ मिल सके। गौर करने वाली बात यह है कि इस बार के अलवर नगर निगम चुनाव में कुल 2,66,405 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इस कुल मतदाता सूची में 1,36,654 पुरुष मतदाता, 1,29,723 महिला मतदाता और 18 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं। पूरे निगम क्षेत्र को 65 वार्डों में विभाजित किया गया है, जिनके लिए कुल 241 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। अलवर नगर निगम चुनाव के तहत पार्षदों के लिए वोटिंग 9 सितंबर को संपन्न होगी, जबकि नवनिर्वाचित पार्षदों द्वारा 21 सितंबर को महापौर का चुनाव किया जाएगा।



















