तमिलनाडु की राजनीति में सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर बड़ी तनातनी खुलकर सामने आ गई है। मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेट्री कझगम सरकार में कांग्रेस भी साझीदार है और उसकी भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। हालांकि अब कांग्रेस के एक कद्दावर मंत्री ने अपनी ही सरकार के नेतृत्व को खुली चेतावनी दे दी है। मंत्री के इस बयान के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में समीकरण बदलने के कयास लगाए जा रहे हैं।
राहुल गांधी को लेकर कांग्रेस की दो टूक
कन्याकुमारी में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए राज्य सरकार के मंत्री राजेश कुमार ने साफ शब्दों में कहा कि साल 2029 के आम चुनाव में राहुल गांधी देश के अगले प्रधानमंत्री पद की कमान संभालेंगे। उन्होंने आगे कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि तमिलगा वेट्री कझगम इस बात पर रजामंदी नहीं जताती है, तो सरकार में शामिल कांग्रेस के दोनों मंत्री फौरन अपने पदों से त्यागपत्र सौंप देंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तीखे बयान से दोनों दलों के रिश्तों में आई खटास जनता के बीच आ गई है और इससे गठबंधन सरकार के भीतर गंभीर संकट पैदा हो सकता है।
तमिलनाडु विधानसभा का वर्तमान गणित
राज्य के राजनीतिक इतिहास में साल 1967 के बाद यह पहला मौका है जब द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम यानी द्रमुक और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम यानी अन्नाद्रमुक के अलावा किसी अन्य दल ने सूबे की सत्ता पर कब्जा जमाया है। मौजूदा विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा 118 सीटों का है। मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम के पास फिलहाल 108 विधायक हैं। इसके अलावा सत्ता पक्ष को कांग्रेस पार्टी के 5 विधायकों का सीधा समर्थन प्राप्त है।
गठबंधन सहयोगियों का समीकरण और सीटें
सत्तारूढ़ दल को केवल कांग्रेस का ही नहीं बल्कि कई अन्य वामदल और क्षेत्रीय पार्टियों का भी साथ मिला हुआ है। विधानसभा में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, विदुथलाई चिरुथाइगल काची और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के पास दो-दो विधायक हैं, जिन्होंने बाहर से इस सरकार को समर्थन दे रखा है। गठबंधन की इसी राजनीतिक मजबूरी और तालमेल के तहत तमिलगा वेट्री कझगम ने समर्थन के एवज में कांग्रेस को मंत्रिमंडल में दो मंत्री पद के साथ-साथ एक राज्यसभा सीट भी तोहफे में दी है, जिस पर अब संकट के बादल मंडराते नजर आ रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सुरक्षा में कटौती
इस सियासी उठापटक के बीच राज्य की जोसेफ विजय सरकार ने एक और बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सुरक्षा व्यवस्था को कम कर दिया है। अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि राज्य सचिवालय में सुरक्षा व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा करने के बाद, तमिलनाडु पुलिस के कोर सेल सिक्योरिटी विंग ने यह कदम उठाया है। इसके तहत पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सुरक्षा श्रेणी को जेड प्लस से घटाकर सीधे जेड कैटेगरी का कर दिया गया है।
सुरक्षा कर्मियों की संख्या घटाई गई
सुरक्षा समीक्षा के इस नए फैसले के लागू होने के बाद अब पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सुरक्षा में तैनात रहने वाले जवानों की संख्या में भारी कमी कर दी गई है। पहले जहां उनकी हिफाजत के लिए कुल 54 सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाते थे, वहीं अब इस संख्या को घटाकर केवल 34 कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले को भी राज्य की बदलती हुई राजनीतिक परिस्थितियों और समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में विपक्ष का रुख और ज्यादा हमलावर हो सकता है।





















