जयपुर नगर निगम के होने वाले चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के खेमे में आगामी चुनावों के मद्देनजर टिकट बंटवारे की प्रक्रिया लगभग पूरी की जा चुकी है, लेकिन आधिकारिक घोषणा न होने के कारण दावेदारों की बेचैनी बढ़ती जा रही है। नामांकन की समयसीमा जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, राजनीतिक गलियारों में टिकट पाने की चाह रखने वालों की धड़कनें तेज हो गई हैं और हर कोई पार्टी के अगले कदम पर नजरें टिकाए बैठा है।
पैनल तैयार लेकिन सूचियां जारी नहीं
संगठन के भीतर की जानकारियों के मुताबिक, शहर के सभी 150 वार्डों के लिए संभावित प्रत्याशियों के नामों का पैनल तैयार किया जा चुका है। चयन का काम पूरा होने के बावजूद भाजपा की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक सूची सार्वजनिक नहीं की गई है। इस स्थिति के चलते पूरे शहर में दावेदार और उनके समर्थक फोन के जरिए एक-दूसरे से अंदरूनी खबरें जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। कार्यकर्ता वरिष्ठ नेताओं से संपर्क साधकर अपनी उम्मीदवारी की स्थिति जानने में लगे हुए हैं, जिससे असमंजस का माहौल बना हुआ है।
भीतरघात और बगावत से बचने की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी द्वारा सूची जारी करने में हो रही देरी के पीछे एक सोची-समझी चुनावी रणनीति काम कर रही है। संगठन चुनाव से ठीक पहले होने वाली बगावत और भीतरघात के जोखिम से बचना चाहता है। अगर टिकटों का ऐलान बहुत पहले कर दिया जाता है, तो जिन लोगों के नाम कटेंगे वे पार्टी से बगावत कर सकते हैं या विरोधी खेमे में जा सकते हैं। इस संभावित खतरे को टालने के लिए ही पार्टी नेतृत्व बेहद गोपनीयता के साथ अपने कदम बढ़ा रहा है।
अंतिम समय में चुनाव चिह्न बांटने की योजना
सामने आ रही जानकारियों के अनुसार, पार्टी इस बार लंबी सूचियां सार्वजनिक करने के बजाय सीधे चयनित उम्मीदवारों को फोन या अन्य माध्यमों से सूचित करने की तैयारी में है। इसके अलावा, पार्टी का आधिकारिक चुनाव चिह्न और जरूरी कागजात भी बिल्कुल आखिरी वक्त पर ही दिए जाने की चर्चाएं हैं। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त होने की वजह से आज रात से लेकर कल सुबह तक का समय काफी अहम माना जा रहा है। इस दौरान टिकटों को लेकर चल रहा सस्पेंस अपने चरम पर पहुंच सकता है और इस अंतिम दौर की हलचल ने पूरे प्रदेश का सियासी पारा गरमा दिया है।


















