राजस्थान के भरतपुर जिले में राजनीतिक और प्रभावशाली हस्तियों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की हत्या के बाद से क्षेत्र का पुराना आपराधिक और राजनीतिक संघर्ष एक बार फिर केंद्र में आ गया है। स्थानीय इतिहास में इस तरह की कई वारदातें दर्ज हैं, जिन्होंने समय-समय पर कानून व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अतर सिंह भड़ाना पर हुए घातक हमले से लगभग चार साल पहले भाजपा नेता कृपाल सिंह जघीना की भी इसी प्रकार गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद से इलाके में तनाव का माहौल बन गया था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे थे।
कृपाल सिंह जघीना हत्याकांड से सहम गया था पूरा इलाका
सितंबर 2022 का महीना भरतपुर के राजनीतिक गलियारों के लिए एक काला अध्याय साबित हुआ था, जब भाजपा नेता कृपाल सिंह जघीना को सरेआम घेरकर गोलियों से छलनी कर दिया गया था। इस दुस्साहसिक वारदात ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी थी और आपराधिक वर्चस्व की जंग को खुलकर सामने ला दिया था। दिनदहाड़े हुई इस गोलीबारी में एक राजनीतिक हस्ती की जान चले जाने के बाद पुलिस प्रशासन पर भारी दबाव बन गया था। इस मामले की जांच के दौरान कुलदीप जघीना समेत कई अन्य आरोपियों के नाम सामने आए थे, जिन पर पुलिस ने शिकंजा कसते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू की थी। इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस ने पूरे प्रदेश का ध्यान खींचा था और आपराधिक गिरोहों के बीच आपसी रंजिश को उजागर किया था।
रोडवेज बस के भीतर आरोपियों पर ताबड़तोड़ फायरिंग
कृपाल सिंह जघीना हत्याकांड का यह मामला तब और अधिक पेचीदा हो गया, जब इस जुर्म के मुख्य आरोपियों पर ही जानलेवा हमला कर दिया गया। जुलाई 2023 के दौरान जब कुलदीप जघीना और विजयपाल सिंह को अदालत में पेशी के लिए जयपुर से भरतपुर ले जाया जा रहा था, तब रास्ते में बदमाशों ने रोडवेज बस को निशाना बनाया। चलती बस के अंदर घुसकर उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई गईं, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। इस दुस्साहसिक घटना ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया था और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी थी। अदालत में पेशी पर ले जाए जा रहे विचाराधीन कैदियों की हत्या ने इस बात पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे कि पुलिस हिरासत में आरोपियों की सुरक्षा कितनी पुख्ता थी। इस सनसनीखेज प्रतिशोध ने भरतपुर के आपराधिक इतिहास में एक और खूनी अध्याय जोड़ दिया था।
अतर सिंह भड़ाना की हत्या के बाद ताजा हुई पुरानी यादें
अब अतर सिंह भड़ाना की हत्या की घटना सामने आने के बाद भरतपुर के लोगों को कृपाल सिंह जघीना और उसके आरोपियों के साथ घटी वह खौफनाक वारदात याद आ गई है। दोनों ही मामलों की परिस्थितियां और जांच के पहलू भले ही अलग-अलग रहे हों, लेकिन इन वारदातों का असर इलाके की सुरक्षा और राजनीति पर गहरा पड़ा है। अतर सिंह भड़ाना हत्याकांड की जांच के सिलसिले में हाल ही में मुख्य आरोपी मुकेश फौजी की गिरफ्तारी हुई है, जिससे इस मामले से जुड़े कई रहस्यों के खुलने की उम्मीद जताई जा रही है। इन तमाम घटनाओं ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भरतपुर में राजनीतिक रंजिश और आपराधिक गिरोहों का गठजोड़ किस हद तक खतरनाक रूप ले चुका है, जिससे आम जनता के मन में भी डर का माहौल पैदा हो गया है।



















