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जोधपुर की ऐतिहासिक जल धरोहर बचाने में जुटे 80 साल के आयरिश नागरिक कैरेन रॉन्सलेराजस्थान
17 अक्तू॰ 2026, 11:39 am (18 मिनट पहले)· 0

जोधपुर की ऐतिहासिक जल धरोहर बचाने में जुटे 80 साल के आयरिश नागरिक कैरेन रॉन्सले

आयरलैंड के रहने वाले 80 वर्षीय कैरेन रॉन्सले पिछले नौ वर्षों से जोधपुर की प्राचीन बावड़ियों और झालरों को अपने हाथों से साफ कर रहे हैं।

राजस्थान का प्रसिद्ध शहर जोधपुर अपने ऐतिहासिक महलों और किलों के साथ-साथ प्राचीन जल संरचनाओं के लिए भी जाना जाता है। शहर की पुरानी बावड़ियां और झालरे कभी स्थानीय आबादी की जल आवश्यकताओं को पूरा करती थीं, लेकिन समय के साथ उपेक्षा और गंदगी के कारण इनकी स्थिति खराब हो गई है। ऐसे समय में आयरलैंड से ताल्लुक रखने वाले 80 वर्षीय बुजुर्ग कैरेन रॉन्सले इन ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने के लिए आगे आए हैं। पिछले नौ वर्षों से वे लगातार इन जल स्रोतों की खुद सफाई कर रहे हैं और शहर की इस पुरानी विरासत को संवारने में जुटे हुए हैं।

भारत से पुराना जुड़ाव और पर्यावरण प्रेम

कैरेन रॉन्सले दुनिया के कई देशों की यात्रा कर चुके हैं, जिनमें यूरोप और पाकिस्तान शामिल हैं, लेकिन उन्हें जोधपुर से विशेष लगाव महसूस हुआ। वे खुद को भारतीय मानते हैं और इस शहर को अपना असली घर बताते हैं। उनके परिवार का भारत से पुराना नाता रहा है, क्योंकि उनके दादाजी डोरेन ब्रिटिश काल में रेलवे इंजीनियर के रूप में यहां आए थे और स्वतंत्रता के बाद भी अपनी सेवाएं देते रहे। यूरोप में बढ़ते प्रदूषण को करीब से देखने वाले कैरेन नहीं चाहते कि भारत को भी कभी वैसी स्थिति का सामना करना पड़े, इसलिए वे पर्यावरण संरक्षण के इस कार्य में पूरी तरह समर्पित हैं।

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महिला बाग झालरे से शुरू हुआ सेवा का सफर

शहर के प्रसिद्ध महिला बाग झालरे में फैले कचरे को देखकर कैरेन को गहरा दुख हुआ था, जिसके बाद उन्होंने खुद ही इस स्थिति को बदलने का संकल्प लिया। उनका मानना है कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति का पैमाना वहां के जल स्रोतों की स्थिति और कचरा प्रबंधन व्यवस्था से तय होता है। उनका कहना है कि प्रदूषित जल और उद्योगों का कचरा इंसानी सेहत के लिए बहुत बड़ा खतरा बन चुका है। इसके अलावा, उनका यह भी मानना है कि पर्यावरण को गंदा करने वाले उद्योगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और शहर को साफ रखने वाली महिला स्वच्छता कर्मियों को उचित सम्मान मिलना चाहिए।

सामूहिक सहभागिता ही असली धन

अपने इस निस्वार्थ अभियान के दौरान कई लोग कैरेन की सराहना करते हैं और उन्हें आर्थिक मदद या उपहार देने का प्रयास करते हैं, लेकिन वे इन चीजों को स्वीकार नहीं करते। उनके अनुसार, लोगों की सक्रिय भागीदारी ही उनका सबसे बड़ा इनाम है। उनका स्पष्ट विचार है कि धन से स्वच्छ पर्यावरण, बेहतर स्वास्थ्य या सुरक्षित भविष्य नहीं खरीदा जा सकता। इन अमूल्य चीजों की सुरक्षा के लिए केवल लोगों के प्रेम, देखभाल और सामूहिक जिम्मेदारी की आवश्यकता होती है, जो समाज को एक साथ लाती है।

आने वाली पीढ़ी को दे रहे हैं जागरूकता का संदेश

सफाई के अलावा कैरेन स्कूलों में जाकर बच्चों को स्वच्छ हवा, पर्यावरण और जल संरक्षण के महत्व के बारे में शिक्षित कर रहे हैं। उनका मानना है कि बच्चों के मन में कम उम्र से ही पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना जगाना भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए 'स्वच्छ भारत अभियान' को एक सराहनीय कदम मानते हैं, साथ ही उनका यह भी सुझाव है कि सफाई के बाद उसके निरंतर रखरखाव के लिए एक मजबूत और स्थाई कार्ययोजना का होना आवश्यक है। कैरेन का यह प्रयास साबित करता है कि ऐतिहासिक विरासतों को सहेजना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

सवाल-जवाब

कैरेन रॉन्सले मूल रूप से किस देश के रहने वाले हैं?
कैरेन रॉन्सले मूल रूप से आयरलैंड के रहने वाले हैं।
वे कितने वर्षों से जोधपुर में जल स्रोतों की सफाई कर रहे हैं?
वे पिछले नौ वर्षों से जोधपुर की ऐतिहासिक बावड़ियों और झालरों की सफाई कर रहे हैं।
भारत से उनके परिवार का क्या पुराना संबंध रहा है?
उनके दादाजी डोरेन ब्रिटिश काल में भारत में रेलवे इंजीनियर के रूप में आए थे और देश की आजादी के बाद भी यहां सेवाएं देते रहे।
उन्होंने सबसे पहले किस जगह की सफाई का संकल्प लिया था?
उन्होंने जोधपुर के प्रसिद्ध महिला बाग झालरे की बदहाली और कचरे को देखकर खुद सफाई करने का संकल्प लिया था।
कैरेन बच्चों को क्या सिखा रहे हैं?
वे स्कूलों में जाकर बच्चों को जल संरक्षण, स्वच्छता और स्वच्छ हवा के प्रति जागरूक कर रहे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 मिनट पहले

अस्सी साल की उम्र में अकेले उतरकर नौ साल से जोधपुर की बावड़ियाँ साफ़ करना सचमुच हैरान करने वाला है। क्या स्थानीय प्रशासन और नगर निगम कभी इनकी मदद के लिए आगे आए या सारा काम इन्हें अकेले ही करना पड़ रहा है?

Rohan Verma@rohan-verma·4 मिनट पहले

करन भाई, बात सही है कि निगम मदद नहीं करता, पर अकेले करने की बात भी थोड़ी बढ़ा-चढ़ाकर लगती है। बिना स्थानीय लोगों के सहयोग के नौ साल टिक पाना इतना आसान नहीं होता।

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