राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों में कई ऐसे चुनावी परिणाम सामने आए हैं, जिन्होंने राजनीतिक समीकरणों से हटकर अपनी व्यक्तिगत और मानवीय कहानियों से लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया है। ऐसा ही एक मार्मिक और रोमांचक मामला भरतपुर जिले की नदबई नगरपालिका के वार्ड नंबर 6 से सामने आया है, जहां जीत और हार का फैसला सिर्फ एक वोट के अंतर से तय हुआ। इस बेहद कड़े मुकाबले में निर्दलीय प्रत्याशी जगदीश प्रसाद ने अपने प्रतिद्वंद्वी भाजपा प्रत्याशी रामशरण को मात्र एक मत के अंतर से पराजित कर दिया। जब मतगणना की प्रक्रिया पूरी हुई, तो निर्दलीय जगदीश प्रसाद के पक्ष में 151 वोट आए, जबकि भाजपा प्रत्याशी रामशरण को कुल 150 वोट प्राप्त हुए। इस प्रकार 151 और 150 के इस अत्यंत करीबी आंकड़े ने चुनाव के नतीजे को पूरी तरह से बदल दिया और हर कोई इस परिणाम को देखकर हैरान रह गया।
हालांकि, इस चुनावी जीत की कहानी केवल राजनीतिक आंकड़ों और अंकों के फेर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बेहद भावुक और आंखें नम कर देने वाली पारिवारिक पृष्ठभूमि जुड़ी हुई है। नवनिर्वाचित विजेता जगदीश प्रसाद की इस अत्यंत करीबी जीत के साथ उनकी दिवंगत मां की एक अमिट और भावनात्मक याद जुड़ गई है। जानकारी के अनुसार, उनकी बुजुर्ग मां ने मतदान के निर्धारित दिन अपने मताधिकार का पूरी निष्ठा से इस्तेमाल किया था और अपना वोट डाला था, लेकिन दुर्भाग्यवश मतदान संपन्न होने के ठीक अगले ही दिन उनका निधन हो गया। इस वजह से इस परिवार के लिए बेटे की एक वोट से मिली यह ऐतिहासिक जीत खुशी के साथ-साथ गहरे दुख, आत्मीय क्षति और भावुक पलों का एक ऐसा मिश्रण बन गई है, जिसे परिवार शायद ही कभी भुला पाएगा।
नदबई के वार्ड 6 के इस पूरे चुनावी रण में मुकाबला शुरू से ही बेहद संघर्षपूर्ण और कांटे की टक्कर वाला माना जा रहा था, लेकिन जब मतों की गिनती का काम पूरा हुआ तो परिणाम सचमुच चौंकाने वाला निकला। जैसे-जैसे एक-एक मत की गिनती आगे बढ़ रही थी, वैसे-वैसे दोनों प्रमुख प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की सांसें अटकी हुई थीं और धड़कनें तेज होती जा रही थीं। जब रिटर्निंग अधिकारियों ने अंतिम आंकड़े की घोषणा की, तो यह स्पष्ट हो गया कि निर्दलीय उम्मीदवार जगदीश प्रसाद 151 मत हासिल करके विजेता बन चुके हैं, जबकि उनके सामने खड़े भाजपा प्रत्याशी रामशरण को 150 मत मिले हैं। दोनों उम्मीदवारों के बीच हार-जीत का अंतर केवल एक वोट का था। राजनीति के जानकारों के अनुसार यह एक ऐसा न्यूनतम अंतर है, जिसमें एक भी वोट का इधर-उधर होना पूरे परिणाम की दिशा और दशा को पूरी तरह से पलट सकता था।
निर्दलीय प्रत्याशी जगदीश प्रसाद के लिए यह चुनावी विजय तब और अधिक भावुक और मर्मस्पर्शी हो गई, जब उन्हें यह अहसास हुआ कि उनके चुनाव जीतने के ठीक अगले ही दिन उनकी मां इस दुनिया को छोड़कर चली गईं। मतदान के दिन उनकी मां ने पोलिंग बूथ पर जाकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया था, लेकिन उसके अगले ही दिन उनके घर में मातम पसर गया। एक तरफ जहां चुनाव के नतीजों में बेटे के विजयी होने की खबर आई, वहीं दूसरी तरफ मां के अचानक निधन के गम ने पूरे परिवार को अंदर से झकझोर कर रख दिया। इस दोहरी स्थिति ने जीत की चमक को आंसुओं और गहरी संवेदनाओं से भर दिया, जिससे यह पूरा वाकया स्थानीय क्षेत्र में चर्चा का मुख्य विषय बन गया।
अब इस चुनाव परिणाम को लेकर इलाके में यह चर्चा आम हो गई है कि यह जीत वास्तव में मां के उस आखिरी वोट से जुड़ी हुई है। चूंकि जगदीश प्रसाद की जीत का अंतर केवल एक वोट था और उनकी मां ने मतदान के दिन अपना वोट डाला था, इसलिए स्थानीय लोग और सगे-संबंधी इस बात को बेहद भावुकता के साथ याद कर रहे हैं कि मां का आशीर्वाद और उनका डाला हुआ वोट इस जीत में निर्णायक साबित हुआ। हालांकि चुनावी नियमों के तहत गुप्त मतदान की गोपनीयता के कारण यह सार्वजनिक तौर पर नहीं कहा जा सकता कि किस विशिष्ट मतदाता ने किसे मत दिया था, लेकिन परिवार और आसपास के बाशिंदों के लिए यह अदभुत संयोग इस जीत को हमेशा के लिए एक यादगार और मार्मिक अध्याय बना गया है। 151 और 150 के बीच का यह फासला केवल चुनावी अंकों का खेल नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी जीवंत कहानी बन चुका है, जिसमें जीत का रोमांच और अपनों को हमेशा के लिए खोने का भारी गम एक साथ समाहित हैं।



















