एक दौर था जब राजस्थान का थार मरुस्थल सूखे और संसाधनों की भारी कमी के लिए जाना जाता था, लेकिन वक्त के साथ हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। आज यही रेगिस्तानी जमीन देश की ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा केंद्र बन चुकी है, जहां भारत का सबसे अधिक पेट्रोलियम निकाला जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे खास बात यह है कि तेल निकालने से लेकर उसे रिफाइन करने तक के जटिल कार्यों में देश की 130 से अधिक बेटियां बतौर इंजीनियर पूरी तन्मयता से जुटी हुई हैं।
विभिन्न तेल क्षेत्रों में संभाल रहीं कमान
बाड़मेर जिले के मंगला, भाग्यम, रागेश्वरी, सरस्वती, विजया, कामेश्वरी, वंदना, दुर्गा, ऐश्वर्या और शहीद तुकाराम ऑयल फील्ड में ये महिला इंजीनियर अपनी सेवाएं दे रही हैं। यहां पेट्रो केमिकल, मड, इलेक्ट्रिक, प्लांट मेंटेनेंस, मेकेनिकल, प्रोडक्शन और ड्रिलिंग जैसे तकनीकी विभागों में ये न केवल अपने दायित्वों को निभा रही हैं, बल्कि हर मोर्चे पर पुरुषों के साथ बराबरी से काम कर रही हैं।
जमीनी स्तर पर तकनीकी चुनौतियां
राजस्थान के केयर्न के आरजे साउथ गैस क्षेत्र में तैनात युवा ड्रिलिंग इंजीनियर मयंक कुमार उन ऊर्जा विशेषज्ञों में शामिल हैं जो जमीन के भीतर छिपे संसाधनों को देश की मुख्यधारा से जोड़ रहे हैं। ड्रिलिंग का काम करते वक्त उन्हें अक्सर अप्रत्याशित भूगर्भीय बदलावों और कठिन तकनीकी बाधाओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन उनकी टीम का मुख्य उद्देश्य घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।
ऑटोमेशन और आधुनिक तकनीक का प्रयोग
इसी क्रम में बाड़मेर के रागेश्वरी ऑयल फील्ड में तैनात युवा इंजीनियर प्रांजीत कलिता उन तकनीकी पेशेवरों में आते हैं जो ऑटोमेशन के जरिए ऊर्जा क्षेत्र की तस्वीर बदल रहे हैं। इंस्ट्रुमेंटेशन विभाग में काम संभालते हुए वे फील्ड इंस्ट्रुमेंटेशन, प्रोसेस ऑटोमेशन और कंट्रोल सिस्टम की बारीकियों पर काम करते हैं। उनका मानना है कि इस क्षेत्र से जुड़ने का सबसे बड़ा संतोष यह है कि यहां का हर तकनीकी काम सीधे तौर पर राष्ट्र निर्माण और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
वेदांता का मजबूत तकनीकी नेटवर्क
वेदांता ऑयल एंड गैस के अंतर्गत ड्रिलिंग, प्रोडक्शन, सबसर्फेस, मैकेनिकल, इंस्ट्रुमेंटेशन, डिजिटल, प्रोजेक्ट्स और एचएसई जैसे अहम क्षेत्रों में 650 से ज्यादा इंजीनियर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। रेगिस्तानी बियाबान इलाकों से लेकर देश के तटीय ऊर्जा ठिकानों तक, ये पेशेवर अत्याधुनिक तकनीकों की मदद से उत्पादन क्षमता को बढ़ाने, कामकाज को बेहतर बनाने और सुरक्षा मानकों को पूरी तरह से बनाए रखने का कार्य कर रहे हैं।
युवाओं और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
इस पूरी तकनीकी व्यवस्था की सबसे बड़ी खूबी इसकी युवा कार्यबल है, जहां 60 प्रतिशत से अधिक इंजीनियरों की उम्र 35 साल या उससे कम है। इसके अलावा तकनीकी पदों पर महिलाओं की बढ़ती तादाद इस इंडस्ट्री में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत दे रही है। सुरभि पुरोहित, पेट्रो केमिकल इंजीनियर रिचा सिन्हा और सुरुचि शर्मा जैसी 130 से ज्यादा महिला इंजीनियर उन तमाम बाधाओं को पार कर रही हैं और रेगिस्तान की रेतीली जमीन से देश के लिए ईंधन खींच रही हैं।



















