इंजीनियर्स डे पर राजनाथ सिंह ने देश के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को किया नमन, एम. विश्वेश्वरैया को दी श्रद्धांजलिवाराणसी में लोलार्क छठ की तैयारी, दो किलोमीटर लंबी बैरिकेडिंग और चार सौ पुलिसकर्मी संभालेंगे कमानशिमला के छह साल के शिवाक्ष रापटा ने इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जमाई धाक, 195 देशों के झंडे और नक्शे पहचानेमेघालय में सरकारी कर्मचारियों ने वेतन संशोधन की मांग उठाई, पांचवें वेतन आयोग पर अटके होने का उठाया मुद्दालॉरेंस बिश्नोई गैंग के मददगार कर्मवीर को दिल्ली एयरपोर्ट पर दबोचा, कनाडा से डिपोर्ट होने के बाद पंजाब पुलिस ने की कार्रवाईकच्चे तेल के बाजार में भारी उछाल, सऊदी अरब की पाइपलाइन पर हुए हमले से बढ़ी दुनिया की चिंतादिल्ली के पीजी और हॉस्टल्स पर मंडरा रहा बड़ा खतरा, 99 फीसदी इमारतों के पास नहीं है फायर एनओसीमेष, सिंह और धनु समेत चार राशियों के लिए मंगल गोचर 24 सितंबर 2026 से लाएगा बड़ा बदलावझारखंड पेपर लीक: जेपीएससी और जेएसएससी फर्जीवाड़े में शिवांगन कोचिंग का संचालक समेत दो गिरफ्तार, शिकंजे में 33 आरोपीमकर राशि में राहु गोचर: इस दिसंबर शनि की राशि में प्रवेश से इन तीन राशियों की चमकेगी किस्मत
अभियंता दिवस पर बाड़मेर के मरुस्थल में बेटियों का कमाल, तपती धूप में निकाल रहीं देश का काला सोनाराजस्थान
15 सित॰ 2026, 11:20 am (1 घंटे पहले)· 0

अभियंता दिवस पर बाड़मेर के मरुस्थल में बेटियों का कमाल, तपती धूप में निकाल रहीं देश का काला सोना

इंजीनियर्स डे के मौके पर बाड़मेर के रेगिस्तान में महिलाओं की बड़ी भूमिका सामने आई है, जहां 130 से अधिक बेटियां तेल और गैस उत्पादन में अहम जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

एक दौर था जब राजस्थान का थार मरुस्थल सूखे और संसाधनों की भारी कमी के लिए जाना जाता था, लेकिन वक्त के साथ हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। आज यही रेगिस्तानी जमीन देश की ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा केंद्र बन चुकी है, जहां भारत का सबसे अधिक पेट्रोलियम निकाला जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे खास बात यह है कि तेल निकालने से लेकर उसे रिफाइन करने तक के जटिल कार्यों में देश की 130 से अधिक बेटियां बतौर इंजीनियर पूरी तन्मयता से जुटी हुई हैं।

विभिन्न तेल क्षेत्रों में संभाल रहीं कमान

बाड़मेर जिले के मंगला, भाग्यम, रागेश्वरी, सरस्वती, विजया, कामेश्वरी, वंदना, दुर्गा, ऐश्वर्या और शहीद तुकाराम ऑयल फील्ड में ये महिला इंजीनियर अपनी सेवाएं दे रही हैं। यहां पेट्रो केमिकल, मड, इलेक्ट्रिक, प्लांट मेंटेनेंस, मेकेनिकल, प्रोडक्शन और ड्रिलिंग जैसे तकनीकी विभागों में ये न केवल अपने दायित्वों को निभा रही हैं, बल्कि हर मोर्चे पर पुरुषों के साथ बराबरी से काम कर रही हैं।

ये भी पढ़ें

जमीनी स्तर पर तकनीकी चुनौतियां

राजस्थान के केयर्न के आरजे साउथ गैस क्षेत्र में तैनात युवा ड्रिलिंग इंजीनियर मयंक कुमार उन ऊर्जा विशेषज्ञों में शामिल हैं जो जमीन के भीतर छिपे संसाधनों को देश की मुख्यधारा से जोड़ रहे हैं। ड्रिलिंग का काम करते वक्त उन्हें अक्सर अप्रत्याशित भूगर्भीय बदलावों और कठिन तकनीकी बाधाओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन उनकी टीम का मुख्य उद्देश्य घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।

ऑटोमेशन और आधुनिक तकनीक का प्रयोग

इसी क्रम में बाड़मेर के रागेश्वरी ऑयल फील्ड में तैनात युवा इंजीनियर प्रांजीत कलिता उन तकनीकी पेशेवरों में आते हैं जो ऑटोमेशन के जरिए ऊर्जा क्षेत्र की तस्वीर बदल रहे हैं। इंस्ट्रुमेंटेशन विभाग में काम संभालते हुए वे फील्ड इंस्ट्रुमेंटेशन, प्रोसेस ऑटोमेशन और कंट्रोल सिस्टम की बारीकियों पर काम करते हैं। उनका मानना है कि इस क्षेत्र से जुड़ने का सबसे बड़ा संतोष यह है कि यहां का हर तकनीकी काम सीधे तौर पर राष्ट्र निर्माण और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

वेदांता का मजबूत तकनीकी नेटवर्क

वेदांता ऑयल एंड गैस के अंतर्गत ड्रिलिंग, प्रोडक्शन, सबसर्फेस, मैकेनिकल, इंस्ट्रुमेंटेशन, डिजिटल, प्रोजेक्ट्स और एचएसई जैसे अहम क्षेत्रों में 650 से ज्यादा इंजीनियर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। रेगिस्तानी बियाबान इलाकों से लेकर देश के तटीय ऊर्जा ठिकानों तक, ये पेशेवर अत्याधुनिक तकनीकों की मदद से उत्पादन क्षमता को बढ़ाने, कामकाज को बेहतर बनाने और सुरक्षा मानकों को पूरी तरह से बनाए रखने का कार्य कर रहे हैं।

युवाओं और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

इस पूरी तकनीकी व्यवस्था की सबसे बड़ी खूबी इसकी युवा कार्यबल है, जहां 60 प्रतिशत से अधिक इंजीनियरों की उम्र 35 साल या उससे कम है। इसके अलावा तकनीकी पदों पर महिलाओं की बढ़ती तादाद इस इंडस्ट्री में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत दे रही है। सुरभि पुरोहित, पेट्रो केमिकल इंजीनियर रिचा सिन्हा और सुरुचि शर्मा जैसी 130 से ज्यादा महिला इंजीनियर उन तमाम बाधाओं को पार कर रही हैं और रेगिस्तान की रेतीली जमीन से देश के लिए ईंधन खींच रही हैं।

सवाल-जवाब

बाड़मेर के किन तेल क्षेत्रों में महिला इंजीनियर काम कर रही हैं?
महिला इंजीनियर मंगला, भाग्यम, रागेश्वरी, सरस्वती, विजया, कामेश्वरी, वंदना, दुर्गा, ऐश्वर्या और शहीद तुकाराम ऑयल फील्ड में तैनात हैं।
बाड़मेर में कुल कितनी महिला इंजीनियर काम कर रही हैं?
बाड़मेर के इन तेल क्षेत्रों में 130 से अधिक बेटियां इंजीनियर के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं।
वेदांता के कितने इंजीनियर विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं?
वेदांता ऑयल एंड गैस के 650 से अधिक इंजीनियर ड्रिलिंग, प्रोडक्शन और अन्य तकनीकी विभागों में कार्यरत हैं।
वेदांता के इंजीनियरों में युवाओं का प्रतिशत कितना है?
वेदांता के तकनीकी कार्यबल में 60 प्रतिशत से अधिक इंजीनियर 35 वर्ष या उससे कम आयु वर्ग के हैं।
रागेश्वरी ऑयल फील्ड में प्रांजीत कलिता क्या कार्य संभालते हैं?
प्रांजीत कलिता इंस्ट्रुमेंटेशन विभाग में फील्ड इंस्ट्रुमेंटेशन, प्रोसेस ऑटोमेशन और कंट्रोल सिस्टम से जुड़े कार्य संभालते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR