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भीलवाड़ा कृषि उपज मंडी में बढ़ी फसलों की आवक, कम बारिश और कम भाव से अन्नदाता परेशानराजस्थान
26 अक्तू॰ 2026, 6:36 pm (3 घंटे पहले)· 1

भीलवाड़ा कृषि उपज मंडी में बढ़ी फसलों की आवक, कम बारिश और कम भाव से अन्नदाता परेशान

भीलवाड़ा की कृषि उपज मंडी में इन दिनों फसलों की आवक जोरों पर है, लेकिन इस बार कम बारिश और बाजार में कम भाव मिलने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

भीलवाड़ा की प्रमुख कृषि उपज मंडी में इन दिनों विभिन्न प्रकार की कृषि उपजों की भारी आवक देखने को मिल रही है। वर्तमान में इस मंडी के भीतर प्रतिदिन लगभग 500 से 600 बोरियों तक की पहुंच दर्ज की जा रही है। इसके बावजूद स्थानीय अन्नदाताओं के हाथ मायूसियां लग रही हैं, क्योंकि उन्हें अपनी मेहनत के एवज में बाजार से वाजिब मूल्य प्राप्त नहीं हो पा रहे हैं। इस कृषि सीजन के दौरान मानसून सत्र में न्यून वर्षा होने तथा मौसम के मिजाज में बार-बार आए उतार-चढ़ाव ने उत्पादकता को गहरा आघात पहुंचाया है। इसके अलावा पिछले वर्ष की समान अवधि के आंकड़ों से तुलना की जाए तो इस बार कई प्रमुख कृषि जिंसों के दाम काफी नीचे चल रहे हैं, जिससे किसानों की माली हालत कमजोर होती जा रही है।

खेती की बढ़ती लागत और मंडियों में मंदी का दोतरफा दबाव

क्षेत्र के कृषकों का स्पष्ट रूप से कहना है कि कृषि कार्यों के संचालन में आने वाला खर्च लगातार ऊपर चढ़ता जा रहा है। बुवाई के लिए उत्तम किस्म के बीज, खेतों में डालने वाले उर्वरक, फसल सुरक्षा के लिए कीटनाशक दवाइयां और कटाई-बुआई के समय मजदूरों की मजदूरी में लगातार इजाफा हुआ है। इसके बावजूद जब वे पसीना बहाकर तैयार की गई अपनी फसल को बेचने के लिए मंडी के प्रांगण में पहुंचते हैं, तो उन्हें उम्मीद के विपरीत बहुत कम दाम थमा दिए जाते हैं। ऐसी विषम परिस्थितियों में किसानों के लिए अपनी खेती में लगा हुआ मूलधन निकालना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। एक तरफ प्रकृति की बेरुखी और दूसरी तरफ खुले बाजार में कम कीमत मिलने की दोहरी मार ने किसानों की चिंताओं को कई गुना बढ़ा दिया है।

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भीलवाड़ा कृषि उपज मंडी में फसलों के ताजा दाम

भीलवाड़ा की इस अधिकृत मंडी के भीतर विभिन्न अनाजों और तिलहनों के भावों पर यदि नजर डाली जाए तो कई तरह के आंकड़े सामने आते हैं। मंडी में गेहूं की बिक्री 2631 रुपए से लेकर 2703 रुपए प्रति क्विंटल के दायरे में दर्ज की गई। इसके अलावा हाइब्रिड मक्का के भाव 2651 से 2661 रुपए, मूंगफली के 5000 से 5010 रुपए और साबुत चना दाल के दाम 5750 से 6195 रुपए प्रति क्विंटल तक रहे। मंडियों में देसी लाल मक्का 2904 से 2914 रुपए प्रति क्विंटल, सरसों 7200 से 7210 रुपए, ज्वार 2000 से 2010 रुपए और जौ 2125 से 2135 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बिकती नजर आई। ग्वार का कारोबार 5950 से 5960 रुपए, साबुत उड़द यानी काली दाल 8000 से 8910 रुपए, सोयाबीन 4200 से 4210 रुपए, साबुत मूंग दाल 8505 से 8515 रुपए और देसी सफेद मक्का के दाम 2010 से 2110 रुपए प्रति क्विंटल के बीच दर्ज किए गए।

किसानों का दर्द और आसींद क्षेत्र के हालात

भीलवाड़ा जिले के आसींद इलाके के निवासी किसान नारायण लाल ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि इस वर्ष जलवायु की अनियमितता ने उनकी फसल के उत्पादन और उसकी गुणवत्ता दोनों को ही बुरी तरह प्रभावित किया है। जब वे अपनी उपज को लेकर मंडी पहुंचते हैं, तो पिछले साल की भांति संतोषजनक दाम बिल्कुल नहीं मिल रहे हैं। किसान ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, "खेती में बीज, खाद, दवाई और मजदूरी का खर्च लगातार बढ़ रहा है।" फसल को उगाने और पकाने में महीनों की कड़ी मेहनत लगती है, किंतु बाजार में उचित मूल्यांकन न मिलने के कारण लागत वसूलना भी असंभव सा प्रतीत होने लगा है।

बारिश की कमी और भविष्य की उम्मीदें

मानसून के दौरान अपर्याप्त वर्षा होने से फसलों को शुरुआती दौर में ही बड़ा झटका लग चुका था। यदि ऐसे कठिन दौर में उत्पादित माल के उचित दाम भी किसानों के हाथ न लगें, तो उनकी आर्थिक रीढ़ पूरी तरह से चरमरा जाएगी। अन्नदाता यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि आने वाले दिनों में जिंसों के बाजार भाव में कुछ सुधार देखने को मिलेगा, जिससे उन्हें थोड़ी बहुत राहत नसीब हो सकेगी। फिलहाल भीलवाड़ा की इस मंडी में फसलों की आवक का सिलसिला बदस्तूर जारी है, लेकिन लाभकारी मूल्यों के अभाव में किसान वर्ग गहरे मानसिक तनाव में जीवन गुजार रहा है। किसानों की एकमात्र प्रमुख मांग यही है कि उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन या लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया जाए, ताकि वे खेती के भारी-भरकम खर्चों की भरपाई कर सकें और अपनी कठिन मेहनत का वास्तविक प्रतिफल प्राप्त कर पाएं।

सवाल-जवाब

भीलवाड़ा कृषि उपज मंडी में रोजाना कितनी बोरियां पहुंच रही हैं?
भीलवाड़ा मंडी में इन दिनों प्रतिदिन करीब 500 से 600 बोरियां फसल पहुंच रही हैं।
भीलवाड़ा मंडी में गेहूं के भाव क्या रहे?
मंडी में गेहूं के भाव 2631 से 2703 रुपए प्रति क्विंटल के बीच दर्ज किए गए।
किसानों को किन कारणों से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है?
कम बारिश, मौसम के उतार-चढ़ाव और पिछले साल के मुकाबले इस बार फसल के कम दाम मिलने से किसानों को नुकसान हो रहा है।
आसींद क्षेत्र के किस किसान ने अपनी परेशानी साझा की?
आसींद क्षेत्र के रहने वाले किसान नारायण लाल ने अपनी फसल के कम भाव मिलने की परेशानी साझा की।
मंडी में सरसों के भाव कितने दर्ज किए गए?
भीलवाड़ा मंडी में सरसों के भाव 7200 से 7210 रुपए प्रति क्विंटल रहे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 घंटे पहले

पिछले साल जब मैं आसींद गया था, तब भी नारायण लाल जैसे किसानों को फसल के पूरे दाम न मिलने की टीस साफ दिख रही थी। प्रकृति की मार और बाजार का कम भाव वाकई अन्नदाता की कमर तोड़ देता है।

Ravikash Gupta@ravikash·1 घंटे पहले

अर्जुन, बिल्कुल सही कहा। मौसम और कम भाव की मार हर साल किसानों को झेलनी पड़ती है, फिर भी कोई ठोस समाधान क्यों नहीं निकलता?

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

भीलवाड़ा के इन किसानों की लागत ही नहीं निकल रही है, तो इनका अगला सीजन कैसे कटेगा?

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करण भाई, लागत न निकलने वाली बात ठीक है, पर मंडी में रोज़ 600 बोरियां आ रही हैं तो कुछ तो कमाई हो रही होगी।

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