आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर मनाए जाने वाले शरद पूर्णिमा पर्व का सनातन परंपरा में खास महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान इसी पावन तिथि पर धन की देवी माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इस विशेष अवसर पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से घर-परिवार में सुख और समृद्धि का वास होता है। दिवाली से ठीक पहले आने वाली यह तिथि मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का बहुत ही उत्तम समय मानी जाती है। ज्योतिष शास्त्र में कुछ ऐसे विशेष अनुष्ठानों और उपायों का जिक्र किया गया है जिन्हें इस रात्रि करने से सोया हुआ भाग्य भी जाग जाता है.
नारद पुराण के अनुसार रात का महत्व
ऐसी मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात्रि को माता लक्ष्मी पृथ्वी लोक का भ्रमण करती हैं और घरों में प्रवेश करती हैं। इस खास रात को सफेद वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त आराधना करनी चाहिए। इसके अलावा, कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना और ओम श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का एक सौ आठ बार जाप करने से घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती है। इस रात केसर मिलाई हुई खीर तैयार कर उसे चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा है, जिसे बाद में प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से स्वास्थ्य उत्तम रहता है और समृद्धि बढ़ती है.
कौड़ियों और कमलगट्टे का अचूक उपाय
माता लक्ष्मी को समर्पित इस रात्रि की पूजा के दौरान ग्यारह कौड़ियों पर हल्दी या केसर का तिलक अवश्य लगाएं। इन सभी कौड़ियों को मां लक्ष्मी के चरणों के पास रखकर रात भर जागरण करना चाहिए और कमलगट्टे की माला से उनके मंत्रों का जाप करना उचित रहता है। पूजा संपन्न होने के बाद अगले दिन इन कौड़ियों को एक लाल रंग के कपड़े में बांधकर घर की तिजोरी या धन रखने वाले सुरक्षित स्थान पर रख देना चाहिए। धार्मिक विश्वास के अनुसार इस उपाय को करने से साधक के जीवन में कभी भी धन का अभाव नहीं होता है और बरकत बनी रहती है.
वैवाहिक जीवन की बाधाएं दूर करने के उपाय
यदि किसी दंपती के वैवाहिक जीवन में लगातार मनमुटाव या अन्य परेशानियां चल रही हैं, तो वे चंद्रमा को दूध का अर्घ्य देकर इस दोष को शांत कर सकते हैं। अर्घ्य प्रदान करते समय ओम सों सोमाय नमः मंत्र का एक सौ आठ बार या अपनी श्रद्धा के अनुसार जाप करना लाभकारी होता है। इस प्रक्रिया से चंद्र ग्रह के नकारात्मक प्रभाव में कमी आती है और आपसी रिश्ते मजबूत होते हैं। इसके अलावा, इस पावन दिन पर पीपल के पेड़ की पूजा करना और किसी भी लक्ष्मी मंदिर में जाकर नारियल, सूखे मेवे तथा लाल चुनरी अर्पित करने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
पूर्णिमा पर कोजागर व्रत का विशेष विधान
पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम जैसे राज्यों में इस तिथि पर कोजागर व्रत का बड़ा महत्व है, जिसे कई स्थानों पर कोजागरी पूजा, बंगाली लक्ष्मी पूजा या कौमुदी व्रत के रूप में भी मनाया जाता है। इस पूरी रात जागकर माता लक्ष्मी के विशेष मंत्र ओम श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः का उच्चारण करना चाहिए। इस दौरान श्रीसूक्त और कनकधारा स्तोत्र का पाठ भी किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस रात्रि जो भक्त जागकर आराधना करते हैं, मां लक्ष्मी उनके भंडार हमेशा धन-धान्य से भरे रखती हैं.
स्कंद पुराण में वर्णित लाभ और मानसिक शांति
स्कंद पुराण के अनुसार यह व्रत मनुष्य को ऐश्वर्य, उत्तम स्वास्थ्य और असीम सुख प्रदान करने वाला होता है। इस दिन रात्रि जागरण करने वाले भक्त मां लक्ष्मी की विशेष आराधना करते हैं और कई तरह के अनुष्ठान संपन्न करते हैं। ज्योतिष और अध्यात्म दोनों ही दृष्टियों से इस तिथि का योग बेहद खास माना गया है। चंद्रमा की पूजा करने और व्रत का पालन करने से न केवल मानसिक शांति की प्राप्ति होती है, बल्कि व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव भी आने लगते हैं.



















