कोटा के रंगबाड़ी क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में शरद पूर्णिमा के पावन पर्व पर आस्था और उल्लास का अनूठा माहौल दिखाई दिया। इस खास मौके पर मंदिर परिसर को भव्य तरीके से सजाया गया था और ठाकुर जी ने श्वेत वस्त्र धारण कर भक्तों को अपने दिव्य स्वरूप के दर्शन दिए। सफेद बंगले में विराजमान बांके बिहारी का यह मनमोहक रूप देखने के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं और पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा।
मंदिर से जुड़े राजेंद्र खंडेलवाल ने इस आयोजन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि शरद पूर्णिमा का दिन इस मंदिर के लिए बेहद खास होता है क्योंकि इसी दिन ठाकुर श्री बांके बिहारी जी अपने हाथों में बंशी धारण करते हैं। पूरे साल में केवल यह एक ही ऐसा दिन होता है जब भक्तों को ठाकुर जी के इस विशिष्ट रूप के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। इस विशेष अवसर पर भगवान का श्रृंगार पूरी तरह से सफेद कपड़ों और चांदी के चमचमाते गहनों से किया जाता है, जिससे सफेद बंगले में उनकी छटा देखते ही बनती है।
साढ़े तीन किलो चांदी के गहनों से हुआ मनमोहक श्रृंगार
शरद पूर्णिमा के उत्सव के दौरान ठाकुर जी को कुल लगभग साढ़े तीन किलो चांदी से बने अनूठे आभूषण पहनाए गए थे। इन आभूषणों में मुख्य रूप से सवा किलो चांदी का भव्य मुकुट, करीब 325 ग्राम वजन की चांदी की बंशी, 250 ग्राम का कमरबंद और सवा सौ ग्राम की पायजेब शामिल थी। इसके अलावा पारंपरिक रूप से ठाकुर जी स्वर्ण आभूषणों के तहत कड़े और नथनी भी धारण करते हैं। इन सभी कीमती और सुंदर गहनों से सजे भगवान के दर्शन करने के लिए पूरे दिन भक्तों का तांता लगा रहा।
हरिनाम संकीर्तन परिक्रमा और विशेष अनुष्ठान
राजेंद्र खंडेलवाल ने आगे बताया कि इस मंदिर में वर्ष 2010 में ठाकुर जी की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी और तब से लेकर अब तक हर महीने नियमित रूप से हरिनाम संकीर्तन परिक्रमा निकाली जाती है। शरद पूर्णिमा के दिन भी सुबह ठीक 6:30 बजे रंगबाड़ी के विभिन्न स्थानीय मार्गों से हरिनाम संकीर्तन यात्रा निकाली गई, जो विभिन्न रास्तों से होती हुई वापस मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई। इसके ठीक बाद सुबह 7:30 बजे से भक्तों के लिए ठाकुर जी के विशेष दर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया, जो शाम तक जारी रहा और बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
भजन संध्या, महारास और अमृत खीर का प्रसाद
पर्व की रात को विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसमें रात 9 बजे से 12 बजे तक भव्य भजन संध्या और महारास का भव्य आयोजन हुआ। एलन के डायरेक्टर गोविंद माहेश्वरी के सानिध्य में संपन्न हुए इस धार्मिक कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्ति संगीत और रस का जमकर आनंद लिया। रात्रि के बारह बजने के बाद भक्तों के बीच विशेष अमृत खीर का प्रसाद वितरित किया गया, जिसका शरद पूर्णिमा के धार्मिक अनुष्ठानों में बहुत अधिक महत्व माना जाता है।
भक्तों के लिए आस्था का दूसरा वृंदावन
मंदिर समिति के राजेंद्र खंडेलवाल का कहना है कि रंगबाड़ी का यह बांके बिहारी मंदिर देश भर के कृष्ण भक्तों के लिए गहरी आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है। यहां वैसे तो आम दिनों में भी रोजाना श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन शरद पूर्णिमा के दिन बंशी धारण किए हुए ठाकुर जी के दुर्लभ स्वरूप का दर्शन करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मनमोहक श्रृंगार, नियमित आरती और गूंजते भजनों के बीच मंदिर का पूरा माहौल कृष्णमय नजर आया और श्रद्धालुओं ने इसे किसी दूसरे वृंदावन जैसा दिव्य अनुभव बताया।




















