दीपावली का पावन त्योहार जैसे-जैसे पास आ रहा है, वैसे-वैसे बाजारों की रौनक और चमक लगातार बढ़ती जा रही है। अपने घरों को रोशन करने के लिए लोगों ने अभी से ही जमकर खरीदारी शुरू कर दी है। इस त्योहारी सीजन में भरतपुर के स्थानीय बाजारों में मिट्टी के पारंपरिक दीये बनाने वाले कुंभकारों के यहां कामकाज ने पूरी रफ्तार पकड़ ली है। भरतपुर में इस बार पारंपरिक दीपकों के साथ-साथ विशेष स्टैंड वाले बेहद आकर्षक डिजाइनर दीपक लोगों के बीच मुख्य आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। ग्राहकों की बदलती पसंद और आधुनिक रुझान को ध्यान में रखते हुए कुंभकार और कारीगर मिट्टी के नए और अनूठे पैटर्न तैयार करने में पूरी शिद्दत से जुटे हुए हैं। दीपावली के खास मौके पर मिट्टी के दीये जलाने की प्राचीन परंपरा सदियों से हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा रही है। इसी पुरानी परंपरा को आधुनिकता के साथ आगे बढ़ाते हुए कुंभकार अपने हुनरमंद हाथों से एक से बढ़कर एक सुंदर और मनमोहक दीये गढ़ रहे हैं।
बाजार में बढ़ी स्टैंड वाले दीपकों की मांग
इस बार के त्योहारी बाजार में सामान्य गोल दीपकों के अलावा पैरों या स्टैंड वाले दीपकों की भारी मांग दर्ज की जा रही है। इन खास दीपकों का डिजाइन बिल्कुल अलग और अनोखा होने के कारण ग्राहक इन्हें खरीदने में खासी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। दीपावली के इस उल्लासपूर्ण अवसर पर लोग अपने घरों के कमरों, मुख्य आंगन और पूजा स्थलों को सजाने के लिए ऐसे विशेष दीयों को प्राथमिकता दे रहे हैं। ये डिजाइनर दीये देखने में जितने सुंदर और कलात्मक हैं, उतनी ही आसानी से घर की साज-सज्जा को बेहद खास और भव्य बना देते हैं। कुंभकार सोहन सिंह ने बातचीत के दौरान बताया कि दीपावली का पर्व जैसे-जैसे करीब आ रहा है, दीये तैयार करने की हमारी रफ्तार कई गुना तेज हो गई है। इस मर्तबा बाजार में स्टैंड वाले दीयों की डिमांड सबसे ज्यादा है, क्योंकि त्योहार के इस खास मौके पर लोग कुछ बिल्कुल नया और हटकर खरीदना पसंद कर रहे हैं। ग्राहकों की इसी खास पसंद और मांग को देखते हुए कार्यशालाओं में विभिन्न प्रकार के सुंदर डिजाइन गढ़े जा रहे हैं, ताकि खरीदारों को बाजार में खरीदारी के लिए बेहतरीन विकल्प मिल सकें।
दीपक की कीमतें और कुंभकारों की मेहनत
कारीगरों के अनुसार इन विशेष स्टैंड वाले दीपकों की शुरुआती कीमत 30 रुपये से शुरू होकर 50 रुपये तक पहुंच जाती है। दीये की यह कीमत पूरी तरह से उसकी बनावट, जटिल डिजाइन और आकार के आधार पर तय होती है। अपनी किफायती कीमत और अत्यधिक आकर्षक बनावट के कारण ये मिट्टी के दीये ग्राहकों को अपनी ओर तेजी से खींच रहे हैं। दीपावली के इस बड़े त्योहार को देखते हुए सभी स्थानीय कुंभकारों को पूरी उम्मीद है कि आने वाले दिनों में दीयों की बिक्री और खरीदारी में और भी ज्यादा उछाल आएगा। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए मिट्टी के दीये बनाने वाले मेहनतकश कारीगर दिन और रात बिना रुके अपनी कला को आकार दे रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य यही है कि त्योहारी सीजन की मांग को समय रहते पूरी तरह से पूरा किया जा सके। इस बार बाजार में सजे ये स्टैंड वाले दीपक हर किसी के लिए मुख्य आकर्षण का विषय बने हुए हैं।



















