भीलवाड़ा जिला कारागार में रक्षाबंधन के पावन अवसर पर अत्यंत संवेदनशील और भावुक दृश्य देखने को मिला। त्यौहार के आते ही दूर-सुदूर क्षेत्रों से बहनों के कदम अपने भाइयों से मिलने के लिए भीलवाड़ा जेल की ओर बढ़ चले। अपने भाइयों की कलाई पर स्नेह और अटूट विश्वास का धागा बांधने की तड़प के आगे दूरी और परिस्थितियां बेअसर साबित हुईं। भाई भले ही अपने अतीत के कर्मों और कानून की पाबंदियों के कारण जेल की ऊंची दीवारों तथा लोहे की कठोर सलाखों के पीछे दिन बिता रहे हों, लेकिन बहनों के अटूट प्रेम और बहन के फर्ज में कोई कमी नहीं आई। हाथों में रक्षासूत्र की थाली, आंखों में मिलने की उत्सुकता और हृदय में भाइयों के सुरक्षित तथा उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना लेकर पहुंची बहनों ने इस दिन को खास बना दिया।
मुलाकात के दौरान छलके खुशी और दर्द के आंसू
जेल के मुलाकात कक्ष में जब बहनों को अपने भाइयों के सामने जाने और उनकी कलाई पर राखी बांधने का अवसर मिला, तो पूरा वातावरण अत्यधिक भावुक हो उठा। वहां मौजूद कई बहनों की आंखों से जहां लंबे समय बाद भाई को देखने की खुशी के आंसू बह रहे थे, वहीं भाइयों द्वारा किए गए अपराधों और उनके कारावास की पीड़ा भी उनके मन को कचोट रही थी। इस परस्पर विरोधी भावनाओं के बीच भी भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की डोर पूरी मजबूती के साथ नजर आई। रक्षाबंधन के इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि निश्छल प्रेम किसी भी भौगोलिक या कानूनी परिस्थिति का मोहताज नहीं होता। रक्षासूत्र बांधते समय बहनों ने अपने भाइयों से केवल अपनी रक्षा का ही नहीं, बल्कि अपराध का रास्ता सदा के लिए छोड़कर एक सम्मानित और बेहतर जीवन की ओर कदम बढ़ाने की उम्मीद भी व्यक्त की।
जेल प्रशासन के सुरक्षा प्रबंध और सामाजिक पुनर्वास का उद्देश्य
इस पावन पर्व को हर्षोल्लास और शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित करने के लिए जिला कारागार में व्यापक और विशेष तैयारियां की गई थीं। जिला अधीक्षक शैलेंद्र सिंह ने इस संबंध में बताया कि रक्षाबंधन के उपलक्ष्य में जेल में बंद सभी कैदियों को उनकी बहनों से राखी बंधवाने के लिए सुव्यवस्थित प्रबंध किए गए हैं। सुरक्षा के मानकों का कड़ाई से पालन करते हुए बहनों के आने, मिलने और राखी बांधने की प्रक्रिया को सुचारू बनाया गया। उन्होंने इस पहल के व्यापक दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए कहा, "इस आयोजन का मुख्य संदेश यही है कि बंदी जेल से बाहर निकलने के बाद समाज में पुनः स्थापित हों और अपराध का मार्ग छोड़ दें।" जेल प्रशासन की यह मंशा है कि बंदी अपनी सजा पूरी करने के बाद एक नए और बेहतर जीवन का शुभारंभ करें तथा भविष्य में कभी भी जेल की चौखट तक न लौटें।





















