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भीलवाड़ा जेल में रक्षाबंधन पर बहनों ने बांधी राखी, भाइयों से लिया अपराध छोड़ने का संकल्पराजस्थान
28 अग॰ 2026, 4:09 pm (1 घंटे पहले)· 2

भीलवाड़ा जेल में रक्षाबंधन पर बहनों ने बांधी राखी, भाइयों से लिया अपराध छोड़ने का संकल्प

रक्षाबंधन के पावन पर्व पर भीलवाड़ा जेल में भावुक कर देने वाले दृश्य दिखाई दिए, जहां दूर-दराज से आई बहनों ने सलाखों के पीछे बंद अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा और उनसे अपराध की राह छोड़ने का वचन लिया।

भीलवाड़ा जिला कारागार में रक्षाबंधन के पावन अवसर पर अत्यंत संवेदनशील और भावुक दृश्य देखने को मिला। त्यौहार के आते ही दूर-सुदूर क्षेत्रों से बहनों के कदम अपने भाइयों से मिलने के लिए भीलवाड़ा जेल की ओर बढ़ चले। अपने भाइयों की कलाई पर स्नेह और अटूट विश्वास का धागा बांधने की तड़प के आगे दूरी और परिस्थितियां बेअसर साबित हुईं। भाई भले ही अपने अतीत के कर्मों और कानून की पाबंदियों के कारण जेल की ऊंची दीवारों तथा लोहे की कठोर सलाखों के पीछे दिन बिता रहे हों, लेकिन बहनों के अटूट प्रेम और बहन के फर्ज में कोई कमी नहीं आई। हाथों में रक्षासूत्र की थाली, आंखों में मिलने की उत्सुकता और हृदय में भाइयों के सुरक्षित तथा उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना लेकर पहुंची बहनों ने इस दिन को खास बना दिया।

मुलाकात के दौरान छलके खुशी और दर्द के आंसू

जेल के मुलाकात कक्ष में जब बहनों को अपने भाइयों के सामने जाने और उनकी कलाई पर राखी बांधने का अवसर मिला, तो पूरा वातावरण अत्यधिक भावुक हो उठा। वहां मौजूद कई बहनों की आंखों से जहां लंबे समय बाद भाई को देखने की खुशी के आंसू बह रहे थे, वहीं भाइयों द्वारा किए गए अपराधों और उनके कारावास की पीड़ा भी उनके मन को कचोट रही थी। इस परस्पर विरोधी भावनाओं के बीच भी भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की डोर पूरी मजबूती के साथ नजर आई। रक्षाबंधन के इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि निश्छल प्रेम किसी भी भौगोलिक या कानूनी परिस्थिति का मोहताज नहीं होता। रक्षासूत्र बांधते समय बहनों ने अपने भाइयों से केवल अपनी रक्षा का ही नहीं, बल्कि अपराध का रास्ता सदा के लिए छोड़कर एक सम्मानित और बेहतर जीवन की ओर कदम बढ़ाने की उम्मीद भी व्यक्त की।

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जेल प्रशासन के सुरक्षा प्रबंध और सामाजिक पुनर्वास का उद्देश्य

इस पावन पर्व को हर्षोल्लास और शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित करने के लिए जिला कारागार में व्यापक और विशेष तैयारियां की गई थीं। जिला अधीक्षक शैलेंद्र सिंह ने इस संबंध में बताया कि रक्षाबंधन के उपलक्ष्य में जेल में बंद सभी कैदियों को उनकी बहनों से राखी बंधवाने के लिए सुव्यवस्थित प्रबंध किए गए हैं। सुरक्षा के मानकों का कड़ाई से पालन करते हुए बहनों के आने, मिलने और राखी बांधने की प्रक्रिया को सुचारू बनाया गया। उन्होंने इस पहल के व्यापक दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए कहा, "इस आयोजन का मुख्य संदेश यही है कि बंदी जेल से बाहर निकलने के बाद समाज में पुनः स्थापित हों और अपराध का मार्ग छोड़ दें।" जेल प्रशासन की यह मंशा है कि बंदी अपनी सजा पूरी करने के बाद एक नए और बेहतर जीवन का शुभारंभ करें तथा भविष्य में कभी भी जेल की चौखट तक न लौटें।

सवाल-जवाब

रक्षाबंधन पर भीलवाड़ा जेल में क्या विशेष कार्यक्रम हुआ?
भीलवाड़ा जिला जेल में रक्षाबंधन पर दूर-दराज से आई बहनों को अपने कैदी भाइयों की कलाई पर राखी बांधने की विशेष अनुमति और सुविधा दी गई।
जेल प्रशासन ने राखी बांधने के लिए क्या व्यवस्थाएं की थीं?
जिला अधीक्षक शैलेंद्र सिंह के अनुसार, सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए बहनों की मुलाकात और राखी बांधने के लिए विशेष प्रबंध किए गए।
बहनों ने भाइयों से क्या वचन मांगा?
बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधने के साथ ही उनसे अपराध की राह छोड़कर एक बेहतर और सम्मानित जीवन जीने की उम्मीद जताई।
जेल अधीक्षक शैलेंद्र सिंह के अनुसार इस आयोजन का मुख्य संदेश क्या है?
उन्होंने बताया कि इसका मुख्य संदेश कैदियों को सजा के बाद समाज में पुनः स्थापित करना और उन्हें दोबारा अपराध की राह पर जाने से रोकना है।
क्या जेल में मुलाकात के समय सुरक्षा नियमों का पालन किया गया?
हां, जिला कारागार में बहनों की मुलाकात और त्यौहार मनाने की पूरी प्रक्रिया सख्त सुरक्षा व्यवस्था के तहत संपन्न कराई गई।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·56 मिनट पहले

भीलवाड़ा जेल का यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक पर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुधार गृहों की उस बदलती प्रशासनिक सोच को दर्शाता है जहाँ कैदियों के सामाजिक पुनर्वास पर जोर दिया जा रहा है। परिवार के भावनात्मक जुड़ाव का यह सकारात्मक प्रभाव बंदियों की मानसिकता में बदलाव लाकर भविष्य में अपराध से दूर रहने में मददगार साबित हो सकता है, बशर्ते रिहाई के बाद उन्हें रोजगार और समाज में मुख्यधारा से जोड़ने के पुख्ता अवसर मिल सकें।

Karan Malhotra@karan-malhotra·55 मिनट पहले

यह घटना सुधार गृहों की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, लेकिन हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली में यह भी देखना होगा कि क्या सजा पूरी होने के बाद इन बंदियों के सामाजिक पुनर्वास की कोई ठोस कार्ययोजना मौजूद है या नहीं। यदि जेल प्रशासन इस प्रकार के भावनात्मक आयोजनों को सुधारात्मक कार्यक्रमों और कौशल विकास से जोड़े, तो recidivism यानी अपराध की पुनरावृत्ति की दर को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

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