भरतपुर स्थित प्रसिद्ध बिहारी जी मंदिर में रक्षाबंधन के पावन अवसर पर श्रद्धा, विश्वास और अटूट आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है। इस ऐतिहासिक मंदिर में भक्त केवल दर्शन के लिए नहीं आते, बल्कि भगवान बिहारी जी को अपने सगे भाई का दर्जा देकर रक्षासूत्र बांधते हैं। मंदिर की यह अनूठी परंपरा और श्रद्धालुओं का गहरा भावनात्मक जुड़ाव केवल स्थानीय क्षेत्र या राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि सात समंदर पार तक फैला हुआ है। दूर-दराज के देशों में बसे प्रवासी भारतीय भी रक्षाबंधन के दिन भगवान बिहारी जी को याद करना और उन्हें अपना रक्षक मानना नहीं भूलते हैं।
विदेशों से डाक के जरिए पहुंचती हैं राखियां
रक्षाबंधन का त्यौहार आते ही भरतपुर के बिहारी जी मंदिर के पते पर देश के कोने-कोने के साथ-साथ विदेशों से भी लिफाफे पहुंचने शुरू हो जाते हैं। अमेरिका, कनाडा और अफ्रीका जैसे देशों में रहने वाले भक्त अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए विशेष रूप से तैयार की गई राखियां डाक और अंतरराष्ट्रीय कूरियर सेवाओं के जरिए भेजते हैं। हजारों किलोमीटर दूर रहने के बावजूद इन श्रद्धालुओं के दिल में भगवान बिहारी जी के प्रति भाई का भाव हमेशा जीवंत रहता है। जब ये राखियां मंदिर परिसर में पहुंचती हैं, तो मंदिर के पुजारी पूरे विधि-विधान, संकल्प और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ इन सभी रक्षासूत्रों को भगवान बिहारी जी की प्रतिमा पर अर्पित करते हैं।
20 वर्षों की तपस्या और अफ्रीका के परिवार की भावुक कहानी
इस मंदिर से जुड़ी अनगिनत कहानियां और चमत्कार भक्तों के मुख से सुनने को मिलते हैं। ऐसा ही एक बेहद भावुक और प्रेरक प्रसंग अफ्रीका में निवास कर रहे भरतपुर मूल के एक परिवार का है। यह परिवार पिछले लगभग 20 वर्षों से संतान सुख के लिए तरस रहा था और लगातार प्रार्थना कर रहा था। दो दशकों के लंबे इंतजार के बाद जब उनके घर में किलकारी गूंजी, तो पूरे परिवार ने इसे भगवान बिहारी जी की असीम कृपा और आशीर्वाद का प्रतिफल माना। अपनी इस मनोकामना के पूर्ण होने पर परिवार की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर यह परिवार अफ्रीका से सीधे भरतपुर पहुंचा। उन्होंने भगवान बिहारी जी को विशेष रूप से तैयार कराई गई सुंदर पोशाक धारण कराई और अत्यंत भावुक होकर भगवान को राखी बांधी।
अर्जियों, नारियल और पूजन सामग्री के साथ जुड़ती है आस्था
बिहारी जी मंदिर की एक और बड़ी विशेषता यह है कि यहां श्रद्धालु केवल राखियां ही नहीं भेजते, बल्कि अपनी विविध मनोकामनाओं से भरी लिखित अर्जियां भी डाक से भेजते हैं। भक्त अपनी समस्याओं, इच्छाओं और पारिवारिक सुख-शांति की प्रार्थना पत्र के रूप में लिखकर भेजते हैं। इन अर्जियों के साथ श्रीफल यानी नारियल और पूजन की अन्य आवश्यक सामग्रियां भी भेजी जाती हैं। मंदिर के पुजारी इन अर्जियों और पूजन सामग्री को भगवान के चरणों में समर्पित करके भक्तों की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। जब श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं, तो वे स्वयं मंदिर आकर भगवान का धन्यवाद करते हैं और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन करवाते हैं। इस प्रकार यह मंदिर पूरी दुनिया में फैले भक्तों की आस्था का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है।



















