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रक्षाबंधन पर श्रीगंगानगर में अनोखा सामाजिक अभियान, बहनों से राखी बंधवाकर भाइयों ने ली नशा मुक्ति की शपथराजस्थान
28 अग॰ 2026, 9:09 am (1 घंटे पहले)· 2

रक्षाबंधन पर श्रीगंगानगर में अनोखा सामाजिक अभियान, बहनों से राखी बंधवाकर भाइयों ने ली नशा मुक्ति की शपथ

श्रीगंगानगर में रक्षाबंधन के मौके पर "मेरा भाई, नशा मुक्त भाई" अभियान के तहत हजारों छात्राओं ने भाइयों को राखी बांधकर जीवन भर नशा न करने का संकल्प कराया।

रक्षाबंधन के अवसर पर राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में सामाजिक चेतना की एक अभूतपूर्व मिसाल देखने को मिली। भाई और बहन के पवित्र बंधन को समर्पित इस त्योहार पर केवल रक्षा का वचन ही नहीं दिया गया, बल्कि युवाओं को नशे के चंगुल से मुक्त कराने के लिए एक व्यापक प्रशासनिक व सामाजिक प्रयास किया गया। जिला कलेक्टर अमित यादव की अगुवाई में "नशा मुक्त भारत अभियान" के अंतर्गत जिले भर के तमाम सरकारी और निजी विद्यालयों में "मेरा भाई, नशा मुक्त भाई" नाम से एक विशेष आयोजन संपन्न हुआ।

राखी बांधकर भाइयों ने लिया जीवन भर नशा न करने का संकल्प

इस अनूठी पहल के तहत विद्यालयों में अध्ययनरत हजारों छात्राओं ने अपने भाइयों की कलाई पर पारंपरिक रेशमी धागों के साथ "नशा मुक्ति की राखी" बांधी। राखी बंधवाने के पश्चात भाइयों ने अपनी बहनों के सिर पर हाथ रखकर अत्यंत भावुक होकर यह आजीवन संकल्प दोहराया कि वे अपने जीवन में कभी भी किसी भी तरह के नशे का सेवन नहीं करेंगे। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से संचालित "ऑपरेशन सीमा" अभियान के सह-प्रभारी विक्रम ज्याणी ने बताया कि इस वृहद आयोजन को सफल बनाने के लिए जिले के सभी शैक्षणिक संस्थानों में बीते कई दिनों से तैयारियां की जा रही थीं। इस आयोजन ने स्पष्ट कर दिया कि पारिवारिक रिश्ते और अपनों का स्नेह युवाओं को नशीले पदार्थों की दलदल से बाहर निकालने का सबसे असरदार जरिया हैं।

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पूरे राजस्थान के लिए प्रेरणा बना श्रीगंगानगर का मॉडल

जिला शिक्षा अधिकारी अरविंदर सिंह के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले भर के ब्लॉक मुख्य शिक्षा अधिकारियों (सीबीईओ), विद्यालय प्राचार्यों, अध्यापकों और छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। एक ही दिन और एक साथ इतने विशाल स्तर पर आयोजित इस पहल ने श्रीगंगानगर को पूरे राजस्थान राज्य में नशा विरोधी अभियानों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में स्थापित कर दिया है। यह आयोजन महज एक औपचारिक रस्म तक सीमित न रहकर एक सशक्त जनआंदोलन में परिवर्तित हो चुका है, जिसका दूरगामी लक्ष्य आने वाली पीढ़ी को जानलेवा व्यसनों से बचाकर एक स्वस्थ, सुरक्षित और जागरूक समाज की नींव रखना है।

सवाल-जवाब

श्रीगंगानगर में रक्षाबंधन पर कौन सा विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया?
श्रीगंगानगर के सरकारी और निजी स्कूलों में "मेरा भाई, नशा मुक्त भाई" कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसके तहत बहनों ने भाइयों को नशा न करने की शपथ दिलाई।
इस अभियान का संचालन किस योजना के तहत किया गया?
यह आयोजन जिला कलेक्टर अमित यादव के नेतृत्व में "नशा मुक्त भारत अभियान" और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के "ऑपरेशन सीमा" के तहत हुआ।
भाइयों ने अपनी बहनों को क्या वचन दिया?
भाइयों ने बहनों के सिर पर हाथ रखकर भावुक मन से यह वचन दिया कि वे अपने जीवन में कभी किसी भी प्रकार का नशा नहीं करेंगे।
इस आयोजन में किन अधिकारियों और विभागों की भूमिका रही?
इसमें जिला कलेक्टर अमित यादव, जिला शिक्षा अधिकारी अरविंदर सिंह, ऑपरेशन सीमा के सह-प्रभारी विक्रम ज्याणी और सभी स्कूलों के प्राचार्यों व शिक्षकों का सहयोग रहा।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·45 मिनट पहले

श्रीगंगानगर का यह प्रशासनिक और सामाजिक प्रयोग इस बात का प्रमाण है कि लोक नीति और जन-सहयोग को यदि पारंपरिक त्योहारों से जोड़ दिया जाए, तो वह एक प्रभावी जनआंदोलन का रूप ले सकता है। सीमावर्ती जिलों में नशे की समस्या के खिलाफ पारिवारिक भावनात्मक जुड़ाव को हथियार बनाना एक सराहनीय कदम है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह संकल्प केवल एक दिवसीय आयोजन तक सीमित रहता है या इसके ठोस धरातलीय परिणाम सामने आते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·45 मिनट पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह समझना आवश्यक है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में तस्करी के जरिए आने वाले नशीले पदार्थों का जाल तोड़ने के लिए इस तरह की जन-भागीदारी कितनी जरूरी है। 'ऑपरेशन सीमा' जैसे प्रशासनिक अभियानों के साथ जब बहनों के भावनात्मक संकल्प जैसी सामाजिक ताकत जुड़ती है, तो अपराधियों के नेटवर्क पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनता है। हालांकि, असली चुनौती इस जन-आंदोलन की निरंतरता बनाए रखने की होगी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह केवल एक दिन का भावनात्मक प्रसंग न बनकर युवाओं को अपराध और नशे की गिरफ्त से स्थायी रूप से दूर रखने वाला एक मजबूत कानूनी और सामाजिक कवच बने।

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