रक्षाबंधन के अवसर पर राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में सामाजिक चेतना की एक अभूतपूर्व मिसाल देखने को मिली। भाई और बहन के पवित्र बंधन को समर्पित इस त्योहार पर केवल रक्षा का वचन ही नहीं दिया गया, बल्कि युवाओं को नशे के चंगुल से मुक्त कराने के लिए एक व्यापक प्रशासनिक व सामाजिक प्रयास किया गया। जिला कलेक्टर अमित यादव की अगुवाई में "नशा मुक्त भारत अभियान" के अंतर्गत जिले भर के तमाम सरकारी और निजी विद्यालयों में "मेरा भाई, नशा मुक्त भाई" नाम से एक विशेष आयोजन संपन्न हुआ।
राखी बांधकर भाइयों ने लिया जीवन भर नशा न करने का संकल्प
इस अनूठी पहल के तहत विद्यालयों में अध्ययनरत हजारों छात्राओं ने अपने भाइयों की कलाई पर पारंपरिक रेशमी धागों के साथ "नशा मुक्ति की राखी" बांधी। राखी बंधवाने के पश्चात भाइयों ने अपनी बहनों के सिर पर हाथ रखकर अत्यंत भावुक होकर यह आजीवन संकल्प दोहराया कि वे अपने जीवन में कभी भी किसी भी तरह के नशे का सेवन नहीं करेंगे। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से संचालित "ऑपरेशन सीमा" अभियान के सह-प्रभारी विक्रम ज्याणी ने बताया कि इस वृहद आयोजन को सफल बनाने के लिए जिले के सभी शैक्षणिक संस्थानों में बीते कई दिनों से तैयारियां की जा रही थीं। इस आयोजन ने स्पष्ट कर दिया कि पारिवारिक रिश्ते और अपनों का स्नेह युवाओं को नशीले पदार्थों की दलदल से बाहर निकालने का सबसे असरदार जरिया हैं।
पूरे राजस्थान के लिए प्रेरणा बना श्रीगंगानगर का मॉडल
जिला शिक्षा अधिकारी अरविंदर सिंह के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले भर के ब्लॉक मुख्य शिक्षा अधिकारियों (सीबीईओ), विद्यालय प्राचार्यों, अध्यापकों और छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। एक ही दिन और एक साथ इतने विशाल स्तर पर आयोजित इस पहल ने श्रीगंगानगर को पूरे राजस्थान राज्य में नशा विरोधी अभियानों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में स्थापित कर दिया है। यह आयोजन महज एक औपचारिक रस्म तक सीमित न रहकर एक सशक्त जनआंदोलन में परिवर्तित हो चुका है, जिसका दूरगामी लक्ष्य आने वाली पीढ़ी को जानलेवा व्यसनों से बचाकर एक स्वस्थ, सुरक्षित और जागरूक समाज की नींव रखना है।





















