मेवाड़ क्षेत्र के आस्था केंद्र भीलवाड़ा जिले के कोटड़ी कस्बे में स्थित श्री कोटड़ी श्याम मंदिर में जलझूलनी एकादशी का महापर्व अभूतपूर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। पूरे देश में यह अपनी तरह का अकेला ऐसा देवस्थान माना जाता है, जहां वर्ष में सिर्फ एक बार जलझूलनी एकादशी के पावन अवसर पर कोटड़ी चारभुजा नाथ अपने गर्भगृह से कृषक का स्वरूप धारण करके जनमानस के बीच आते हैं। इस ऐतिहासिक परंपरा का साक्षी बनने के लिए कोटड़ी में हजारों की तादाद में श्रद्धालु पहुंचे और समूचा कस्बा भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया।
वैदिक मंत्रोच्चार, दुग्धाभिषेक और स्वर्णाभूषणों से किसान स्वरूप
पर्व के दिन मंदिर परिसर में सुबह से ही विशेष धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो गए थे। पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का विधि-विधान पूर्वक दुग्धाभिषेक संपन्न कराया। इसके पश्चात त्रिवेणीधाम से विशेष रूप से लाए गए पावन जल से ठाकुरजी का अभिषेक किया गया। अभिषेक की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रभु को स्वर्णाभूषणों और खास पारंपरिक पोशाक से सुसज्जित कर किसान का स्वरूप प्रदान किया गया। इस अलौकिक वेश में ठाकुरजी भव्य रजत रेवाड़ी में विराजमान हुए और मंदिर प्रांगण से विशाल शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ।
चौकी मंदिर में राम-भरत मिलन और 11 बेवाणों का संगम
ठाकुरजी की यह शोभायात्रा गाजे-बाजे और जयकारों के साथ कोटड़ी के मुख्य बाजारों से होकर आगे बढ़ी। यात्रा का प्रमुख पड़ाव चौकी मंदिर रहा, जहां कोटड़ी श्याम का मिलन अपने बड़े भाई चौकी मंदिर के चारभुजा नाथ से कराया गया। दोनों विग्रहों के इस दिव्य मिलन को देखकर उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे त्रेतायुग के राम-भरत मिलन सदृश अलौकिक दृश्य निरूपित किया। इस भावुक मिलन के उपरांत कस्बे के अलग-अलग मंदिरों से निकले 11 बेवाण भी कोटड़ी श्याम के मुख्य विमान के साथ सम्मिलित हो गए और सभी एक साथ जलझूलनी रस्म के लिए प्रस्थान कर गए।
18 घंटे तक नगर भ्रमण और घर-घर अगवानी
सरोवर में ठाकुरजी को जल में झुलाने की परंपरा के दौरान चारों तरफ हजारों दीपकों का प्रकाश जगमगा उठा और सुमधुर भजनों की गूंज से समूचा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। कोटड़ी चारभुजा नाथ लगभग 18 घंटे तक अपने भक्तों के बीच नगर भ्रमण पर रहे और अगली सुबह अपने निज धाम वापस लौटे। इस भ्रमण काल में प्रभु भक्तों के कंधों पर विराजित होकर कस्बे की प्रत्येक गली और घर-द्वार तक पहुंचे। हर दहलीज पर ग्रामीणों ने पलक-पांवड़े बिछाकर ठाकुरजी की अगवानी की, जगह-जगह भव्य आरतियां उतारीं और सेवा भाव से विविध प्रकार के भोग एवं शीतल पेय अर्पित किए।





















