राजधानी के न्यू सांगानेर रोड पर गुर्जर की थड़ी से लेकर सोडाला तक सड़क चौड़ीकरण की योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए जयपुर विकास प्राधिकरण ने जमीनी स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। न्यायिक निर्देशों के अनुपालन में प्रशासन इस पूरे मार्ग पर अतिक्रमण हटाने और सड़क को 100 फीट चौड़ा करने के लिए व्यापक अभियान चलाने जा रहा है। इस प्रशासनिक कदम के सामने आते ही इलाके के सैकड़ों निवासियों और कारोबारियों में अपनी संपत्तियों को लेकर भारी बेचैनी देखी जा रही है, जिसके विरोध में मंगलवार को पूरे बाजार में शटर गिराकर विरोध दर्ज कराया गया।
अदालती आदेश और पालना रिपोर्ट की तय समयसीमा
इस पूरे मामले में जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने 6 अगस्त को एक अहम आदेश पारित किया था। अदालत ने जयपुर विकास प्राधिकरण को सख्त हिदायत दी थी कि गुर्जर की थड़ी से सोडाला के बीच सड़क मार्ग को तय मानकों के अनुसार चौड़ा किया जाए। न्यायिक पीठ ने इस पूरे मामले की विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के लिए 6 अक्टूबर की तारीख तय की है। तय समयसीमा के भीतर जवाब दाखिल करने के दबाव के चलते प्राधिकरण ने फौरन क्षेत्र में पैमाइश और सीमांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
करीब 2.3 किलोमीटर का दायरा और 250 संपत्तियों पर असर
प्राधिकरण के तकनीकी दल ने मौके पर पहुंचकर सड़क की वास्तविक चौड़ाई मापने और निर्माणों को चिह्नित करने का काम गति से आगे बढ़ाया है। गुर्जर की थड़ी से सोडाला तक का यह रास्ता लगभग 2.3 किलोमीटर लंबा है, जिसे पूरी तरह 100 फीट चौड़ा किया जाना प्रस्तावित है। प्राथमिक आकलन के मुताबिक, इस चौड़ीकरण के दायरे में करीब 250 मकान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान सीधे तौर पर आ रहे हैं। इससे पूर्व भी प्राधिकरण की ओर से गोपालपुरा, मानसरोवर रीको कांटा, खातीपुरा और जगतपुरा फ्लाईओवर रोड जैसे व्यस्त मार्गों पर इस तरह के बड़े ध्वस्तीकरण अभियान चलाए जा चुके हैं।
व्यापारियों की बैठक, पट्टों का दावा और मुआवजे की मांग
प्रशासनिक कार्रवाई की सुगबुगाहट के बीच प्रभावित व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों ने एक आपात बैठक आयोजित की। व्यापारियों का कहना है कि वे बीते 60-70 वर्षों से इस क्षेत्र में शांतिपूर्वक अपना कारोबार संचालित कर रहे हैं। उनका दावा है कि उनके पास गृह निर्माण सहकारी समितियों द्वारा जारी किए गए वैध पट्टे और मालिकाना हक साबित करने वाले पुख्ता दस्तावेज मौजूद हैं। कारोबारियों ने मांग रखी है कि किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ करने से पहले प्रत्येक भवन और भूखंड के कागजों की निष्पक्ष जांच की जाए, साथ ही जिन लोगों के पास वैध दस्तावेज हैं, उनके लिए स्पष्ट पुनर्वास नीति और उचित मुआवजे का प्रावधान घोषित किया जाए।




















