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जलझूलनी एकादशी पर चांदी के रथ में निकले श्री सांवलिया सेठ, सरोवर स्नान और जयकारों के साथ उमड़ा आस्था का सैलाबराजस्थान
22 सित॰ 2026, 9:06 pm (1 घंटे पहले)· 0

जलझूलनी एकादशी पर चांदी के रथ में निकले श्री सांवलिया सेठ, सरोवर स्नान और जयकारों के साथ उमड़ा आस्था का सैलाब

मेवाड़ में देव झूलनी ग्यारस के मौके पर प्रसिद्ध श्री सांवलिया सेठ मंदिर से भगवान की भव्य भाव सवारी निकाली गई, जहां सरोवर स्नान के साथ दो दिवसीय मेले की शुरुआत हुई।

मेवाड़ की ऐतिहासिक और पावन धरा पर जलझूलनी एकादशी यानी देव झूलनी ग्यारस का पर्व बड़े ही श्रद्धा भाव और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जा रहा है। इस धार्मिक उत्सव के अवसर पर मेवाड़ के विख्यात श्री सांवलिया सेठ मंदिर से भगवान की भव्य भाव सवारी निकाली गई। भगवान श्री सांवलिया सेठ एक सुसज्जित चांदी के रथ पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देने मंदिर परिसर से बाहर निकले। इस अलौकिक पल के दर्शन करने और सवारी का हिस्सा बनने के लिए दूर-दराज से हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर प्रांगण पहुंचे, जिससे पूरा इलाका भक्तिमय माहौल में डूब गया।

राम रेवाड़ी की सदियों पुरानी परंपरा और सरोवर स्नान

मेवाड़ क्षेत्र में देव झूलनी ग्यारस के पावन दिन राम रेवाड़ी निकालने की परंपरा कई पीढ़ियों से निरंतर चली आ रही है। इसी ऐतिहासिक लोक परंपरा का निर्वहन करते हुए श्री सांवलिया सेठ मंदिर से यह पारंपरिक भाव सवारी निकाली गई। चांदी के भव्य रथ पर विराजमान भगवान श्री सांवलिया सेठ को नगर भ्रमण कराते हुए पवित्र सरोवर तक ले जाया गया। सरोवर के तट पर पूरे विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ भगवान को स्नान कराया गया। सवारी के पूरे मार्ग में विभिन्न प्रकार की नयनाभिराम और भव्य झांकियां भी साथ-साथ चलती रहीं, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।

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गुलाल के उड़ते रंग और भक्तों का उल्लास

सवारी के गुजरने वाले मार्गों पर श्रद्धालु पहले से ही कतारबद्ध होकर खड़े रहे, ताकि चांदी के रथ पर सवार श्री सांवलिया सेठ की एक झलक पा सकें। पूरे मार्ग में भक्तों ने जोरदार जयकारे लगाए, जिससे वातावरण गूंज उठा। अपनी खुशी और भक्ति प्रकट करने के लिए श्रद्धालुओं ने जमकर अबीर-गुलाल उड़ाया। रंगों की फुहार के बीच श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते-गाते हुए भगवान के रथ के साथ आगे बढ़ते नजर आए। नगर के विभिन्न चौराहों और रास्तों पर स्थानीय लोगों ने भगवान के दर्शन कर शीश नवाया और आशीर्वाद प्राप्त किया।

साल में एक बार मिलने वाला दर्शन और दो दिवसीय मेला

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देव झूलनी ग्यारस का दिन बेहद खास माना जाता है क्योंकि यही वह पावन अवसर होता है जब भगवान स्वयं अपने गर्भगृह से बाहर निकलकर नगरवासियों और भक्तों के बीच आते हैं। भगवान के इस साक्षात रूप के दर्शन करने की चाह में हर वर्ष यहां जनसैलाब उमड़ता है। इस विशेष धार्मिक आयोजन को और भव्य बनाने के लिए मंदिर परिक्षेत्र में दो दिवसीय मेले का आयोजन भी किया जा रहा है। भाव सवारी और मेले के संयोजन ने पूरे क्षेत्र में एक अलग ही रौनक भर दी है, जिससे मेवाड़ की समृद्ध लोक संस्कृति, अटूट जन-आस्था और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।

सवाल-जवाब

देव झूलनी ग्यारस पर भगवान श्री सांवलिया सेठ किस पर सवार होकर निकले?
भगवान श्री सांवलिया सेठ एक सुसज्जित चांदी के रथ पर सवार होकर भाव सवारी में निकले।
भाव सवारी के दौरान भगवान को कहां ले जाया गया?
भगवान को चांदी के रथ में बैठाकर पवित्र सरोवर तक ले जाया गया, जहां उन्हें स्नान कराया गया।
मेवाड़ में इस पर्व पर कौन सी पुरानी परंपरा निभाई जाती है?
मेवाड़ में देव झूलनी ग्यारस यानी जलझूलनी एकादशी के दिन राम रेवाड़ी निकालने की वर्षों पुरानी परंपरा निभाई जाती है।
इस अवसर पर मंदिर क्षेत्र में कितने दिनों का मेला आयोजित हो रहा है?
इस पावन धार्मिक अवसर पर मंदिर परिक्षेत्र में दो दिवसीय मेले का आयोजन किया जा रहा है।
सवारी मार्ग पर भक्तों ने अपनी खुशी कैसे व्यक्त की?
श्रद्धालुओं ने जोरदार जयकारे लगाए, अबीर-गुलाल उड़ाया और ढोल-नगाड़ों की धुन पर नाचते-गाते हुए सवारी का स्वागत किया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 मिनट पहले

सांवलिया सेठ के चांदी के रथ और उस पर उड़ते गुलाल के बीच नाचते लोगों को देखकर मुझे पिछले साल की वो भीड़ याद आ गई, पैर रखने तक की जगह नहीं थी।

Rohan Verma@rohan-verma·अभी

करण भाई, सच में! चांदी के रथ और उस गुलाल के बीच पैर रखने की जगह न होने वाली बात एकदम सही कही आपने, पिछले साल का वो नज़ारा आंखों के सामने आ गया।

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