राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित प्रसिद्ध तीर्थ रामदेवरा में वार्षिक भादवा मेले की रौनक अपने चरम पर है। सामाजिक समरसता और भाईचारे के इस बड़े धार्मिक समागम में दशकों पुरानी परंपराएं आज भी पूरी आस्था के साथ निभाई जा रही हैं। इसी कड़ी में भला फाउंडेशन धर्मशाला के प्रांगण में 45वां ‘अखिल भारतीय भांग स्नेह मिलन’ आयोजित किया गया, जहां भारत के कोने-कोने से पहुंचे भक्तों ने महज 20 मिनट के भीतर 200 लीटर भांग का प्रसाद ग्रहण कर लिया। पांच दशक पूर्व सामाजिक मेलजोल और सद्भाव बढ़ाने के संकल्प के साथ शुरू हुई यह परंपरा अब हर साल मेले का एक बड़ा आकर्षण बन चुकी है।
मेवे और दूध के खास मिश्रण से तैयार हुआ 200 लीटर प्रसाद
मंगलवार को आयोजित इस सामूहिक मिलन समारोह में प्रसाद तैयार करने के लिए बड़े पैमाने पर सामग्री जुटाई गई थी। इस बार कुल 20 किलो भांग को विशेष विधि से घोंटकर तैयार किया गया। इस पेय को समृद्ध बनाने के लिए एक क्विंटल दूध के साथ 30 किलो सूखे मेवे मिलाए गए, जिसमें बादाम, पिस्ता, काजू, किशमिश और मिश्री शामिल रहे। इस पूरे मिश्रण को तैयार करने में वहां मौजूद सभी लोगों ने सामूहिक रूप से हाथ बंटाया। इसके बाद पूरे विधि-विधान से भगवान भोले बाबा को भोग अर्पित किया गया और फिर वहां उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच इसे प्रसादी के रूप में वितरित किया गया।
प्रतियोगिता का दौर बीता, अब केवल स्वैच्छिक प्रसाद
इस आयोजन से जुड़ा एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि पहले यहां भांग पीने की औपचारिक प्रतियोगिता आयोजित की जाती थी। उस दौर में कुछ प्रतिभागी अकेले ही 10 से 12 लीटर तक भांग पी जाते थे। हालांकि समय बीतने के साथ आयोजकों ने प्रतिस्पर्धा की यह व्यवस्था पूरी तरह समाप्त कर दी। अब यहां कोई होड़ नहीं होती, बल्कि हर श्रद्धालु अपनी मर्जी और क्षमता के अनुसार जितना चाहे उतना प्रसाद ग्रहण कर सकता है। इस बार दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और जोधपुर समेत कई शहरों से आए भक्तों ने जब यह पेय लेना शुरू किया तो उनका उत्साह देखने लायक था और देखते ही देखते सारा प्रसाद खत्म हो गया।
एक जाजम पर मिटते हैं सारे भेदभाव
आयोजन की देखरेख कर रहे संचालक हीरालाल हर्ष ने बताया कि इस कार्यक्रम का असली उद्देश्य समाज में आपसी प्रेम, स्नेह और भाईचारे की जड़ें मजबूत करना है। मेले में पहुंचने वाले तमाम श्रद्धालु एक ही जाजम पर बैठते हैं और पारिवारिक रिश्तों जैसी आत्मीयता साझा करते हैं। ऊंच-नीच, जाति-पात और आपसी मनमुटाव को पीछे छोड़कर सभी लोग एक स्वर में बाबा के जयकारे लगाते हैं। इस मेले की शुरुआत बीते 13 सितंबर को भादवा सुदी दूज से हुई थी और यह 26 सितंबर तक जारी रहेगा। इस धार्मिक मेले में अब तक करीब 50 से 60 लाख श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर चुके हैं।





















