राजस्थान के भीलवाड़ा जिले स्थित मांडल इलाके में एक रिहायशी ठिकाने के बेहद नजदीक 7 फीट लंबा अजगर दिखने से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। यह पूरा मामला पीथास ग्राम पंचायत के मालीखेड़ा गांव का है, जहां बस स्टैंड के पास भारी भरकम सांप की मौजूदगी ने लोगों को दहशत में डाल दिया। व्यस्त बस स्टैंड के पास विशालकाय अजगर रेंगता देख देखते ही देखते वहां ग्रामीणों का बड़ा जमावड़ा लग गया और पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
बस स्टैंड के पास हलचल और रिहायशी हिस्से की तरफ बढ़ता खतरा
मालीखेड़ा के बस स्टैंड पर दिन के समय ग्रामीणों और मुसाफिरों की लगातार आवाजाही बनी रहती है। अचानक झाड़ियों के पास करीब 7 फीट लंबे अजगर पर जब राहगीरों की नजर पड़ी, तो लोग सहम गए। खबर फैलते ही आसपास के खेतों और घरों से भारी संख्या में लोग मौके पर दौड़े चले आए। ग्रामीण सुरक्षित दूरी बनाते हुए अजगर की हरकतों पर नजर रखे हुए थे। किसी को यह अंदेशा नहीं था कि भारी भरकम शरीर वाला यह सांप किस दिशा में रुख करेगा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अजगर धीरे-धीरे आबादी वाले मुख्य हिस्से की ओर सरकने लगा था। चूंकि आसपास लोगों के मकान थे और बच्चे व मवेशी भी मौजूद थे, इसलिए ग्रामीणों की घबराहट लगातार बढ़ती जा रही थी। लोगों ने तत्काल इस घटना की सूचना वन विभाग को दी, ताकि विशेषज्ञ टीम आकर स्थिति को नियंत्रित कर सके। हालांकि वन विभाग की टीम के पहुंचने में देरी हो रही थी और अजगर का आबादी की ओर बढ़ता कदम किसी बड़े खतरे का सबब बन सकता था।
युवक की दिलेरी और सुरक्षित रेस्क्यू अभियान
जब वन विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंच सकी और अजगर आबादी के और करीब पहुंच गया, तब पीथास गांव के रहने वाले सोनू बलाई पुत्र खेमराज बलाई ने आगे बढ़कर कमान संभाली। सोनू बलाई ने हालात की गंभीरता को भांपते हुए बिना घबराए बेहद सतर्कता के साथ अजगर को नियंत्रित करने की कोशिश शुरू की। उन्होंने आसपास मौजूद लोगों को पीछे हटने की हिदायत दी ताकि सांप आक्रामक न हो सके।
सोनू बलाई ने बेहद सावधानीपूर्वक 7 फीट लंबे अजगर को सुरक्षित तरीके से पकड़ा और एक मजबूत बोरे में बंद कर दिया। इस साहसिक और सूझबूझ भरे कदम की वजह से अजगर रिहायशी इलाके में घुसने से बच गया और किसी भी ग्रामीण या मवेशी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। इस सफल रेस्क्यू के कुछ ही देर बाद वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची, जिसके बाद सोनू ने बोरे में बंद अजगर को आधिकारिक तौर पर वनकर्मियों के हवाले कर दिया।
वन विभाग ने जंगल में छोड़ा, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
वन विभाग की टीम ने अजगर को अपनी कस्टडी में लेने के बाद उसकी शारीरिक स्थिति की जांच की और उसे सुरक्षित वाहन में रखकर घने वन क्षेत्र की ओर रवाना कर दिया। जंगल के सुरक्षित इलाके में ले जाकर अजगर को उसके प्राकृतिक वास में छोड़ दिया गया, जिससे किसी भी तरह की जनहानि की आशंका हमेशा के लिए खत्म हो गई।
अजगर के सफलतापूर्वक पकड़े जाने और दूर जंगल में छोड़े जाने के बाद मालीखेड़ा के ग्रामीणों ने चैन की सांस ली। गांव में काफी देर तक इसी घटनाक्रम और सोनू बलाई की तत्परता की सराहना होती रही। ग्रामीणों का कहना था कि यदि समय रहते सोनू हिम्मत न दिखाते, तो आबादी वाले हिस्से में अजगर के घुसने से कोई गंभीर अनहोनी घट सकती थी। सुरक्षित रेस्क्यू के बाद गांव में स्थिति पूरी तरह सामान्य हो गई।





















