घरेलू प्राइमरी मार्केट में 24 सितंबर को दो अलग-अलग सेक्टर्स के मेनबोर्ड पब्लिक इश्यू आम निवेशकों के लिए खोल दिए गए हैं। इनमें एक तरफ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी कंपनी ए-वन स्टील्स इंडिया का 405 करोड़ रुपये का ऑफर है, तो दूसरी तरफ डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म संचालित करने वाली फिनटेक कंपनी मनीव्यू का 1,091.68 करोड़ रुपये का बड़ा आईपीओ मैदान में उतरा है। दोनों कंपनियों का बिडिंग पीरियड एक ही समय पर चलेगा, जिससे बाजार में खुदरा और संस्थागत निवेशकों के बीच पूंजी आवंटन को लेकर दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है।
सब्सक्रिप्शन शेड्यूल, अलॉटमेंट और लिस्टिंग की तारीखें
टाइमलाइन के लिहाज से दोनों कंपनियों ने एक समान कैलेंडर तय किया है। ए-वन स्टील्स इंडिया और मनीव्यू दोनों के ही इश्यू 24 सितंबर को खुले हैं और बोली लगाने की अंतिम तारीख 28 सितंबर निर्धारित की गई है। इसके बाद शेयरों का अलॉटमेंट 29 सितंबर को तय होने की संभावना है। जिन निवेशकों को शेयर आवंटित होंगे, उनके डीमैट खातों में क्रेडिट और जिन्हें शेयर नहीं मिलेंगे उन्हें रिफंड की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों शेयर 1 अक्टूबर को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर एक साथ सूचीबद्ध होंगे।
इश्यू साइज और फ्रेश बनाम ओएफएस का ढांचा
दोनों कंपनियों के पूंजी जुटाने के ढांचे में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। ए-वन स्टील्स का पूरा बुक-बिल्ट इश्यू 405 करोड़ रुपये का है। इसमें से 355 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू जारी किया जा रहा है, जबकि मौजूदा प्रमोटरों और शेयरधारकों की तरफ से 50 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल (OFS) रखा गया है। इसका मतलब यह है कि कुल इश्यू साइज का करीब 88% हिस्सा सीधे कंपनी के खाते में जाएगा, जिसका उपयोग कंपनी अपनी व्यावसायिक जरूरतों के लिए करेगी।
इसके विपरीत, मनीव्यू का पब्लिक इश्यू आकार में ए-वन स्टील्स से लगभग 2.7 गुना बड़ा है और इसका कुल साइज 1,091.68 करोड़ रुपये है। इस ऑफर के तहत 750 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी किए जा रहे हैं, जबकि 341.68 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल शामिल किया गया है। मनीव्यू के मामले में नए शेयरों का हिस्सा कुल इश्यू का लगभग 69% बैठता है, यानी एक बड़ा हिस्सा 341.68 करोड़ रुपये उन पुराने निवेशकों की जेब में जाएगा जो अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं। कंपनी को ओएफएस से कोई पूंजी प्राप्त नहीं होगी।
प्राइस बैंड और लॉट साइज का गणित
शेयरों की कीमत और लॉट साइज के पैमाने पर भी दोनों के नियम अलग हैं। ए-वन स्टील्स इंडिया ने अपने शेयरों के लिए 385 रुपये से 405 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। इसका न्यूनतम लॉट साइज 37 शेयरों का है। ऐसे में रिटेल इनवेस्टर को ऊपरी प्राइस बैंड 405 रुपये के हिसाब से एक लॉट के लिए कम से कम 14,985 रुपये की बोली लगानी होगी।
दूसरी ओर, मनीव्यू ने अपने शेयर का प्राइस बैंड 32 रुपये से 34 रुपये प्रति शेयर के निचले स्तर पर रखा है। हालांकि इसका लॉट साइज काफी बड़ा है, जिसमें एक लॉट के अंदर 441 शेयर शामिल हैं। ऊपरी बैंड 34 रुपये के आधार पर खुदरा निवेशकों को कम से कम एक लॉट हासिल करने के लिए 14,994 रुपये की न्यूनतम पूंजी लगानी पड़ेगी। इस प्रकार दोनों आईपीओ में एक लॉट के लिए आवश्यक निवेश राशि लगभग 15,000 रुपये के करीब ही बैठती है।
ग्रे मार्केट प्रीमियम और संभावित लिस्टिंग गेन
अनऑफिशियल ग्रे मार्केट में रुझान डिजिटल प्लेटफॉर्म मनीव्यू की तरफ अधिक सकारात्मक बना हुआ है। दोपहर 3:02 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, मनीव्यू का जीएमपी 12.75 रुपये पर देखा गया। इस प्रीमियम को 34 रुपये के अपर प्राइस बैंड में जोड़ने पर शेयर की संभावित लिस्टिंग कीमत 46.75 रुपये निकलती है, जो कि 37.50% के मजबूत लिस्टिंग मुनाफे का संकेत देती है।
दूसरी तरफ, ए-वन स्टील्स इंडिया का ग्रे मार्केट प्रीमियम 55 रुपये पर चल रहा है। 405 रुपये के अपर प्राइस बैंड के मुकाबले यह प्रीमियम 460 रुपये के लिस्टिंग स्तर की ओर इशारा करता है, जो लगभग 13.58% के रिटर्न के बराबर है। यानी ग्रे मार्केट में मनीव्यू को प्रतिशत के हिसाब से बेहतर लिस्टिंग रिस्पॉन्स मिल रहा है।
दोनों कंपनियों का कोर बिजनेस और कामकाज
बिजनेस मॉडल पर नजर डालें तो ए-वन स्टील्स एक बैकवर्ड्स-इंटीग्रेटेड स्टील निर्माता कंपनी है। यह कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में छह मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स का संचालन करती है। इसके उत्पादों में एचआर और सीआर कॉइल्स, एचआर और सीआर पाइप्स, गैल्वेनाइज्ड ट्यूब्स और टीएमटी बार्स शामिल हैं, जिनकी खपत इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर होती है।
वहीं मनीव्यू बेंगलुरु स्थित एक फिनटेक कंपनी है जो पूरी तरह से डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म पर काम करती है। कंपनी के पोर्टफोलियो में पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड, आर्न्ड वेज एक्सेस, होम लोन, लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी और इंश्योरेंस जैसे फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स शामिल हैं। खास बात यह है कि कंपनी का पूरा संचालन मोबाइल ऐप के जरिए होता है और इसकी कोई भी फिजिकल ब्रांच नहीं है।

















