राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित किशनगढ़ हवाई अड्डे पर उस समय हड़कंप मच गया जब पायलट प्रशिक्षण के दौरान एक विमान तकनीकी समस्या का शिकार हो गया। अव्यन्ना एविएशन अकादमी के इस ट्रेनी विमान ने उड़ान भरी ही थी कि उसके टायर में खराबी या फटने का मामला सामने आया। हवा में चक्कर काट रहे इस विमान की स्थिति को देखते हुए हवाई अड्डा प्रबंधन ने तुरंत सतर्कता बरती और पूरे परिसर में पूर्ण आपात स्थिति लागू कर दी।
सुरक्षा बलों की तैनाती और राहत के पुख्ता इंतजाम
विमान को सुरक्षित नीचे उतारने के लिए जमीनी स्तर पर व्यापक तैयारियां की गई हैं। किसी भी अप्रिय स्थिति या अनहोनी की आशंका को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के जवानों को तुरंत हवाई अड्डे पर तैनात कर दिया गया है। एयर ट्रैफिक कंट्रोल और हवाई अड्डा प्रशासन लगातार विमान की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं ताकि पायलट से निरंतर संपर्क बना रहे और आपात प्रोटोकॉल का पालन कराया जा सके।
ईंधन कम होने के बाद कराई जाएगी लैंडिंग
आपात लैंडिंग के दौरान आग लगने के जोखिम को न्यूनतम करने के लिए विशेष रणनीति बनाई गई है। विमान के भीतर अभी भी लगभग ढाई से 3 घंटे का ईंधन मौजूद है। अधिकारियों की योजना है कि विमान को हवा में चक्कर कटवाकर उसका फ्यूल तय स्तर तक कम किया जाए। कम ईंधन होने से विमान का वजन घट जाता है, जिससे आपातकालीन परिस्थिति में उतरते समय संतुलन बनाना अधिक आसान होता है।
बैली लैंडिंग की संभावना और जांच
पहिए में खराबी होने की स्थिति में विमान को पारंपरिक कंक्रीट रनवे पर उतारने के बजाय रनवे के पास वाली कच्ची जमीन पर पेट के बल यानी ‘बैली लैंडिंग’ कराने की योजना पर विचार किया जा रहा है। ऐसा करने से घर्षण के कारण चिंगारी निकलने और ईंधन में आग भड़कने का खतरा काफी कम हो जाता है। अव्यन्ना एविएशन डीजीसीए से विधिवत मान्यता प्राप्त एक फ्लाइंग ट्रेनिंग संगठन है। टायर में आई इस गंभीर खराबी के मूल कारणों के बारे में फिलहाल आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।























