मध्य पोलैंड के मासोवियन वोइवोडशिप प्रांत में स्थित एक सरकारी सैटेलाइट स्टेशन में बुधवार रात आग लग गई, जिसे पोलिश सरकार ने सुनियोजित तोड़फोड़ की कार्रवाई करार दिया है। यह स्टेशन अमेरिकी कंपनी स्पेसएक्स की स्टारलिंक तकनीक का इस्तेमाल करता है और पोलैंड के जरिए पड़ोसी देश यूक्रेन सहित कई महत्वपूर्ण संस्थानों को इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने का काम करता है। इस घटना के बाद यूरोपीय सुरक्षा तंत्र में हलचल बढ़ गई है, क्योंकि पश्चिमी देश पहले से ही महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर संभावित हमलों को लेकर सतर्क हैं।
इंटरनेट संपर्क काटने की सुनियोजित साजिश
पोलैंड के उप प्रधानमंत्री क्रिस्तोफ गावकोव्स्की ने घटना के संबंध में कहा कि वोला क्रोबोव्स्का गांव में स्थित इस स्टेशन में आग दुर्घटनावश नहीं लगी थी, बल्कि इसे विशेष रूप से स्टेशन को निष्क्रिय करने के उद्देश्य से लगाया गया था। उनका कहना था कि इस हमले की मुख्य मंशा यूक्रेन की सेना समेत इंटरनेट सेवा पर निर्भर कई आवश्यक संस्थानों के संचार नेटवर्क को पूरी तरह बाधित करना था।
उप प्रधानमंत्री क्रिस्तोफ गावकोव्स्की ने पोलिश सार्वजनिक प्रसारक टीवीपी इन्फो से बातचीत में स्पष्ट किया कि मामले की आधिकारिक जांच लगातार जारी है। हालांकि, जांच में सामने आ रहे कई महत्वपूर्ण संकेत इस ओर इशारा करते हैं कि यह हमला रूसी हमले के एक नए सिद्धांत यानी डॉक्ट्रिन के तहत किया गया प्रतीत होता है। इस मामले में मॉस्को स्थित क्रेमलिन की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी जारी नहीं की गई है। राहत की बात यह है कि आग लगने की इस घटना के बावजूद यह उपग्रह केंद्र लगातार काम कर रहा है और सेवाएं पूरी तरह ठप नहीं हुईं।
डेनमार्क की खुफिया एजेंसी का बड़ा आकलन
पोलैंड की इस घटना के बीच डेनमार्क की खुफिया सेवा ने भी एक नया सुरक्षा खतरा आकलन जारी किया है। इस आकलन रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि आने वाले महीनों में रूस अपनी हाइब्रिड युद्ध रणनीतियों को और अधिक आक्रामक बना सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नाटो देशों पर किसी सीधे और पूर्ण सैन्य हमले की संभावना फिलहाल अत्यधिक कम बनी हुई है, लेकिन इस बात का एक बेहद कम मगर लगातार बढ़ता हुआ जोखिम मौजूद है कि रूस नाटो सदस्य देशों के खिलाफ एक सीमित सैन्य हमला कर सकता है।
हाल के हफ्तों के दौरान यूरोपीय नाटो सदस्य देशों ने यह अंदेशा जताया है कि रूस यूक्रेन को मिल रहे पश्चिमी समर्थन और प्रतिबद्धता की परीक्षा लेने के लिए इस तरह के गुप्त हमलों की योजना बना सकता है। हालांकि, रूसी प्रशासन ऐसे किसी भी आरोप को पूरी तरह खारिज करता रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, हाइब्रिड वॉरफेयर या हाइब्रिड हमलों का इस्तेमाल गैर सैन्य तौर तरीकों से विरोधी को अस्थिर करने और उस पर दबाव बनाने के लिए किया जाता है। इसके तहत साइबर हमले, बुनियादी ढांचे में तोड़फोड़ और गलत सूचनाएं फैलाना शामिल होता है। अक्सर इन वारदातों को अंजाम देने के लिए प्रॉक्सी नेटवर्क का सहारा लिया जाता है, जिससे रूस इसमें अपनी सीधी संलिप्तता से इनकार करता रहा है।
रूस का रुख और पूर्वी मोर्चे पर तनाव
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कई मौकों पर दोहराया है कि मॉस्को की नाटो सदस्य देशों पर हमला करने की कोई योजना नहीं है। इसके साथ ही, इसी महीने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा था कि असल में यूरोप युद्ध की तैयारियों की बातें कर रहा है। सर्गेई लावरोव का कहना था कि यदि यूरोप रूस पर हमला करता है, तो वह यूक्रेन में जारी संघर्ष से बिल्कुल अलग तरह का युद्ध होगा और वह बहुत छोटा होगा।
गौरतलब है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने वर्ष 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण स्तर का सैन्य आक्रमण शुरू किया था। वर्तमान समय में मॉस्को यूक्रेन के लगभग 20 प्रतिशत हिस्से पर अपना नियंत्रण बनाए हुए है, जिसमें वर्ष 2014 में कब्जा किया गया क्रीमिया प्रायद्वीप भी शामिल है। जमीन पर जारी इस संघर्ष का असर अब सीमा पार यूरोपीय देशों के रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा चिंताओं के रूप में भी सामने आ रहा है।
खारकीव और कीव पर रूस के घातक रातभर के हमले
यूक्रेन के अंदरूनी हालात की बात करें तो बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात खारकीव और कीव शहरों को रूस के भीषणतम हवाई हमलों का सामना करना पड़ा। यूक्रेन की राज्य आपातकालीन सेवा के अनुसार, खारकीव क्षेत्र के तारा न्यलित्स्या गांव में स्थित एक कृषि फार्म पर हुए रूसी हमले में छह लोगों की मौत हो गई और बारह अन्य घायल हो गए। क्षेत्रीय अधिकारियों ने जानकारी दी कि जान गंवाने वाले लोग वहां सब्जियां छांटने का काम कर रहे कृषि मजदूर थे, जिनमें चार महिलाएं शामिल थीं। हमले के बाद घटनास्थल पर चारों तरफ जमीन पर प्याज बिखरे नजर आए।
राजधानी कीव में भी रातभर हुई बमबारी में दो लोगों की मौत दर्ज की गई, जबकि आठ अन्य नागरिक घायल हो गए। कीव में पचास से अधिक नागरिक प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान पहुंचा, जिसमें एक मैटरनिटी अस्पताल की इमारत भी शामिल थी। मैटरनिटी अस्पताल के निदेशक ने बताया कि इस भयानक हमले के दौरान बेसमेंट शेल्टर में एक महिला ने बेटे को जन्म दिया। उन्होंने कहा, "इतनी भयानक रात में भी जिंदगी आगे बढ़ती रहती है।"
दूसरी ओर, रूस के रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर दावा किया कि उसकी सेना ने यूक्रेनी रक्षा प्रतिष्ठानों, सैन्य साजो सामान के केंद्रों, टेलीकॉम केंद्रों और यूक्रेनी सेना द्वारा उपयोग किए जा रहे जहाजों पर सटीक निशाने साधे हैं।
पड़ोसी देशों में गिरे ड्रोन और मिसाइल रक्षा की मांग
युद्ध की यह आंच पड़ोसी देशों तक भी महसूस की जा रही है। मोल्दोवा की राष्ट्रपति ने कहा कि चार रूसी ड्रोन उनके हवाई क्षेत्र में दाखिल हुए, जिनमें से कम से कम एक ड्रोन में विस्फोट हुआ। इसके अलावा, पड़ोसी देश रोमानिया के रक्षा मंत्रालय ने भी पुष्टि की कि एक ड्रोन उनकी सीमा क्षेत्र के भीतर दुर्घटनाग्रस्त हुआ।
हाल के महीनों में यूक्रेन पर रूसी हवाई हमले और अधिक विनाशकारी साबित हुए हैं, क्योंकि रूस अब नए जेट चालित ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है, जिन्हें हवा में मार गिराना बेहद मुश्किल होता जा रहा है। इन उन्नत ड्रोनों का मुकाबला करने के लिए कीव कम लागत वाले हथियार तैयार करने की दौड़ में लगा है, क्योंकि मिसाइलें और लड़ाकू जेट विमान इनके मुकाबले बहुत महंगे पड़ते हैं।
न्यू यॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि लोगों की जान बचाने के लिए हमें बैलिस्टिक इंटरसेप्टर की सख्त आवश्यकता है। उन्होंने इस दिशा में संयुक्त राज्य अमेरिका से तत्काल सहायता प्रदान करने की अपील की। वोलोदिमीर जेलेंस्की ने जोर देकर कहा कि व्लादिमीर पुतिन को युद्ध जारी रखने और इस बुराई को आगे फैलाने से रोकना होगा, क्योंकि वे जमीन के हर किलोमीटर के लिए और अधिक लोगों को मारने के रास्ते तलाश रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन सर्दियों के दौरान रूस के ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बनाने का प्रयास करेगा।
यूक्रेनी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया जब रूसी राष्ट्रपति के दूत किरिल दिमित्रीव अमेरिकी अधिकारियों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर से मुलाकात करने के लिए अमेरिका पहुंचे हैं। वहीं, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बोलते हुए रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने साफ कर दिया कि युद्ध में किसी भी प्रकार का विराम नहीं होगा।



















