देशभर में जहां दीपावली का पावन पर्व रोशनी, दीयों और खुशियों के साथ मनाया जाता है, वहीं भीलवाड़ा शहर की वस्त्रनगरी में इस पर्व को मनाने का अंदाज पूरी तरह अलग है। शहर के पंचमुखी मोक्ष धाम में बने मसाणिया भैरवनाथ मंदिर में हर साल दीपावली पर बेहद अनूठी और हैरान कर देने वाली परंपरा का पालन किया जाता है। आम तौर पर लोग रात के वक्त श्मशान भूमि के पास जाने से भी कतराते हैं, लेकिन इस विशेष मंदिर में साधक रात के समय श्मशान की खामोशी के बीच बैठकर तंत्र-मंत्र, विशेष कपाल पूजा और खप्पर साधना को अंजाम देते हैं।
दो दशकों से चली आ रही है यह खास परंपरा
मसाणिया भैरवनाथ मंदिर में आयोजित होने वाली यह कपाल पूजा और खप्पर साधना कोई नई परंपरा नहीं है, बल्कि यह पिछले 20 वर्षों से बिना किसी बाधा के लगातार चली आ रही है। इस विशेष धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत दीपावली के दिन से करीब 10 दिन पहले ही विभिन्न पूजन कार्यक्रमों के साथ हो जाती है। आधी रात तक गूंजने वाले मंत्रों की आवाज, श्मशान की डरावनी शांति और भैरवनाथ की इस तांत्रिक साधना का पूरा माहौल वहां आने वाले श्रद्धालुओं और देखने वालों के लिए हमेशा से बड़ा आकर्षण का केंद्र रहा है।
अंगारों से भरे खप्पर के साथ कठिन साधना
इस तांत्रिक अनुष्ठान की प्रक्रिया बेहद कठिन होती है, जिसमें इस्तेमाल होने वाले खास खप्पर के अंदर कपूर, शुद्ध देशी घी, पंचधूप और नारियल समेत तमाम तांत्रिक और पूजन सामग्री डालकर आग जलाई जाती है। इसके बाद साधक जलते हुए अंगारों से भरे इस खप्पर को अपने सिर यानी कपाल, हाथों, पीठ या फिर सीने पर रखकर अत्यंत कठिन साधना करते हैं। इस पूरी आराधना की एक बड़ी खूबी यह भी है कि इसमें हर रोज साधक बदलते हैं और अलग-अलग तांत्रिक तथा धार्मिक विधानों के जरिए भैरवनाथ की पूजा-अर्चना को पूरा किया जाता है।
दुनिया में अमन और कल्याण के लिए होती है प्रार्थना
मंदिर के पुजारी रवि खटीक ने इस अनोखी परंपरा के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि जहां एक ओर आम लोग अपने घरों को दीपों से सजाकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं, वहीं वे और उनके साधक इस श्मशान की तपोभूमि पर बैठकर पूरी दुनिया के कल्याण और शांति की प्रार्थना करते हैं। इस अनुष्ठान को करने का मुख्य मकसद यही होता है कि हर परिवार सुरक्षित रहे, समाज में भाईचारा और शांति बनी रहे, हर तरह की विपत्तियां और बाधाएं दूर हों तथा पूरे राजस्थान के साथ-साथ पूरी दुनिया में खुशहाली आए।



















