राष्ट्रध्वज लेकर चलने पर मिलने वाली पाबंदियों और प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ आवाज मुखर करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार को खुली चुनौती दी है। केरल के कोच्चि में आयोजित जंतर-मंतर एट कोच्चि अभियान के मंच से बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस के डंडों और जेल की सलाखों से देशसेवा का जज्बा कमजोर नहीं पड़ने वाला है। उनका यह तीखा तेवर राजनीतिक हलकों में खासी चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में तिरंगा यात्रा जारी रखने का संकल्प दोहराया है।
ब्रिटिश शासन जैसी पाबंदियों का लगाया आरोप
हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज के साथ जाने के कारण अपनी पार्टी के सदस्यों सौरव दास और आशुतोष रांका के साथ खुद की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए अभिजीत दीपके खासे आक्रामक नजर आए। उन्होंने मौजूदा राजनीतिक हालात को ब्रिटिश राज की क्रूर नीतियों के समकक्ष बताते हुए कहा कि अपनी ही मातृभूमि में तिरंगा फहराने जैसी सामान्य गतिविधि पर भी पाबंदियां लगाई जा रही हैं और लोगों को जेल भेजा जा रहा है।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता और चुनावी प्रक्रिया पर उठाए सवाल
सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि नागरिकों के निजी जीवन के फैसलों में अत्यधिक दखलंदाजी की जा रही है। उनके मुताबिक, प्रशासन अब यह तय करने का प्रयास कर रहा है कि आम नागरिक अपनी थाली में क्या खाएं, अपने जीवनसाथी का चुनाव कैसे करें और मतदान के दौरान किस उम्मीदवार का समर्थन करें। इसके साथ ही उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए और आशंका जताई कि इसका दुरुपयोग चुनावी परिणामों को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है।
देश के संस्थापकों को याद कर दी कड़ी चुनौती
अपने संबोधन के अंत में देश के निर्माताओं का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय गणराज्य महात्मा गांधी को अपनी आत्मा, डॉ. बी.आर. आंबेडकर को अपनी रीढ़ और जवाहरलाल नेहरू को अपना मस्तिष्क मानता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार चाहे जितने लंबे समय तक सत्ता में रहे, लेकिन इन महान विभूतियों के कद और योगदान की बराबरी कभी नहीं कर सकती है। उनके इस आक्रामक रुख से आने वाले दिनों में राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ने के पूरे आसार हैं।



















